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शिक्षण मंत्री दादा भुसे ने भिवंडी स्कूलों का निरीक्षण किया; अस्पताल दरों की सूची का स्वागत

Thane, Maharashtra:भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिका हद्दीतील शाळा क्रमांक २२ आणि शाळा क्रमांक ६२/२२ मध्ये विशेष कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले होते. या कार्यक्रमासाठी राज्याचे शालेय शिक्षणमंत्री दादा भुसे यांनी भेट दिली. महाराष्ट्र शासनाच्या 'चला शाळेत जाऊया' अभियानांतर्गत या कार्यक्रमासाठी शाळेच्या वर्गांची पाहणी करत विद्यार्थ्यांशी संवाद साधला. सरकारी शाळांमधील शिक्षणाचा दर्जा उंचावणे आणि विद्यार्थ्यांना शाळेकडे आकर्षित करणे हा या अभियानाचा मुख्य उद्देश असल्याचे यावेळी सांगण्यात आले. शाळेच्या पाहणीनंतर बाहेर पडताना माध्यमांशी बोलताना दादा भुसे यांनी केंद्र सरकारच्या एका महत्त्वपूर्ण निर्णयाचे स्वागत केले. दादा भुसे म्हणाले, केंद्र सरकारने सर्व हॉस्पिटल आणि क्लिनिकमध्ये उपचाराच्या दराची सूची दर्शनी भागात लावणे अनिवार्य केले आहे. किती रुपयात उपचार होतो हे सामान्य जनतेला कळावे, यासाठी घेतलेल्या या निर्णयाचे आपण सगळ्यांनी स्वागत केले पाहिजे. यावेळी त्यांच्यासोबत महानगरपालिकेचे अधिकारी, लोकप्रतिनिधी, पोलीस प्रशासन आणि मोठ्या संख्येने शिक्षक उपस्थित होते. पाहणीनंतर शिक्षणमंत्री पुढील कार्यक्रमासाठी रवाना झाले.
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शामली: अंतरराज्यीय चोर गैंग गिरफ्तार, 13 मोटरसाइकिलें बरामद

Shamli, Uttar Pradesh:शामली स्लग...बाइक चोरो का गैंग पुलिस ने झिंझाना थाना क्षेत्र के चेकिंग के दौरान अंतर राज्य गिरोह के तीन चोरों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों के पास 13 मोटरसाइकिल बरामद हुईं, जो यूपी, हरियाणा और दिल्ली में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे और आसपास के क्षेत्र में 5000 में मोटरसाइकिल बेच देते थे। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला झिंझाना थाना क्षेत्र से है। चेकिंग के दौरान सटीक सूचना मिलने पर अंतर राज्य के शातिर तीन चोर गिरफ्तार किए गए। पकड़े गए चोरों के पास से 13 मोटरसाइकिल बरामद की गईं, जो यूपी-हरियाणा-दिल्ली आदि राज्यों में चोरी कर इकट्ठी की गई थीं और 5000 में बेच दी जाती थीं। पुलिस ने आरोपी इंतजार पुत्र मुंतयाज, रामसेवक उप बबलू पुत्र ज्ञाना, इरफान पुत्र महिंद्रा आदि को गिरफ्तार किया। चोरी की मोटरसाइकिलें पुराने ईंट के भट्टे पर छिपाकर रखी गई थीं, जिसे निशानदेही पर बरामद किया गया। एसपी शामली ने बताया कि ये शातिर चोर कई राज्यों में चोरी कर लोगों को मोटरसाइकिल बेचते थे और फर्जी कागज बनाकर 5000 में बेच देते थे। आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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मोना की मांग: यूपी में मनरेगा घोटाले की निष्पक्ष जाँच और क्लोन एप रोकथाम

Noida, Uttar Pradesh:उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती आराधना मिश्रा‘मोना’ ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि आद देश अजीब दौर से गुजर रहा है। उन्होने कहा कि पहले भगवान श्री राम के मंदिर के नाम पर चंदा चोरी, फिर चढ़ावा चोरी, वोट चोरी और अब गरीब मजदूरों की मजदूरी चोरी का गंभीर मामला आया है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होने कहा कि गांव के गरीब को दो वक्त की रोटी के लिए यूपीए सरकार मनरेगा योजना आयी और उसका मुख्य कारण यह था कि जो गांव के मजदूर हैं वह बाहर पलायन के बजाय अपने गांव में रहकर काम करें और गांव का विकास हो। यूपीए यह योजना ही नहीं लायी बल्कि कानून बनाया और सरकार की जवाबदेही भी तय की ताकि गांव के गरीब को दो वक्त की रोटी आसानी से मिल सके। भाजपा ने इस योजना की रिपैकेजिंग कर नाम तो बदल दिया किन्तु इनकी नियत ठीक नहीं है। अब इन गरीबों की योजना मंे भी व्यापक पैमाने पर घोटाले