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अबूझमाड़ के बालेबेडा में BSF जन सुविधा कैम्प से गांव में रोशनी, डर खत्म
HSHEMANT SANCHETI
Dec 16, 2025 02:51:24
Narayanpur, Chhattisgarh
एंकर को हटाकर नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र का नाम आते ही वर्षों से नक्सल हिंसा, भय और दुर्गमता की तस्वीर सामने आ जाती है। घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में शामिल बालेबेडा गांव भी लंबे समय तक इसी दहशत में जीता रहा। लेकिन हाल ही में यहां खुले पुलिस जन सुविधा कैम्प ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में भरोसे और विकास की एक नई शुरुआत भी की है।
बालेबेडा में स्थापित इस जन सुविधा कैम्प में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 86वीं बटालियन की तैनाती की गई है। कैम्प खुलने के बाद गांव का माहौल तेजी से बदला है। जहां पहले नक्सल भय के कारण लोग शाम ढलते ही अपने घरों में सिमट जाते थे, वहीं अब सुरक्षा की भावना जागृत होने से ग्रामीण खुलकर आगे आ रहे हैं। जवानों की मौजूदगी ने यह विश्वास दिलाया है कि अब गांव अकेला नहीं है।
आजादी के सात दशक बाद भी बालेबेडा जैसे गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे हैं। बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें यहाँ तक नहीं पहुंच पाई थीं। ऐसे में जब जन सुविधा कैम्प खुला, तो ग्रामीणों के मन में सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विकास की उम्मीद भी जगी। बीएसएफ के जवानों ने इस उम्मीद को हकीकत में बदलने की दिशा में एक सराहनीय पहल की।
कैम्प में उपलब्ध जनरेटर की मदद से जवानों ने गांव के घरों तक विद्युत कनेक्शन पहुंचाया। एक-एक घर में एक बल्ब लगाया गया। यह छोटा सा प्रयास दिखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इन ग्रामीणों के लिए यह किसी बड़े सपने के सच होने जैसा था। जिन घरों में वर्षों से रात का मतलब सिर्फ अंधेरा और डर था, वहां पहली बार रोशनी जली।
ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। बच्चों की आंखों में चमक थी, बुजुर्ग भावुक नजर आ रहे थे। पहली बार night में घर के भीतर उजाला देखकर लोगों ने राहत और सुरक्षा दोनों को महसूस किया। यह सिर्फ बिजली का बल्ब नहीं था, बल्कि भरोसे, बदलाव और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक था।
जी मीडिया की टीम ने इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरे में कैद किया। जवानों द्वारा घर-घर जाकर लगाए जा रहे बल्ब, ग्रामीणों के साथ उनकी आत्मीय बातचीत और सुरक्षा बलों के प्रति बढ़ता विश्वास इस खबर को और भी खास बनाता है। यह दृश्य बताता है कि बंदूक से पहले भरोसा और विकास किसी भी संघर्षग्रस्त क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ सकता है।
बालेबेडा में जली यह रोशनी सिर्फ गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि अगर सुरक्षा और संवेदनशीलता साथ चलें, तो सबसे कठिन इलाकों में भी बदलाव संभव है। अबूझमाड़ के इस छोटे से गांव में जगा यह उजाला आने वाले समय में विकास की एक मजबूत किरण बन सकता है।
बाइट 01 ग्रामीण
बाइट 02 ग्रामीण
पीटीसी ग्रामीणों के घरों में BSF द्वारा लाइट लगाने के दौरान
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