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North Bastar Kanker494776

राष्ट्रीय चालक दिवस पर कांकेर में मोटरसाइकिल रैली

Sept 01, 2024 15:57:52
Pakhanjur, Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के कांकेर में 1 सितंबर को राष्ट्रीय चालक दिवस पर हजारों चालकों ने मोटरसाइकिल रैली निकाली। छत्तीसगढ़ ड्राइवर महा-संगठन ने इस दिन को सरकारी कैलेंडर में शामिल करने, चालक आयोग के गठन और चालकों की सुरक्षा की मांग की। रैली के दौरान चालक सदस्यों ने अपनी समस्याओं पर चर्चा की।

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IKIsateyak Khan
Mar 21, 2026 01:16:26
Danapur, Bihar:घटिया निर्माण जान पर बन आई, दानापुर के ढिबरा में बनता पुल गिरा, दो मजदूर दबे, एक गंभीर.\n\nपटना के दानापुर स्थित ढिबरा इलाके में निर्माणाधीन पुल के गिरने से बड़ा हादसा हो गया। घटिया निर्माण और लापरवाही की पोल खोलते हुए यह पुल अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके नीचे काम कर रहे दो मजदूर दब गए। इनमें से एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे जेसीबी की मदद से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।\n\nग्रामीणों के मुताबिक, पुल का निर्माण बिना मजबूत बेस और पिलर के सीधे मिट्टी पर किया जा रहा था। इतना ही नहीं, निर्माण में सरिया तक का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो गई थी। यही लापरवाही हादसे की बड़ी वजह बनी। हादसे के वक्त एक मजदूर किसी तरह पुलिया के अंदर छुपकर अपनी जान बचाने में सफल रहा।\n\nबताया जा रहा है कि विजय सिंह पथ से ढिबरा तक सड़क और पुल निर्माण का काम जारी है, जिसमे घाटी मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है और ईसमें एक नहीं बल्कि दो पुल बिना ठोस आधार के बनाए जा रहे हैं। एक पुल गिर चुका है, जबकि दूसरा भी उसी तर्ज पर तैयार किया गया है, जिससे ग्रामीणों में डर और आक्रोश का माहौल है।\n\nस्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, साथ ही दूसरे पुल की जांच कर तत्काल निर्माण कार्य रोकने की भी अपील की है, ताकि कोई और बड़ा हादसा होने से रोका जा सके।
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MDMahendra Dubey
Mar 21, 2026 01:15:54
Damoh, Madhya Pradesh:खराब मौसम के बाद भी देवी भक्ति पर नहीं पड़ रहा असर, देवी मंदिर में आस्था का सैलाब.. दमोह जिले में बीते दो दिनों से खराब मौसम के बाद भी नवरात्र पर भक्तों के उत्साह और श्रद्धा में कोई फर्क नहीं पड़ा है। बड़ी सुबह से देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को देखा जा सकता है। जिला मुख्यालय पर शहर के शक्ति केंद्र माने जाने वाले बड़ी देवी जी मंदिर में सुबह 3 बजे से भक्तों की लम्बी कतारें देखने को मिली तो इन श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल है। बड़ी देवी मंदिर में पुख्ता इंतजामों के बीच लोग जल अर्पण करने के लिए पहुंच रहे है। मनोकामनाएं पूरी करने वाले इस स्थल पर बड़ी देवी जी को नो दिनों तक जल चढ़ाने का खास महत्व है और लोग इस काम को पूरा कर रहे है।
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GBGovindram Bareth
Mar 21, 2026 01:15:41
Saiki, Bihar:슬ग/जल संगवारी महा अभियान में जल संरक्षण हेतु जिले में 10 हजार सोख्ता गड्ढा बनाया गया। कलेक्टर ने लोगों को जल बचाने और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील। कलेक्टर ने "संतान के नाम एक सोख्ता गड्ढा बनाने" की शपथ दिलाई। ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए श्रमदान करने के लिए किया प्रोत्साहित। जल संरक्षण महा अभियान भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए किया जा रहा है। कलेक्टर ने "संतान के नाम एक सोख्ता गड्ढा बनाने" की शपथ दिलाई। "संतान के नाम सोख्ता गड्ढा" की पहल ग्रामीणों के दिलों को छू लिया है। इस अनूठी सोच के जरिए हर परिवार अपने बच्चों के नाम पर एक सोख्ता गड्ढा बनाकर भविष्य के लिए जल संरक्षण का संकल्प ले रहा है। देवगांव में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोगों ने जल बचाने और संरक्षित करने का संकल्प लिया, जिससे यह अभियान अब एक जन - आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। साथ ही कलेक्टर ने ग्रामीणों को जल संरक्षण के लिए श्रमदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। पानी बचाओ, भविष्य बचाओ कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे के मार्गदर्शन में चल रहा यह अभियान न सिर्फ वर्तमान जल संकट का समाधान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य की नींव भी रख रहा है। संदेश साफ है कि, 'पानी बचाओ, भविष्य बचाओ' अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ की पहचान बनता जा रहा है。
