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DIVYA RaniDIVYA RaniFollow22 Jul 2024, 04:50 pm
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बihar विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से, पांच दिन में सरकार पर नज़र

Patna, Bihar:पटना बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि... बिहार विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक होगा... पांच दिनों का सत्र चलेगा... इसमें विधायक हिस्सा लेंगे और उसमें क्वेश्चन आवर ज़ीरो आवर.. ध्यानाकर्षण , औ प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा.. विधायकों के द्वारा गैर-सरकारी संकल्प और सरकार के द्वारा विधेयक और राजकीय कार्य भी लाए जाएंगे। कुल मिलाकर पांच दिन चलने वाला काफी महत्वपूर्ण है...इसमें राज्य के सभी माननीय विधायक हिस्सा लेंगे और अपने विधायी कार्यों के माध्यम से राज्य के विकास के लिए और क्षेत्र की बातों को असेंबली के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करायेंगे..
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बंगाल की खाड़ी में फिर डूबा ट्रॉलर, 13 मछुआरे बचाए गए, ट्रॉलर की खोज जारी

Jalabaria, West Bengal:আবারও বঙ্গোপসাগরের ট্রলার ডুبي উদ্ধার ১৩ জন মৎস্যজীবী নকিব উদ্দিন গাজী বঙ্গোপসাগর থেকে মাছ ধরে ফিরে আসার সময় কাকদ্বীপের একটি ট্রলার ডুবে যায়। গত কয়েক দিন আগে এফ বি সিদ্ধিবিনায়ক নামে একটি ট্রলার ১৩ জন মৎস্যজীবী নিয়ে সমুদ্রে রওনা দিয়েছিল। গতকাল রাতে ফিরে আসার সময় বকখালি থেকে প্রায় ৩০ কিলোমিটার দূরে সমুদ্রের প্রবল ঢেউয়ে ট্রলারটির তলা ফেটে গিয়ে ডুবে যায়। কাছাকাছি থাকা অন্য মৎস্যজীবী ট্রলার ডুবে যাওয়ার ট্রলারটি থেকে সমস্ত মৎস্যজীবীকে উদ্ধার করে। তবে এখনো পর্যন্ত দুর্ঘটনাগ্রস্ত ট্রলারটিকে উদ্ধার করা সম্ভব হয়নি। অন্যদিকে এই মুহূর্তে সমুদ্র উত্তাল প্রবল ঢেউয়ের কারণ most মৎস্যজীবী ট্রলার উপকূলে ফিরে আসতে শুরু করেছে।
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राजस्थान में 24x7 बाजार योजना पर विरोधाभास, छोटे व्यापारी मदद की मांग