सामने आ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश की आध्यात्मिक राजधानी उत्तर प्रदेश, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी का घर भी है, भाजपा ने उसे लूट का केंद्र बना दिया है। पहले नागरिकों के वोट चुराए, फिर प्रभु श्री राम का चंदा और चढ़ावा चुराया, अब शर्मनाक तथ्य उजागर हुए हैं कि राम जी के नाम की मजदूरों की योजना में भी चोरी की जा रही है और उसका केंद्र भी पावन भूमि अयोध्या को बनाया गया है। अभी तो उत्तर प्रदेश के केवल नौ जिलों के कुछ स्थानों पर ही गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। यदि पूरे प्रदेश में समग्रता से जाँच कराई जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये का निकल सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वी.बी.-जी राम जी योजना, जो मनरेगा के स्थान पर लाई गई है, की डिजिटल हाजिरी में गंभीर हेरफेर और कथित क्लोन ऐप के जरिए फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के आरोप सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में ही डिजिटल हाजिरी में हेरफेर की समस्या स्वीकार करते हुए राज्यों को आगाह किया था। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले सामने आना भाजपा सरकार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में गड़बड़ियों का विवरण 1. अयोध्याः बारिश के दौरान 1,124 मजदूरों की हाजिरी 25 से 27 सितंबर 2026 के बीच अयोध्या के 11 ब्लॉकों में 1,124 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज हुई। संबंधित मजदूरी लगभग ₹3.37 लाख बताई गई। आरोप है कि भारी बारिश के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई, जबकि वास्तविक कार्य और मजदूरों की मौजूदगी का सत्यापन आवश्यक है। दिनवार हाजिरी 25 सितंबर को 297, 26 सितंबर को 28 और 27 सितंबर को 799 मजदूरों की थी। मवई, रुदौली और अमानीगंज में भी बड़ी संख्या में फर्जी उपस्थिति दर्ज होने का विवरण सामने आया。 2. संभलः 5,587 मजदूरों की हाजिरी और ₹16 लाख के कथित फर्जीवाड़े का मामला 25 से 27 सितंबर के बीच संभल के सभी आठ ब्लॉकों में 381 कार्यों के 1,049 मस्टर रोल में 5,587 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई। इस मामले में लगभग ₹16 लाख के कथित फर्जीवाड़े का आरोप है। दिनवार उपस्थिति 25 सितंबर को 3,209, 26 सितंबर को 756 और 27 सितंबर को 1,622 मजदूरों की रही। भारी बारिश और जलभराव के बीच दर्ज इस हाजिरी पर सवाल है कि क्या सभी मजदूर वास्तव में कार्यस्थलों पर मौजूद थे और रिकॉर्ड में दिखाए गए काम हुए थे। 3. रामपुरः पाँच ब्लॉकों में 1,008 मजदूरों की संदिग्ध हाजिरी 26 सितंबर को स्वार, मिलक, शाहाबाद, सैदनगर और बिलासपुर ब्लॉकों में 1,008 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। संबंधित भुगतान लगभग ₹3.24 लाख बताया गया। आरोप है कि भारी बारिश के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। सवाल है कि क्या दर्ज हाजिरी वास्तविक काम और मजदूरों की मौजूदगी पर आधारित थी। 4. हरदोईः 13 ग्राम पंचायतों में 894 मजदूरों की हाजिरी 26 और 27 सितंबर को शाहाबाद विकासखंड की 13 ग्राम पंचायतों में 26 कार्यों के लिए 101 मस्टर रोल जारी हुए और 894 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। आरोप है कि बारिश और जलभराव के दौरान मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। ऐसे में यह जाँचना जरूरी है कि कितने कार्य वास्तव में हुए और क्या दर्ज उपस्थिति वास्तविक मजदूरों से मेल खाती थी। 5. गाजीपुरः बारिश के दौरान हजारों मजदूरों की हाजिरी गाजीपुर में बारिश, जलभराव और गांधी जयंती के दौरान दर्ज हाजिरी पर गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर को 532 कार्यों के 2,480 मस्टर रोल पर 21,773 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई। 27 सितंबर को 557 कार्यों के 2,540 मस्टर रोल पर 22,196 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। 