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बालाघाट में 35 करोड़ के STP के लिए जमीन आवंटन समस्या दूर, 18 महीनों में शुरू होगा प्लांट

Raebareli, Uttar Pradesh:एंकर– बालाघाट में 35 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) योजना को मंजूरी मिल गई है, लेकिन जमीन आवंटन में हो रही देरी के कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है.. एनजीटी के नियमों के तहत, घरों और दुकानों से निकलने वाले दूषित पानी को सीधे जलस्रोतों में मिलने से रोकने के लिए यह योजना लाई गई है... वाइस ओवर 01– इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नगर के चार प्रमुख स्थलों पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं जिसमें एएचपी क्वार्टर,समता तालाब,कोसमी और मोती नगर को चिन्हित किया गया है...वर्तमान में दो स्थानों पर जमीन आवंटन की प्रक्रिया अटकी हुई है, जिससे काम शुरू होने में बाधा आ रही है... इस योजना का मुख्य उद्देश्य दूषित पानी को फिल्टर कर तालाबों और अन्य जलस्रोतों तक पहुंचाना है, जिससे पर्यावरण और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा... बालाघाट नगर पालिका के सीएमओ ने बताया कि जमीन आवंटन की समस्या को दूर करने के लिए आपसी सामंजस्य से प्रयास किए जा रहे हैं.. नपा का लक्ष्य है कि बाधाएं दूर होते ही काम शुरू कर इसे 18 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाए...जल प्रदूषण को रोकने और शहर की स्वच्छता को सुधारने वाली इस योजना की स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की है... लोगों का मानना है कि इस प्लांट के चालू होने से शहर के तालाबों का अस्तित्व बचेगा और भूमिगत जल स्तर में भी सुधार होगा... नगर पालिका प्रशासन अब कागजी कार्रवाई को जल्द से जल्द पूरा कर धरातल पर काम शुरू करने की तैयारी में है.... बाइट 01– सुधीर माहुले (स्थानीय निवासी)(1.15 मिनट) बाइट 03– सूर्य प्रकाश उके (नपा सीएमओ)(49 सेकंड) आशीष श्रीवास बालाघाट
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प्रतापगढ़ के कोचिंग सेंटरों में औचक फायर चेक, एक्सटिंग्विशर और अलार्म नहीं मिले

Bela Pratapgarh, Uttar Pradesh:प्रतापगढ़ में लखनऊ कोचिंग हादसे के बाद अलर्ट हुआ प्रशासन कोचिंग सेंटर पर की छापेमारी, प्रतापगढ़ स्कॉलर कोचिंग में फायर विभाग ने की औचक जांच, उपकरण खराब मिले। जाँच में फायर एक्सटिंग्विशर और अलार्म सिस्टम काम न करने की पुष्टि हुई। फायर टीम ने सभी यंत्र मरम्मत के लिए कल सही कराने को भेज दिए। जनपद में सुबह से तीन कोचिंग सेंटरों में ताबकटोड़ छापेमारी। स्थानीय लोगों का सवाल, समय-समय पर जांच होती तो बड़ा हादसा टल सकता था। मामला लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद प्रतापगढ़ स्कॉलर कोचिंग में फायर जांच का।
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फर्रुखाबाद में कोचिंग सेंटर-मार्ट कारोबार पर प्रशासन की कड़ी जांच, बिना कागज़ के कार्रवाई तय

Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद अरुण सिंह घटना के बाद जिला प्रशासन की आंखें खुली और जांच शुरू हुई जांच में बिना कागजों के बिना मानकों के हो रहा कारोबार करोड़ों का खेल करने वाले मार्ट और लाखों की कोचिंग चलने वाले बड़े सफेद पोस भी शामिल फर्रुखाबाद के लगभग एक दर्जन से ज्यादा जगह पर छापेमारी कागज किसी के पास नहीं जांच के लिए 2 दिन 48 घंटे का समय लखनऊ की घटना के बाद कोचिंग सेंटर की हकीकत फर्रुखाबाद में फेल सरकारी राजस्व को चुना तो लगाया ही साथ ही गुमराह करने का भी काम लाखो रुपए की सरकारी राजस्व को चूना लगा चुके हैं यह कोचिंग सेंटर और मार्ट के मालिक कहीं कब्रिस्तान की भूमि में बना मार्ट तो कहीं भू उपयोग कृषि तो कहीं भी उपयोग पार्क लेकिन बनी है बिल्डिंग कमा रहे करोड़ों और सरकारी राजस्व और सरकार को लग रहे चुनाव फर्रुखाबाद में खुली पोल — कोचिंग सेंटर या मौत का कारोबार? तीन‑तीन फीट की गलियाँ, बेसमेंट क्लासरूम, और सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कागज़ का खेल। क्या बच्चों की जान को हल्के में लिया जा रहा है?" आचार्य, आकाश, और वी मार्ट जैसे संस्थान भी शामिल "जांच शुरू होते ही सच्चाई सामने आई। अधिकांश संस्थानों के पास फायर‑एनओसी नहीं, कई जगह निकास मार्ग नहीं और बिल्डिंग नक्शे गायब। कुछ कोचिंग में एक‑वक्त में सौ से अधिक छात्र पढ़ते पाए गए — ऐसे हालात में कोई भी छोटी सी दुर्घटना बड़े हादसे में बदल सकती है।" फायर एनओसी अनुपस्थित; इमरजेंसी निकास नहीं; बिल्डिंग नक्शे और लाइसेंस मौजूद नहीं; क्षमता से कई गुना अधिक नामांकित छात्र।" "48 घंटे के भीतर सभी संस्थानों को कागज़-पत्र और सुरक्षा मानक पेश करने होंगे। नियम उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" "हालाँकि आदेश जारी हुए हैं,लेकिन कई संस्थान वर्षों से बिना अनुमति के करोड़ों का व्यापार कर रहे हैं। सवाल उठता है—पिछले वर्षों में प्रशासन ने ऐसी संस्थाओं पर नजर क्यों नहीं रखी?" नगर मजिस्ट्रेट ने जैसे ही जहां शुरू की नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार का पारा चढ़ा बिना कागज के ही लाखों रुपए का चूना लगा चुके सरकार को नगर मजिस्ट्रेट ने कहा जब तक कागज पूरे ना हो खोलना मत नहीं तो कार्रवाई की जाएगी "हम ठोस जांच कराएंगे — सिर्फ कागज़ नहीं, फील्ड पर निरीक्षण भी होगा। नियम उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई के दिशा‑निर्देश जारी हैं।" "सरकार ने निर्देश दिए हैं कि राजस्व‑रिलेटेड छूट और गड़बड़ियों की भी जांच होगी। किसी भी तरह की अनियमितता पाई गई तो कानूनी कार्रवाई होग "अभिभावकों से अनुरोध है कि वे संस्थान के लाइसेंस, फायर एनओसी और निकास मार्ग की वैधता स्वयं जाँचें। किसी भी संदेह पर बच्चों को तुरंत डाक्यूमेंटेड संस्थानों में भेजें।" "यह केवल अदालती मामला नहीं—यह जीवन का मामला है। जो लोग सुरक्षा नियमों को तवज्जो नहीं दे रहे, उनके खिलाफ पेनल्टी, अनुदान रद्द और आपराधिक मुक़दमों तक की राह खुलनी चाहिए।" "48 घंटे बाद हमारी टीम फिर से खुलेगी और रिपोर्ट देगी—क्या प्रशासन सिर्फ दृश्य दिखावे तक सीमित रहेगा, या असल में इन संस्थानों को बंद कर सुरक्षा मानकों को लागू करेगा?" बाइट-- पारुल तरार नगर मजिस्ट्रेट
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गहलोत का जोधपुर दौरा: स्वास्थ्य, पानी और भ्रष्टाचार पर सरकार पर कड़ा हमला