Jaipur, Rajasthan:एंकर-राज्य सरकार ने 24 घंटे बाजार खोलने की महत्वाकांक्षी योजना पर अब बड़ा पेंच फंस गया है। श्रम विभाग के दो अलग-अलग आदेशों ने छोटे व्यापारियों की मुश्किल बढ़ा दी है। एक आदेश में 10 कर्मचारियों तक वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट दी गई है, जबकि नए नियम के तहत 24 घंटे संचालन की सुविधा केवल पंजीकृत संस्थानों को मिलेगी। ऐसे में 4 से 5 कर्मचारियों वाले हजारों छोटे रेस्टोरेंट और दुकानदार इस योजना का लाभ कैसे उठाएंगे, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। व्यापारिक संगठनों ने इसे लेकर सरकार से नियम स्पष्ट करने और अलग व्यवस्था बनाने की मांग की है। प्रदेश में जयपुर सहित 123 शहरों में 24 घंटे और सातों दिन बाजार खोलने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब श्रम विभाग के दो अलग-अलग आदेशों के कारण उलझती नजर आ रही है। एक ओर 19 जून की अधिसूचना के तहत केवल राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के तहत पंजीकृत दुकानों और संस्थानों को 24 घंटे संचालन की छूट दी गई है, वहीं दूसरी ओर 20 अगस्त 2025 के आदेश में 10 तक कर्मचारियों वाले दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को पंजीयन से छूट दी गई थी। ऐसे में जिन छोटे प्रतिष्ठानों में केवल 4 से 5 कर्मचारी कार्यरत हैं, वे न तो पंजीयन के दायरे में आते हैं और न ही 24 घंटे संचालन की सुविधा का लाभ उठा पा रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सरकार के दोनों आदेशों के बीच विरोधाभास के कारण छोटे व्यापारियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। यदि 24 घंटे संचालन का लाभ केवल पंजीकृत प्रतिष्ठानों को मिलेगा, तो जिन प्रतिष्ठानों को पहले पंजीयन से ही छूट दे दी गई थी, वे इस व्यवस्था से बाहर हो जाएंगे। व्यापारिक संगठनों ने श्रम विभाग को ज्ञापन देकर मांग की है कि छोटे दुकानदारों और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहां 4 से 8 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। यदि पंजीयन अनिवार्य नहीं है तो वे 24 घंटे बाजार योजना का लाभ कैसे लेंगे। इसलिए या तो ऐसे प्रतिष्ठानों का स्वैच्छिक पंजीकरण कराया जाए या फिर उन्हें भी अधिसूचना के दायरे में शामिल किया जाए। प्रदेश में जयपुर सहित 123 शहरों में 24 घंटे और सातों दिन बाजार खोलने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब श्रम विभाग के दो अलग-अलग आदेशों के कारण उलझती नजर आ रही है। एक ओर 19 जून की अधिसूचना के तहत केवल राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के तहत पंजीकृत दुकानों और संस्थानों को 24 घंटे संचालन की छूट दी गई है, वहीं दूसरी ओर 20 अगस्त 2025 के आदेश में 10 तक कर्मचारियों वाले दुकानों और वाण्यज… (अंकित अंशों को समाहित रखते हुए) वेगवती नोटिस के अनुसार 24 घंटे संचालन की योजना के लाभ को ध्यान में रखते हुए, व्यापारी समूहों ने सरकार से समन्वय स्थापित कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि बजट घोषणा का लाभ छोटे व्यापारियों तक भी पहुंच सके। बाइट-व्यापारी कर्मचारियों के हितों के लिए लागू होंगी सख्त शर्तें: प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन रोटेशन के आधार पर सवेतन अवकाश देना होगा। किसी कर्मचारी से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे और सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही कार्य लिया जा सकेगा। ओवरटाइम कराए जाने पर इसका रिकॉर्ड रखना होगा। अतिरिक्त कार्य का नियमानुसार भुगतान करना अनिवार्य होगा। सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना होगा। नियुक्ति पत्र की प्रति संबंधित श्रम निरीक्षक को भेजकर उसकी पावती सुरक्षित रखनी होगी। बहरहाल, प्रदेश में 24 घंटे बाजार खोलने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना व्यापार और पर्यटन के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है, लेकिन श्रम विभाग के दो अलग-अलग आदेशों ने छोटे व्यापारियों के सामने नई दुविधा खड़ी कर दी है। अब निगाहें सरकार पर हैं कि वह इस विरोधाभास को दूर कर छोटे प्रतिष्ठानों के लिए अलग व्यवस्था करती है या नहीं। जब तक स्पष्ट निर्देश जारी नहीं होते, तब तक हजारों छोटे दुकानदार और रेस्टोरेंट संचालक इस योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
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नंबर प्लेट छिपाने पर अब सीधी सीज, ITMS कैमरे लगेंगे कड़ी नजर