2 अक्टूबर को भी 322 कार्यों के 1,428 मस्टर रोल पर 12,606 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने की रिपोर्ट है। आरोप है कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में हाजिरी दर्ज हुई और पुरानी तस्वीरों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है। सवाल है कि क्या इन सभी कार्यस्थलों पर वास्तविक काम हुआ था。 6. देवरियाः तीन दिनों में 13,754 मजदूरों की उपस्थिति 25 से 27 सितंबर के बीच देवरिया में सड़क निर्माण, पौधरोपण और अन्य कार्यों के लिए 13,754 मजदूरों की हाजिरी दर्ज हुई। दिनवार संख्या 6,367, 2,564 और 4,823 बताई गई। आरोपों और रिपोर्टों में जिले में दर्ज वर्षा तथा वास्तविक कार्यस्थलों की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए। मुख्य सवाल यह है कि क्या प्रत्येक स्थान पर दर्ज कार्य और उपस्थिति का स्वतंत्र सत्यापन हुआ तथा क्या रिकॉर्ड में दर्ज काम वास्तव में किया गया था। 7. महराजगंजः काम नहीं होने के बावजूद 906 मजदूरों की हाजिरी का आरोप महराजगंज के निचलौल ब्लॉक में चार कार्यस्थलों की जाँच से जुड़े विवरण में आरोप लगाया गया कि काम नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में 906 मजदूरों की हाजिरी दर्ज थी। संबंधित राशि लगभग ₹2.71 लाख बताई गई। बड़हरा चरगहा, हरपुर पकड़ी और पैकोली कला में भी कथित अनियमितताओं का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर चकमार्गों के किनारे गन्ने और धान की फसल तथा खेतों में पानी होने के बावजूद कार्य की हाजिरी दर्ज की गई। ग्रामीणों ने पहले से पूरे हो चुके कार्यों पर दोबारा हाजिरी लगाने और मजदूरों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए ले जाने के आरोप भी लगाए। 8. चंदौली, गाजियाबाद और बहराइचः क्लोन ऐप से फर्जी हाजिरी दर्ज करने का आरोप इन तीन जिलों में सरकारी एन.एम.एम.एस. ऐप से मिलता-जुलता कथित क्लोन ऐप इस्तेमाल करने का मामला सामने आया। आरोप है कि मोबाइल में पहले से सुरक्षित तस्वीरों के आधार पर मजदूरों की सामूहिक हाजिरी दर्ज करने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के अनुसार, क्लोन ऐप को सक्रिय करने के लिए ए.पी.के. फाइल और एक्सेस-की का इस्तेमाल किए जाने तथा रोजगार सेवकों की विभागीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग का दावा किया गया। 100 मजदूरों की हाजिरी के लिए ₹1,000 और 200 से अधिक मजदूरों के लिए ₹5,000 तक वसूले जाने की सूचना है। ए.पी.के. फाइल और एक्सेस-की के लिए ₹15,000 से ₹20,000 तक लेने का भी आरोप है। यह मामला डिजिटल निगरानी व्यवस्था को दरकिनार कर बिना वास्तविक उपस्थिति के हाजिरी दर्ज करने के प्रयास का है। इन जिलों में कितनी हाजिरी दर्ज हुई और कितना भुगतान हुआ, इसका पूरा जिलावार विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। 9. जालौनः अलग-अलग कार्यस्थलों पर एक जैसी तस्वीरें अपलोड करने का आरोप उरई के कुठौंद ब्लॉक की बघावली मुस्तकिल और ऊमरी मुस्तकिल ग्राम पंचायतों में अलग-अलग कार्यों के लिए छडडै पोर्टल पर एक जैसी तस्वीरें अपलोड होने के आरोप सामने आए। आरोप यह भी है कि बघावली मुस्तकिल के कार्य में खेड़ा मुस्तकिल के श्रमिकों के नाम पर हाजिरी दर्ज की गई। यदि एक ही तस्वीर अलग-अलग कार्यस्थलों की उपस्थिति दिखाने के लिए इस्तेमाल हुई है, तो यह डिजिटल हाजिरी की विश्वसनीयता और वास्तविक मजदूरी भुगतान पर गंभीर सवाल खड़े करता है。 केंद्र ने जुलाई 2025 में ही चेतावनी दी थी- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 8 जुलाई 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र जारी करके छडडै ऐप के दुरुपयोग और डिजिटल हाजिरी में हेरफेर पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे。 