Jodhpur, Rajasthan:राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंगलवार को जोधपुर दौरे पर रहे। सर्किट हाउस में जनसुनवाई से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने पावटा अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की बिगड़ी तबीयत के मामले को गंभीर बताया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, कानून व्यवस्था, पानी संकट, भ्रष्टाचार, कोचिंग हब और प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। जोधपुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबसे पहले पावटा अस्पताल में भर्ती प्रसूता महिलाओं के मामले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल ही में कोटा में भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं और यदि किसी प्रसूता की किडनी खराब हो जाए तो उसका असर पूरी जिंदगी पर पड़ता है। गहलोत ने कहा कि सरकार को कोटा मामले की वास्तविक वजह जनता को बतानी चाहिए और बिना जांच पूरी हुए किसी भी घटना को अलग बताना उचित नहीं है। गहलोत ने कहा कि प्रसूताओं के मन में यदि अस्पतालों को लेकर डर बैठ गया तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय होगा। उन्होंने एम्स की विशेषज्ञ टीम बुलाने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि कोटा की घटना को डेढ़ महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार कारण स्पष्ट नहीं कर पाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को न जनता बर्दाश्त करेगी और न ही कांग्रेस। स्वास्थ्य मंत्री के बयानों पर भी गहलोत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले स्वास्थ्य मंत्री की एक अच्छी छवि थी, लेकिन अब उनके कई बयान विवादों का कारण बन रहे हैं। गहलोत ने अपनी सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का बचाव करते हुए कहा कि यह सभी वर्गों के लिए थी, जबकि आयुष्मान भारत योजना सीमित दायरे में काम करती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों में बुजुर्गों को महीनों से पेंशन नहीं मिल रही है और सरकार भुगतान करने में भी परेशानी का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच नाराजगी लगातार बढ़ रही है। गहलोत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों पर हो रही कार्रवाई को लेकर भी गहलोत ने आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनिंदा धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है और इस मामले में केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने जयपुर के कोचिंग हब और लखनऊ की आगजनी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार को शिक्षा संस्थानों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए. जोधपुर के पानी संकट और एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर भी गहलोत ने सरकार और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि पानी का संकट का मंत्री ने मजाक उड़ा दिया। स्टेडियम में हमने अनाउसमेंट करवाया था। मैंने 1400 करोड़ भी मंजूर किए थे। देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट से करवा दिया। घर-घर में तकलीफ हो रही है ये मजाक उड़ा रहे है। हमने ट्रेन से पानी मंगवाया है। मंत्री को खुद को नहीं पता। शेखावत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मैंने बाधाएं पैदा नहीं की मेरी रिक्वेस्ट पर ही बन रही है। गड़करी से मैंने रिक्वेस्ट की थी। केंद्रीय मंत्री मुझे एतराज नहीं है कि वे श्रेय लेवें। यह अधिकार बनता है। निर्णय मैंने करवाया था, आप खुद उन्हें पूछ लो। स्टेट सरकार तो खुद बना रही है। मंत्री ने लीक से हटकर हल्के स्तर के आरोप लगाए है, लगता है वे घबरा गए है। जोधपुर जिले में उनकी स्थिति जो बनी है, उनकी पोल खुल गए है पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र में सांसदों के पार्टी बदलने पर अशोक गहलोत ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि गधे-घोड़े, भैंस और बकरी जैसे बिकते है, वैसे एमएलए एमपी बिक रहे, गहलोत ने कहा मेरे मुंह से मत कहलवाओ ये सरकार डेमोक्रेसी को खत्म कर रही है। बंगाल में 80 में 60 एमएलए 28 में से 20 एमपी गायब हो रहे है। इस कारण से नौबत आ रही है, पब्लिक नहीं चेती तो देश का भविष्य न जाने क्या होगा। जोधपुर दौरे के दौरान अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर कानून व्यवस्था, पानी संकट, भ्रष्टाचार और प्रदेश की वित्तीय स्थिति तक कई मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में इन बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
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आगरा के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानक टूटे, एक्सपायर फायर इक्विपमेंट पाए गए

Agra, Uttar Pradesh:लखनऊ के भीषण अग्निकांड के बाद आगरा में भी प्रशासन और फायर विभाग अलर्ट मोड में दिखाई दे रहा है। शहर के कोचिंग संस्थानों का रियलिटी चेक किया गया तो कई चौंकाने वाली खामियां सामने आईं। कहीं अग्निशमन यंत्र एक्सपायर मिले तो कभी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। हालांकि जांच के दौरान फायर अधिकारी का एक बेतुका बयान भी चर्चा का विषय बन गया, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं। लखनऊ अग्निकांड के बाद आगरा के न्यू आगरा समेत विभिन्न थाना क्षेत्रों में फायर विभाग ने कोचिंग संस्थानों की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान कई संस्थान सुरक्षा मानकों के विपरीत संचालित होते मिले। टीम ने जब अग्निशमन यंत्रों की जांच की तो कई जगह फायर एक्सपिंग्विशर एक्सपायर पाए गए। इतना ही नहीं, कुछ उपकरण ऐसे मिले जो पिन निकालने के बाद भी चालू नहीं हुए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई कोचिंग संस्थानों में आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और नियमित निरीक्षण के मानकों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी आपदा की स्थिति में छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फायर विभाग की टीम ने संबंधित संचालकों को कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। वहीं अभियान के दौरान फायर अधिकारी सोमदत्त का एक बयान भी सामने आया, जिसे लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जब विभाग स्वयं सुरक्षा मानकों की जांच कर रहा है तो अधिकारी के बयान की भी समीक्षा होनी चाहिए। अब देखना होगा कि विभाग केवल कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई करता है या अपने अधिकारियों के आचरण और बयानों की भी जांच करता है। बाइट : सोमदत्त, अग्निशमन अधिकारी लखनऊ हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। ऐसे में आगरा में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत सामने आने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर छात्रों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
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लखनऊ हादसे के बाद नोएडा के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा सख्ती, जांच तेज