Mathura, Uttar Pradesh:सावधान! नंबर प्लेट छिपाई तो सीधे होगी गाड़ी सीज, हाई-टेक कैमरों से पुलिस की पैनी नजर मथुरा।अगर आप ट्रैफिक नियमों से बचने के लिए अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाते हैं, उस पर टेप लगाते हैं, रंग पोतते हैं या किसी भी तरह की छेड़छाड़ करते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। अब सिर्फ चालान ही नहीं, बल्कि वाहन को मौके पर ही सीज भी किया जा सकता है। सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले कई चालक कैमरों से बचने के लिए नंबर प्लेट को जानबूझकर ढक देते हैं या उसके साथ छेड़छाड़ करते हैं। लेकिन अब ऐसी चालाकी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। पुलिस प्रशासन ने ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगे इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS के हाई-टेक कैमरे हर वाहन पर लगातार नजर रख रहे हैं। जिन वाहनों की नंबर प्लेट संदिग्ध दिखाई देती है या जिनमें किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है, उन्हें तुरंत चिन्हित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें सड़कों पर लगातार अभियान चलाकर वाहनों की लाइव चेकिंग भी कर रही हैं। जांच के दौरान यदि किसी वाहन की नंबर प्लेट छिपी हुई, मिटाई गई या नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो संबंधित वाहन चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का साफ संदेश है कि ट्रैफिक नियमों से बचने के लिए नंबर प्लेट के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में केवल चालान ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर वाहन को सीज भी किया जा सकता है। इसलिए यदि आप सड़क पर वाहन चला रहे हैं, तो ट्रैफिक नियमों का पालन करें और अपनी नंबर प्लेट को निर्धारित मानकों के अनुसार साफ और स्पष्ट रखें। थोड़ी-सी लापरवाही या चालाकी आपको भारी पड़ सकती है।
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आजाद समाज पार्टी का मेरठ प्रदर्शन: लाठीचार्ज और सीबीआई जांच की मांग

Chanwal, Himachal Pradesh:हमीरपुर:-मेरठ की घटना को लेकर आजाद समाज पार्टी का प्रदर्शन, नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौपा, मेरठ में कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने पर विरोध जताया, ललिता गौतम हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग, मेरठ के एसएसपी की बर्खास्तगी की भी की मांग, प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की गई, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी, जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर का मामला।
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राम मंदिर चढ़ावे घोटाले पर निष्पक्ष जांच की मांग, कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Kullu, Himachal Pradesh:अयोध्या में भगवान श्री राम के मंदिर में चढ़ावा में हुए घोटाले को लेकर कांग्रेस ने अब केंद्र सरकार से मांग रखी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। वरना कांग्रेस के द्वारा आगामी दिनों में इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर जिला प्रमुख मुख्यालय ढालपुर में भी जिला कुल्लू कांग्रेस कमेटी के द्वारा एक रोष रैली निकाली गई। तो वहीं केंद्र सरकार के बड़े नेताओं को भी घोटाले में संलिप्त बताया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा ढालपुर से होते हुए यह रैली हनुमान मंदिर तक निकाली गई। जहां पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के द्वारा चंदा घोटाले के विरोध में भजन कीर्तन भी किया गया। इस दौरान जिला कुल्लू कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सेस राम आजाद ने कहा कि आखिर क्या मजबूरी है कि केंद्र सरकार इस घोटाले के विरोध में कोई भी बड़ी जांच नहीं करवा पा रही है। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों पर श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। ऐसे में जब देश भर में यह मुद्दा गूंज रहा है और आम जनता भी इस घोटाले के निष्पक्ष जांच चाहती है। तो आखिर केंद्र सरकार की क्या मजबूरी है। क्या उनके बड़े नेता भी इस घोटाले में शामिल है और उन्हें बचाने के चक्कर में केंद्र सरकार कोई भी जांच शुरू नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे से जुड़े मामले गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिला अध्यक्ष सेस राम ने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान की सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी।
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21 जुलाई को जंतर-मंतर: महिला आरक्षण तुरंत लागू कराने की मांग तेज

Ranchi, Jharkhand:महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। इसी कड़ी में आगामी 21 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘चलो संसद’ अभियान आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में झारखंड के सभी जिलों से महिला कांग्रेस की वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगी。 अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव सुधा प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि महिला आरक्षण विधेयक वर्ष 2010 में राज्यसभा से पारित हुआ था, जबकि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने इसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पारित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसके क्रियान्वयन में देरी की जा रही है और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने को लेकर केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है。 महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर महिला कांग्रेस की ओर से मिस्ड कॉल अभियान, पोस्टकार्ड अभियान और हस्ताक्षर अभियान चलाए जा रहे हैं। अभियान के तहत ‘नारी बंधन बिल आज करो, अभी करो’ का नारा दिया जा रहा है। सुधा प्रसाद ने कहा कि 21 जुलाई को देशभर से महिला कांग्रेस की पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगी और महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग को मजबूती से उठाएंगी। इस दौरान कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर परिसीमन और एसआईआर के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। पार्टी ने संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही。
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धनबाद में सदाचार समिति ने अनुकंपा नियुक्ति व पेंशन मामलों की समीक्षा की