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HGHarish Gupta
Mar 21, 2026 01:15:21
Chhatarpur, Madhya Pradesh:एकंर -दवा और दुआ का फार्मूला साथ-साथ चलाने वाले बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मंशा के अनुरूप बीते साल जिस कैंसर अस्पताल की आधारशिला पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी उस अस्पताल का अब विधिवत निर्माण कार्य शुरू हो रहा है।निर्माण कंपनी के डायरेक्टर प्रशांत रुइया ने इस कार्य को अपने हाथों में लिया है। वह अपनी टीम के साथ बागेश्वर धाम पहुंचे जहां उन्होंने बालाजी के चरणों में शीश झुकाते हुए बालाजी को प्रणाम किया, इसके बाद उन्होंने बाबा बागेश्वर से मुलाकात की , अब तक कैंसर अस्पताल की बाउंड्रीवाल का कार्य चल रहा था जो लगभग पूरा हो चुका है। करीब 3 किलोमीटर लंबी चहारदिवारी बनाकर अस्पताल क्षेत्र को चिन्हित कर दिया गया है। अस्पतालों में मंदिर कई जगह देखने को मिल गए होंगे लेकिन बागेश्वर बालाजी के मंदिर में अस्पताल बनाने का सपना बाबा बागेश्वर ने देखा था। सद्गुरु भगवान सन्यासी बाबा के आशीर्वाद से क्षेत्र ही नहीं प्रदेश और प्रदेश भर के गरीब व जरूरतमंद कैंसर पीड़ित लोगों को राहत देने के उद्देश्य से बागेश्वर बालाजी कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के निर्माण की शुरुआत की जा रही है। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति की देखरेख में बनने वाले इस विशाल अस्पताल को बनाने का काम निर्माण कंपनी कर रही है , पांच कन्याओं का पूजन करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अस्पताल निर्माण कार्य की ईंटें रखी गई। अस्पताल के तैयार हो जाने से आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए यह जीवनदायी साबित होगा। डेढ़ साल में तैयार होगा अस्पताल एक अनुमान के मुताबिक अस्पताल के मुख्य ढांचे को तैयार करने में 18 से 20 माह लगेंगे। अस्पताल के मुख्य ढांचे का निर्माण कार्य शुरू होने से डेढ़ साल में इसके बनकर तैयार होने की संभावना है। यह अस्पताल गरीब और जरूरतमंदों के लिए वरदान बनेगा अस्पताल यह कैंसर अस्पताल बुंदेलखंड क्षेत्र ही नहीं पूरे प्रदेश और देश के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित होगा, जहाँ उन्हें आधुनिक और सुलभ उपचार सुविधाएँ मिल सकेंगी। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगी। धर्मशाला के साथ बनेगी गौशाला, सोलर पार्क से रोशन होगा अस्पताल 25 एकड़ के अस्पताल कैंपस में जहां स्टाफ के रहने की व्यवस्था होगी वहीं मरीजों के परिजनों को ठहरने के लिए धर्मशाला भी बनाई जाएगी। अस्पताल क्षेत्र में बायो पार्क एवं बोटैनिकल गार्डन भी तैयार किया जाएगा।
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KRKishore Roy
Mar 21, 2026 01:03:22
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MDMahendra Dubey
Mar 21, 2026 01:01:41
Sagar, Madhya Pradesh:नवरात्रि स्पेशल... बुंदेलखंड का वो रहस्यमयी मंदिर, जहां डाकू भी झुकाते थे सिर; हर साल 'तिल' बराबर बढ़ रही है माता की चट्टान एंकर/ चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर जहां पूरा देश शक्ति की भक्ति में डूबा है, वहीं मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में एक ऐसा चमत्कारिक सिद्ध स्थान है, जो अपनी पौराणिकता और वैज्ञानिक रहस्यों के लिए दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं सागर, छतरपुर और टीकमगढ़ जिले की सीमा पर स्थित 'अबार माता' मंदिर की। 