मंत्रालय ने सात प्रमुख विसंगतियाँ चिन्हित की थीं- - असंबंधित तस्वीरें अपलोड करना। - लाइव फोटो के बजाय पहले से मौजूद तस्वीरों की फोटो अपलोड करना। - वास्तविक और रिकॉर्ड में दर्ज मजदूरों की संख्या में अंतर। - पुरुष और महिला मजदूरों की वास्तविक तथा दर्ज संख्या में अंतर। - एक ही मजदूर की तस्वीर का कई मस्टर रोल में इस्तेमाल। - सुबह और दोपहर की तस्वीरों में मजदूरों की संख्या या संरचना में अंतर। - दोपहर की तस्वीरें अपलोड नहीं करना। केंद्र ने ग्राम पंचायत स्तर पर उसी दिन 100 प्रतिशत सत्यापन, ब्लॉक और जिला स्तर पर अगले दिन तथा राज्य स्तर पर दो दिन के भीतर नमूना सत्यापन के निर्देश दिए थे। विस्तृत डिजिटल सत्यापन प्रणाली तैयार होने तक मैन्युअल जाँच और दैनिक रिपोर्टिंग भी अनिवार्य की गई थी। मंत्रालय ने संदिग्ध मामलों की जाँच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, कार्रवाई रिपोर्ट (ए.टी.आर.) भेजने तथा राज्य, जिला औरब्लॉक स्तर पर समर्पित एन.एम.एम.एस. निगरानी प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश भी दिए थे। 12 राज्यों में अनियमितताएँ, आधे से अधिक ने जवाब नहीं दिया वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय टीमों ने 23 राज्यों में ग्रामीण रोजगार योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष दौरे किए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 48 केंद्रीय टीमों ने 21 जिलों का निरीक्षण किया। जुलाई 2025 की प्रदर्शन समीक्षा समिति की बैठक में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 12 राज्यों के साथ वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत कमियों के निष्कर्ष साझा किए। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, केरल ,बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल थे。 रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों में आधे से अधिक ने उस समय केंद्र को जवाब या कार्रवाई रिपोर्ट नहीं भेजी थी। श्रीमष्री आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सवाल उठाया कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र की चेतावनी और निरीक्षण निष्कर्षों पर जवाब नहीं दिया था? क्या राज्य ने निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई रिपोर्ट भेजी? कितने संदिग्ध मस्टर रोल की जाँच हुई और कितने मामलों में गड़बड़ी सामने आई? सरकार इन सवालों का स्पष्ट जवाब दे। कांग्रेस की माँगः 1. अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महराजगंज, चंदौली, गाजियाबाद, बहराइच और जालौन में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जाँच हो। 2. कथित क्लोन ऐप, ए.पी.के. फाइल, एक्सेस-की और लॉगिन आईडी के इस्तेमाल की जाँच कराई जाए। 3. बारिश के दौरान दर्ज हाजिरी का वास्तविक कार्यस्थलों, तस्वीरों, मस्टर रोल और मजदूरी भुगतान से मिलान किया जाए। 4. केंद्र के 8 जुलाई 2025 के निर्देशों के अनुपालन, सत्यापन और कार्रवाई रिपोर्ट का विवरण सार्वजनिक किया जाए। 5. उत्तर प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि उसने केंद्र को जवाब और ए.टी.आर. भेजी या नहीं। 6. पूरे प्रदेश में व्यापक जाँच कराई जाए और जहाँ फर्जी हाजिरी तथा गलत भुगतान प्रमाणित हों, वहाँ नियमानुसार धन की वसूली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती आराधना मिश्रा‘मोना’ ने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना का उद्देश्य मजदूरों को रोजगार और आजीविका सुरक्षा देना है, न कि फर्जी हाजिरी के जरिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का रास्ता खोलना। जब केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 में ही डिजिटल हाजिरी में हेरफेर की समस्या स्वीकार कर ली थी, तो उत्तर प्रदेश में ऐसे गंभीर आरोप सामने आना सरकार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अभी तो कुछ जिलों के कुछ स्थानों से ही मामले सामने आए हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक और निष्पक्ष जाँच होने पर ही अनियमितताओं का वास्तविक पैमाना सामने आएगा। भाजपा सरकार को ग्रामीण मजदूरों के हक और जनता के पैसे के संबंध में जवाब देना होगा。 प्रेसवार्ता में मुख्य रूप से श्री शिव पाण्डेय, श्री कुंवर सिंह निषाद, श्रीमती प्रियंका गुप्ता, श्री सचिन रावत, श्रीमती सिद्धिश्री, डा0 अलीमुल्ला खान, श्री मान सिंह चैहान आदि मौजूद रहे।
