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Muzaffarpur में पांच साल से गायब खुशी: सीबीआई जांच जारी
MKManitosh Kumar
Feb 22, 2026 08:05:04
Muzaffarpur, Bihar
Muzaffarpur में सरस्वती पूजा पंडाल से पांच साल पहले गायब मासूम खुशी की मां पीछले पांच साल से घर के चौखट पर बैठ कर रोती विलखती हुई आज भी बेटी खुशी की इंतजार करती है. 16 फरवरी 2021 को सरस्वती पूजा का दिन था और Muzaffarpur के Brahmopur थाना क्षेत्र के Pamaria Tola में सरस्वती पूजा का पंडाल सजा था और इसी में खेलती-कूदती हुई पांच साल की मासूम खुशी वहां से गायब हो गई, जिसका आज तक पता नहीं चल सका है. हालाँकि फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर खुशी अपहरण कांड मामला सीबीआई जांच कर रही है. खुशी के गायब होने के बाद उसे खोजने के लिए हर जगह प्रयास किया गया, मगर अभी तक कोई सुराग नहीं मिला. बेटी की गायबगी से परेशान खुशी के पिता राजन साह ने ब्रह्मपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई. परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस बेटी को ढूंढ लेगी, लेकिन समय-समय पर जांच में देरी के कारण सुराग नहीं मिल सका. इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी. खुशी के माता-पिता को लगा था कि अब शायद सीबीआई को कोई सुराग मिलेगा, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी सीबीआई की जांच में भी खुशी का कुछ पता नहीं चल सका. स्थानीय लोग कहते हैं हर वर्ष सरस्वती पूजा के वही पंडाल सजता है और वही स्थान रहता है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब वहां खेलती खुशी नहीं है. आज भी खुशी की मां खामोश और बेबस भरे आंखों से गिरता हुआ आंसू लेकर घर के चौखट पर बैठी है और खुशी का इंतजार करती है. माँ मना रही हैं कि मेरी बेटी ठीक-ठाक लौट आए. अगर पुलिस सही समय पर बेटी को नहीं खोज पाई तो सुप्रीम कोर्ट भी दरवाजा खटखटाने को तैयार हैं. वही आगे बोले कि अगर बेटी की बरामदगी के लिए जरूरत पड़ी तो अदालत जाएंगे. इन स्थितियों के बीच मुजफ्फरपुर कीएमबीए छात्रा यशी सिंह का अपहरण हुआ और स्थानीय पुलिस जांच के नाम पर मामले को लटकाए रखा गया. हाईकोर्ट के आदेश पर अब केस की जांच सीआईडी से सीबीआई को सौंप दी गई है, परन्तु अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला. SSP कांतेश कुमार ने कहा कि नाबालिग के गायब होने पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर बरामदगी दिशा में कार्रवाई होती है और फोटो प्रकाशित करते हैं, साथ ही सूचना देने वाले को इनाम भी घोषित किया जाता है. इसके साथ वात्सल्य पोर्टल पर भी गायब बच्चे की फोटो के साथ विवरण डालते हैं और SOP पूरा किया जाता है. यहाँ के मानवाधिकार मामलों के चर्चित अधिवक्ता एस के झा का कहना है कि बच्चों के मिसिंग मामलों में आम तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा मामला सामने आता है, जिसमें अनपढ़ माता-पिता को लालच देकर बच्चों को दूसरे राज्य में ले जाकर मजदूरी कराई जाती है या अंग बेचने का काम किया जाता है. मानव तस्करी रोकने के लिए आयोगों में भी मामले दर्ज होते हैं और कई मामलों में पुलिस को सजग रहने की जरूरत बताई जाती है. यदि किसी भी संदिग्ध बच्चे को दिखे तो तुरंत जांच करनी चाहिए ताकि इस पर लगाम लग सके.
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