70 फीट की हो चुकी है चट्टान, निसंतान दंपत्तियों की भरती है गोद अबार माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ मौजूद ग्रेनाइट की एक विशाल चट्टान है। स्थानीय लोगों की अटूट आस्था है कि माता इसी चट्टान में समाहित हैं। हैरत की बात यह है कि कुछ समय पहले तक यह चट्टान महज कुछ फीट की थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका आकार बढ़ता गया और आज यह करीब 70 फीट तक पहुंच चुकी है। मान्यता है कि हर महाशिवरात्रि पर इस चट्टान की लंबाई 'एक तिल' के बराबर बढ़ जाती है। श्रद्धालु इस चमत्कार को भगवान शिव और शक्ति के मिलन से जोड़कर देखते हैं। कहा जाता है कि इस पवित्र चट्टान को छूने मात्र से निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। दस्युओं की श्रद्धा और आल्हा-ऊदल का इतिहास हजार वर्ष से भी प्राचीन यह स्थल ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक समय यह क्षेत्र दस्युओं (डाकुओं) का गढ़ हुआ करता था। आजादी के पूर्व और बाद के दौर में अंचल के प्रसिद्ध दस्यु सरदार यहाँ गुप्त रूप से माता की सेवा और पूजन के लिए आते थे। मंदिर के नाम 'अबार' के पीछे भी एक रोचक बुंदेली कहानी है। जनश्रुति के अनुसार, महोबा के वीर योद्धा आल्हा-ऊदल जब माढोगढ़ जा रहे थे, तब इस घने जंगल में उन्हें शाम हो गई। बुंदेलखंडी भाषा में देरी होने को 'अबेर' होना कहा जाता है। आल्हा-ऊदल ने यहीं विश्राम कर अपनी आराध्य देवी का आह्वान किया, जिससे माता ने प्रकट होकर दर्शन दिए। तभी से यह स्थान 'अबार माता' के नाम से विख्यात हुआ। कालान्तर में यहाँ माता के स्वरूपों की संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, लेकिन आज भी मुख्य पूजन उस अडिग ग्रेनाइट चट्टान का ही होता है। मान्यता है कि आल्हा-ऊदल को दर्शन देने के बाद माता इसी चट्टान में समाहित हो गई थीं। यही कारण है कि यहाँ प्रकृति पूजन का विशेष महत्व है और श्रद्धालु इस चट्टान को ही माता का साक्षात स्वरूप मानकर पूजते हैं। सागर जिला मुख्यालय से 85 किमी और शाहगढ़ से 15 किमी दूर स्थित है मंदिर। नवरात्रि की पंचमी और अष्टमी को माता का भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है। शारदीय नवरात्रि में मेले जैसा माहौल रहता है, लेकिन चैत्र माह की नवरात्रि में यहाँ 10 दिनों का विशाल मेला लगता है, जो पूरे बुंदेलखंड में प्रसिद्ध है। सागर, टीकमगढ़ और छतरपुर से यहाँ पहुँचने के लिए बस और टैक्सी की सुगम सुविधा उपलब्ध है।
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MDMahendra Dubey
Mar 21, 2026 01:01:22
Damoh, Madhya Pradesh:दमोह में ठंड के मौसम की तरह छाया कोहरा..आवागमन हुआ प्रभावित.. एंकर/ मौसम के बदले मिजाज के बीच दमोह में लोगों को अब मार्च के महीने में ठंड के मौसम का एहसास हो था है। एक तरफ जहां 30 घंटे से ज्यादा का समय बारिश का हुआ तो कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई है वहीं देर रात से इलाका कोहरे की चादर ओढ़े हुए है। रात करीब 3 बजे से पूरे क्षेत्र में घना कोहरा देखने को मिला तो रात के वक्त कड़ाके की ठंड का अनुभव लोगों ने किया। घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम हुई और स्टेट हाइवे पर सरपट दौड़ने वाले वाहनों के पहिए भी थम गए। बदले मौसम का असर यात्रियों पर साफ देखने को मिला जब निश्चिंत होकर बिना गर्म कपड़ों के सफर कर रहे लोगों को ठंड की वजह से परेशानी हुई और लोग कपकपाते नजर आए। मौसम विभाग की माने तो अभी दो दिन और लोगों को ऐसा ही मौसम देखने को मिलेगा।
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CSChandrashekhar Solanki
Mar 21, 2026 01:01:07
Ratlam, Madhya Pradesh:नवरात्र के पावन अवसर पर रतलाम जिले में माता रानी के दरबार भक्ति और आस्था के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। खासतौर पर रात के समय रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से सजे मंदिर बेहद आकर्षक दिखाई दे रहे हैं, जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। इन दिनों दो प्रमुख कालीका मंदिरों की झलक खास बनी हुई है। पहला, सैलाना स्थित माँ कालीका मंदिर, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर माता रानी का आशीर्वाद ले रहे हैं। मंदिर की सजावट और वहां का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है。 वहीं दूसरी ओर धामनोद का माँ कालीका दरबार भी भव्यता का अद्भुत उदाहरण है। नवरात्र के दौरान इस मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ गई है। दोनों ही स्थानों पर भक्तों की आस्था उमड़ रही है और माता रानी के चमत्कारी दर्शन श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रहे हैं। रतलाम
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