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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट मार्च के दौरान प्रदर्शन पर दबाव नहीं बनने बात दोहराई

Noida, Uttar Pradesh:न्यायपालिका पर कोई दबाव नहीं बना सकता', राहुल गांधी के कोर्ट मार्च पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 12 अक्टूबर को हुए कोर्ट मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें सब कुछ पता है कि कोर्ट के अंदर और बाहर क्या हो रहा है। हम जमीनी हकीकत से अनजान नहीं हैं। कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता। कोर्ट ने राहुल गांधी के मार्च के दौरान हुई नारेबाजी और हंगामे के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वकीलों की ओर से दायर याचिका दरअसल, चार वकीलों की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट परिसर के अंदर राजनीतिक प्रदर्शन करने पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट केAround जुलूस और प्रदर्शनों पर रोक लगनी चाहिए। उस दिन सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वैसा नहीं होना चाहिए था। करीब 200 वकीलों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर चिंता जताई है कि इस तरह के व्यवहार से न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश होती है। 'हमे सब पता है, कोर्ट पर दबाव नहीं बनाया जा सकता' इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता। ऐसी कोशिशें पहले भी होती रही हैं, लेकिन कभी कामयाब नहीं हो पाई हैं। हमें पता है कि लोग बाहर क्या बयान दे रहे हैं और कोर्ट में क्या कह रहे हैं। हम बंद कमरों में बैठकर काम नहीं करते। कोर्ट को सभी बातों की जानकारी है। अवमानना नोटिस जारी नहीं किया वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट से आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने की मांग की। हालांकि, कोर्ट ने अभी अवमानना की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी नहीं किया है। कोर्ट ने केवल याचिका में की गई अन्य मांगों पर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर भी नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। इन नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, टीएमसी नेता सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, सीपीआई (मार्क्सवादी) के एम. ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर, विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची के थोल. थिरुमावलवन और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू शामिल हैं।इन याचिकाओं में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों को चुनौती दी गई है। दिलचस्प बात यह रही कि कोर्ट ने बिना किसी का नाम लिए एक याचिकाकर्ता के रवैये पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन एक याचिकाकर्ता के रवैये पर आपत्ति है। हम उनसे सवाल करेंगे। कुल 46 याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, पत्रकारों और वकीलों के खिलाफ कार्रवाई, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं तथा इंटरनेट बाधित होने और चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया से जुड़ी कुल 46 याचिकाओं पर सुनवाई की। जंतर मंतर को लेकर दायर याचिका पर भी नोटिस कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित दर्जा समाप्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सरकार से इस फैसले की वजह स्पष्ट करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारी विवेक भगत पर छेड़छाड़ के आरोप लगाने वाली और SC/ST अधिनियम के तहत दर्ज मामले का सामना कर रही महिला पत्रकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। सरकार और पुलिस से भी जवाब तलब किया कोर्ट ने वकीलों, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई तथा अवैध हिरासत के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पुलिस और अन्य एजेंसियों को प्रदर्शन स्थल से जुड़े CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा महिला पत्रकारों पर हमले के आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक समिति का गठन कर सकता है। