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कटिहार में ठंड से आलू-सरसों की फसलें हिलीं, उत्पादन गिरने की आशंका
RKRANJAN KUMAR
Jan 06, 2026 04:24:42
Katihar, Bihar
ठंड से आलू व सरसों के किसानों की रंगत उड़ी, फसलों को झुलसाना शुरू, उत्पादन होगा प्रभावित
शीतलहर से कटिहार के किसान चिंतित
ठंड से आलू व सरसों के किसानों की रंगत उड़ी, फसलों को झुलसाना शुरू, उत्पादन होगा प्रभावित
8000 हेक्टेयर में आलू की खेती
मक्का की खेती 2025-26 में बढ़कर 88,000 हेक्टेयर तक रकबा, मौजूदा शीतलहर में मक्का का
विकास की गति धीमा
13,000 हेक्टेयर में लगी सरसों की फसल भी अछूती नहीं
16,404 हेक्टेयर में लगा गेहूं अभी सुरक्षित
15 दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड, शाम की सिंचाई व दवा के छिड़काव से फसल बचाएं
कटिहार जिले में रबी सीजन का सबसे बड़ा आधार मक्का है, जिसका रकबा मौजूदा शीतलहर इसके विकास की गति को धीमा कर रहा है। साथ ही, 2025-26 में बढ़कर 88,000 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, लेकिन 8,000 हेक्टेयर में लगी आलू की खेती पर सबसे बुरा प्रहार हुआ है। इधर दो सप्ताह से पड़ रहा कड़क ठंड और पछुआ हवा ने रबी की फसलों की कमर तोड़ दी है। 20 दिसंबर के आस पास से शुरू हुई शीतलहर, अब खेती-किसानों के लिए आफत बन गई है। लगातार धुंध छाए रहने और धूप न निकलने की वजह पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया धीमी पड़ गई है । जिससे फसलों का बढ़वार और फूलने की प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित हुई है। हालांकि इस बीच एक आध दिन धूप निकला भी, लेकिन धूप में वैसी तपिश नहीं थी जिससे पौधों को गरमाहट मिल सके।
खास तौर पर आलू और सरसों की फसलों को झुलसाना शुरू कर दिया है। खेतों में कोहरे की चादर ऐसी लिपटी है कि पौधों के फूल और दाने झड़ने की
नौबत आ गई है। वहीं मौसम विभाग का मानना है कि 10 जनवरी तक पारा 11 से 18 डिग्री के इर्द-गिर्द रहेगा और हफ्ते भर तक तापमान में ऐसा ही उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
वहीं गेहूं की बुआई तो फिलहाल सुरक्षित दिख रही है, लेकिन अगर ठंड का यह दौर लंबा खिंचा तो बालियों में दाना भरने के समय भारी नुकसान हो
सकता है। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है कि कब कड़क धूप खिले और उसकी मेहनत बच जाए। अगर यही हालात रहे तो आलू की अगेती फसल में तो 10 से 15 प्रतिशत तक की बर्बादी के हो सकता हैं।
वहीं जिले के 13,000 हेक्टेयर में लगी सरसों की फसल भी अछूती नहीं है । जहां धुंध से फूल झड़ने से 10 से 15 प्रतिशत तक क्षति की आशंका जताई जा रही है। हालांकि 16,404 हेक्टेयर में लगा गेहूं अभी सुरक्षित है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान में गिरावट का यह दौर अगले हफ्ते भी जारी रहा, तो गेहूं के दाने पतले रह सकते हैं, जिससे अंतिम उत्पादन में बड़ी गिरावट आ सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार के प्रसार वैज्ञानिक पंकज कुमार के अनुसार, बदली के मौसम और वातावरण में नमी होने पर आलू में पछेती झुलसा रोग का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। इस रोग में पत्तियां किनारे से झुलसना शुरू होती है और पूरा पौधा काला पड़ने लगता है। यदि समय पर नियंत्रण न हो तो 2-3 दिन में पूरी फसल और कंद सड़ सकते हैं। इससे बचाव के लिए किसानों को मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का छिड़काव अवश्य करना चाहिए। यदि खेत में लक्षण दिख रहे हैं, तो 3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से 10 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 छिड़काव करें। इसके साथ ही, इस मौसम में मिट्टी का तापमान संतुलित रखने के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए।
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