Dhanbad, Jharkhand:झारखंड विधानसभा की सदाचार समिति धनबाद पहुंची। सर्किट हॉउस में समिति लंबित अनुकंपा नियुक्ति पेंशन मामलों एवं अन्य महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की। समिति के सभापति कांग्रेस विधायक रामचंद्र सिंह हैं। सभापति के साथ समिति सदस्य सह सिंदरी विधायक चन्द्रदेव महतो भी बैठक में मौजूद रहे। सभापति रामचंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अनुकंपा पर नियुक्ति के लिए अधिकारियों को पात्र आश्रितों के आवेदनों की नियमानुसार जांच कर समयबद्ध निष्पादन के निर्देश दिए गए हैं ताकि दिवंगत कर्मियों के परिवारों को जल्द लाभ मिल सके। बैठक में विभागवार लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित मामलों के निष्पादन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सभापति ने कहा कि लंबित अनुकंपा नियुक्ति पेंशन मामलों में जो जिला स्तर पर निष्पादित नहीं हो सकेंगे उसे रांची में विभागवार अधिकारियों के साथ बैठक करके निष्पादित कराये जायेंगे. सदाचार समिति की बैठक में बलियापुर वेटरनरी डॉक्टर का मामला भी आया। पंचायत समिति सदस्य के खिलाफ की गई शिकायत और डॉक्टर पर पैसे मांगने के आरोपों को लेकर समिति ने गंभीर रुख अपनाया। समिति ने संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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टेकापार ब्लास्ट: अनुमति किसने दी? प्रशासन ने इनकार किया

Khairgarh, Uttar Pradesh:खैरागढ़ के टेकापार गांव में रात के अंधेरे में हुई कथित ब्लास्टिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी का दावा है कि उसने प्रशासन से अनुमति ली थी, लेकिन एसडीएम साफ कह रहे हैं कि कोई अनुमति नहीं दी गई। पंचायत भी अनजान है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल आखिर रात में ब्लास्टिंग की इजाजत किसने दी? मामला खैरागढ़ जिले के ग्राम पंचायत कलकसा के आश्रित गांव टेकापार का है। यहां अडानी कंपनी बिजली ट्रांसमिशन टॉवर का निर्माण करा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि 11 जुलाई की शाम करीब 7 से 8 बजे के बीच किसानों के खेत में दो बार जोरदार ब्लास्टिंग की गई। धमाके इतने तेज थे कि घरों में कंपन महसूस हुआ और लोग डरकर बाहर निकल आए। ग्रामीणों का कहना है कि न उन्हें पहले कोई सूचना दी गई और न ही सुरक्षा के इंतजाम किए गए। दूसरी ओर कंपनी के मैनेजर अविनाश कुमार का कहना है कि ब्लास्टिंग प्रशासन को सूचना देकर और अनुमति लेकर की गई। लेकिन जब इस बारे में एसडीएम टांकेश्वर प्रसाद साहू से सवाल किया गया तो उन्होंने किसी भी तरह की अनुमति देने से इनकार कर दिया। वहीं ग्राम पंचायत की सरपंच प्रीति देवी राजपूत ने भी साफ कहा कि पंचायत से कोई अनुमति नहीं ली गई और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। दिलचस्प बात यह है कि एसडीएम ने मामले को खनन विभाग का बताते हुए जांच की जिम्मेदारी संबंधित विभाग पर डाल दी। वहीं खनिज विभाग के अधिकारी बबलू पांडे का कहना है कि जहां ब्लास्टिंग हुई वह राजस्व भूमि है। दोनों विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते नजर आए और कैमरे के सामने स्पष्ट जवाब देने से बचते रहे। कंपनी कह रही है कि अनुमति थी... प्रशासन कह रहा है अनुमति नहीं थी... पंचायत भी अनजान है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रात के समय ब्लास्टिंग की इजाजत किसने दी? और अगर अनुमति नहीं थी, तो घटना के दो दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।
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