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह से शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों के नाम और विशेष जांच दल (SIT) में शामिल किए जाने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा पुलिस अधिकारियों के नाम सुझाने को कहा है।
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रामलीला के नाम पर अश्लील डांस: मऊ में पुलिसकर्मियों की निंदाजनक भूमिका

Noida, Uttar Pradesh:मऊ में रामलीला के नाम पर अश्लील डांस, वर्दी में बैठकर तालियां बजाते दिखे पुलिसकर्मी मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के थाना रानीपुर क्षेत्र के अंतर्गत खुरहट बाजार में आयोजित रामलीला में धार्मिक कार्यक्रम की आड़ में कथित तौर पर अश्लील और अभद्र नृत्य कराए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना का सबसे गंभीर और आपत्तिजनक पहलू वहां मौजूद पुलिसकर्मियों का रवैया है। प्राप्त जानकारी और वायरल हो रहे दृश्यों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में कुर्सियों पर बैठकर इस फूहड़ कार्यक्रम का लुत्फ उठाते और तालियां बजाते नजर आए। सुरक्षा और मर्यादा कायम रखने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर थी, उनकी इस भूमिका ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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गाजियाबादडीए की अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बुलडोजर अभियान जारी

Ghaziabad, Uttar Pradesh:अवैध कॉलोनियों के खिलाफ गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कार्रवाई लगातार जारी है। प्राधिकरण की टीम ने एक बार फिर बुलडोजर चलाकर अवैध कॉलोनी के निर्माण को ध्वस्त कर दिया। जोन-3 के अंतर्गत कल्लू गढ़ी-डासना क्षेत्र में करीब 30 बीघा जमीन पर विकसित की जा रही कॉलोनी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। संबंधित जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने का काम किया जा रहा था। मामले में जीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त कराया। कार्रवाई के दौरान कॉलोनी विकसित करने के लिए किए जा रहे निर्माण को हटाया गया। जीडीए की इस कार्रवाई से अवैध रूप से कॉलोनी विकसित करने वालों में हड़कंप मच गया। प्राधिकरण की ओर से अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाकर ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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एटा में 15 अक्टूबर से मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट अनिवार्य

Etah, Uttar Pradesh:एटा में आज से मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा नियम लागू, 15 अक्टूबर से मिठाइयों पर इस्तेमाल की अंतिम तारीख लिखना होगा अनिवार्य, ग्राहकों की सेहत और खाद्य सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था, एटा के सुदीप मिष्ठान भंडार,सुभाष मिष्ठान भंडार,गंगा स्वीट्स सहित अन्य दुकानों में मिठाई खरीदते समय ग्राहकों को मिली एक्सपायरी डेट की जानकारी, मिठाई विक्रेताओं को स्पष्ट रूप से दर्शानी होगी इस्तेमाल की अंतिम तारीख, जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर होगी कार्रवाई, नियमों की अनदेखी करने वाले दुकानदारों पर कसेगा शिकंजा, खराब गुणवत्ता वाली मिठाइयों की बिक्री रोकने के लिए सख्ती.
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रामपुर की रामलीला मंच पर अश्लील नृत्य: 50 से अधिक गिरफ्तार नहीं तो कार्रवाई जारी

Rampur, Uttar Pradesh:रामपुर में रामलीला के नाम पर रासलीला और अश्लील डांस कराने के आरोप, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, धर्मिक आयोजनों की मर्यादा पर उठे सवाल, खजुरिया क्षेत्र में आयोजकों समेत 50 से अधिक लोगों पर पुलिस ने की कार्रवाई, रामलीला संचालकों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी, अश्लील कार्यक्रम कराने वालों पर आगे भी कार्रवाई करेगी रामपुर पुलिस, रामलीला के मंच पर मर्यादा तार-तार करने के आरोप, धार्मिक आयोजन के नाम पर रासलीला और अश्लील डांस कराने की शिकायतें, और फिर सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया, मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले का है, जहां पुलिस ने अश्लीलता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए 50 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, रामपुर के थाना खजुरिया क्षेत्र में अलग-लग स्थानों पर आयोजित रामलीलाओं के दौरान कथित तौर पर अश्लील नृत्य कराए जाने के आरोप सामने आए, कार्यक्रमों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और आयोजनों से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी, आरोप है कि जिन आयोजनों का उद्देश्य भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना था, वहां कुछ कार्यक्रमों में अश्लील डांस कराए गए, वीडियो सामने आने के बाद इन आयोजनों की मर्यादा को लेकर सवाल उठने लगे, मामला पुलिस तक पहुंचा तो थाना खजुरिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आयोजन संचालकों समेत 50 से अधिक लोगों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 135 के तहत कार्रवाई की, पुलिस ने सिर्फ कार्रवाई तक ही कदम सीमित नहीं रखा, बल्कि क्षेत्र में रामलीला का आयोजन कराने वाले संचालकों को नोटिस भी जारी किए हैं, आयोजकों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा और मर्यादा का ध्यान रखा जाए, किसी भी कार्यक्रम में अश्लील नृत्य या आपत्तिजनक प्रस्तुति की अनुमति नहीं दी जाएगी, नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह के मुताबिक, थाना खजुरिया क्षेत्र में रामलीला आयोजनों के दौरान अश्लीलता से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 50 से अधिक लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की है, साथ ही आयोजन संचालकों को नोटिस देकर भविष्य में इस तरह के कार्यक्रमों से बचने और धार्मिक आयोजनों की मर्यादा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, रामलीला आस्था, संस्कृति और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ा आयोजन है, ऐसे में धार्मिक मंचों पर कथित अश्लीलता के आरोपों ने आयोजन की गरिमा को लेकर बहस छेड़ दी है, फिलहाल रामपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आयोजकों को सख्त संदेश दिया है कि धार्मिक आयोजनों की आड़ में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, अब देखना होगा कि पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ऐसे आयोजनों में मर्यादा बनाए रखने के निर्देशों का कितना पालन होता है, Byte: अनुराग सिंह, (अपर पुलिस अधीक्षक, रामपुर) विसुअल: वायरल वीडियो विसुअल: थाना खजुरिया
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मेरठ में 'खाकी' के नाम पर डकैती: एनकाउंटर का खौफ दिखाकर 50 लाख की रंगदारी, 5 फर्जी अफसर दबोचे

MANISH PARASHARMANISH PARASHARFollow5m ago
Meerut, Uttar Pradesh:

मेरठ में फर्जीवाड़े और बेखौफ बदमाशों का एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने आया है, जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। टीपी नगर में फर्जी पुलिस चौकी का तांडव अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के झब्बालपुर गांव में 'एंटी करप्शन' का फर्जी चोला ओढ़े पांच हिस्ट्रीशीटर बदमाशों का नापाक खेल बेनकाब हो गया। सादे कपड़ों में घूम रहे ये शातिर अपराधी अपनी उसी लग्जरी बोलेरो गाड़ी से वारदातों को अंजाम देते थे, जिस पर बाकायदा 'एंटी करप्शन' का रौबदार बोर्ड लिखा हुआ था। हाथ में फर्जी वॉकी-टॉकी और महंगे फोन लेकर घूम रहे इन आरोपियों पर पहले से ही कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं! ​इस शातिर गिरोह ने एक बेकसूर युवक को उसके घर के पास से अगवा किया और फिर उसके चाचा को फोन घुमाकर धमकी दी—"पचास लाख रुपये तैयार रखो, वरना फर्जी एनकाउंटर में लाश बिछा देंगे!" लेकिन मेरठ पुलिस की चाक-चौबंद घेराबंदी के आगे इन पुराने अपराधियों का यह खूनी खेल धरा का धरा रह गया। पुलिस ने मेरठ के ही रहने वाले पांचों हिस्ट्रीशीटर आरोपियों—मोनू, आशीष, मुरसलीन, इकबाल और फिरोज को दबोचकर सलाखों के पीछे भेज दिया है। मौके से वही लग्जरी बोलेरो गाड़ी जिस पर 'एंटी करप्शन' लिखा था, वॉकी-टॉकी और पांच महंगे फोन बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन झब्बालपुर की इस वारदात ने यह साबित कर दिया है कि कैसे शातिर अपराधी फर्जी संस्थाओं की आड़ में सरेआम किडनैपिंग और मौत का खौफ बेच रहे थे। 

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इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस: हाई कोर्ट के वकील बोले—यह जरूरी नहीं था

Noida, Uttar Pradesh:MUMBAI (MAHARASHTRA): MAJEED MEMON (FORMER RAJYA SABHA MP AND SENIOR LAWYER) ON LEAVE INDIA NOTICE ISSUED TO ACTOR IMRAN KHAN FOLLOWING CJP PROTEST AT AUGUST KRANTI MAIDAN / SUPREME COURT NOTICE TO RAHUL GANDHI / SUPREME COURT NOTICE TO DELHI GOVERNMENT ON PLEA CHALLENGING DE-NOTIFICATION OF JANTAR MANTAR AS A PROTEST SITE / DEATH PENALTY FOR MUSKAN RASTOGI AND SAHIL SHUKLA IN MEERUT BLUE DRUM MURDER CASE मुंबई, महाराष्ट्र: हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील मजीद मेमन कहते हैं, "इमरान को 28 तारीख तक देश छोड़ने का जो नोटिस दिया गया है, उसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें यहाँ रहने की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी—चाहे वह फॉरेनर्स एक्ट, इमिग्रेशन एक्ट, पासपोर्ट एक्ट या किसी अन्य ऐसे कानून के तहत हो, जहाँ कुछ खास शर्तों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। असल स्थिति क्या है, यह किसी को नहीं पता। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने एक विरोध मार्च में हिस्सा लिया, सरकार नाराज है और उन्हें देश से बाहर निकालना चाहती है, क्योंकि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं..." अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए कहे जाने पर, हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील मजीद मेमन कहते हैं, "इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी; सबसे पहली बात, उन्हें हिरासत में लेना, गिरफ्तार करना या नोटिस देना ही जायज नहीं था। बेशक, अगर उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन किया है, तो कार्रवाई की सकती है, लेकिन अभी जो नोटिस दिया गया है, उसमें क्या कारण बताए गए हैं, यह मुझे नहीं पता। मीडिया की खबरों के अनुसार, उनसे 28 तारीख से पहले भारत छोड़ने के लिए कहा गया है..." इस पर जवाब यह है कि अगर कोई विदेशी नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से किसी विरोध मार्च में हिस्सा लेता है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वे अकेले सरकार के खिलाफ कोई स्वतंत्र अभियान नहीं चला रहे थे, बल्कि बस लोगों की भीड़ में शामिल हो गए थे। उन्हें लगा कि जो हो रहा है वह गलत है, लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है और जनहित के लिए नुकसानदेह है...
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