Noida, Uttar Pradesh:लखनऊ हादसे के बाद नोएडा के कोचिंग सेंटरों पर सख्ती, शिक्षा और फायर विभाग अलर्ट मोड में लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे के बाद गौतमबुद्ध नगर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और सेंट्रल नोएडा में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग और फायर विभाग की संयुक्त टीमें विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में ज़ी न्यूज़ की टीम नोएडा के सेक्टर-22 स्थित निष्ठा कोचिंग सेंटर पहुंची और वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कोचिंग सेंटर संचालक ने बताया कि संस्थान में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। सेंटर में प्रवेश और निकास (एंट्री-एग्जिट) के लिए पर्याप्त रास्ते उपलब्ध हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। संचालक ने दावा किया कि संस्थान में फायर सेफ्टी से जुड़े आवश्यक उपकरण मौजूद हैं और समय-समय पर उनकी जांच भी कराई जाती है। वहीं, भवन स्वामी ने बताया कि बिल्डिंग के निर्माण के समय ही सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया था। भविष्य में व्यावसायिक उपयोग और छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए पर्याप्त निकासी मार्ग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में संचालित सभी कोचिंग सेंटरों की जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण या अन्य सुरक्षा मानकों में कमी पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों की जान जोखिम में न पड़े। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि जिले में संचालित सभी कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों पर कितने खरे उतरते हैं और विभागीय जांच में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है। 121 कोचिंग सेंटर के लोगों से बातचीत स्टूडेंट बाईट आम लोग
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बागपत में पैसे मांगने पर होमगार्ड ने महिला‑बेटी से मारपीट, गिरफ्तार

Baghpat, Uttar Pradesh:कुलदीप चौहान, बागपत. बागपत में एक बार फिर जी यूपी/की खबर का बड़ा असर हुआ है, जहां जमीन के पैसे मांगने آئی महिला और उसकी बेटी के साथ दबंग होमगार्ड ने मारपीट की। इसे प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद पुलिस ने होमगार्ड क्ल्लू को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की तफ्तीश में जुट गई है। बालैनी थाना क्षेत्र का मामला है। बालैनी गांव का रहने वाला होमगार्ड थाने में तैनात है, उसने सेडभर गांव की महिला नूरी से जमीन खरीदी थी, लेकिन पैसे नहीं दिए। महिला नूरी अपनी बेटी के साथ होमगार्ड के घर रूपये मांगने पहुँची तो दबंग होमगार्ड ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट। उसका वीडियो जी यूपी पर चलाए जाने के बाद एसपी ने मुकदमा दर्ज कराकर होमगार्ड को गिरफ्तार कर लिया है और अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।
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झारखंड धाम मंदिर में चेन स्नैचिंग, बच्ची ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा

Giridih, Jharkhand:जारी: गिरिडीह जिले के हीरोडीह थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध झारखंड धाम मंदिर में चेन स्नैचिंग की घटना सामने आई. मंदिर में दर्शन करने आई एक श्रद्धालु महिला की चेन दूसरी महिला स्नैच कर रही थी. इसी बीच पीड़ित परिवार की एक बच्ची ने आरोपी महिला को रंगे हाथ पकड़ लिया और हल्ला करने लगी. बच्ची का शोर सुनकर मंदिर में धीरे-धीरे भीड़ एकजुट होने लगी. श्रद्धालुओं ने आरोपी महिला को घेर लिया. मामले की सूचना हीरोडीह थाना प्रभारी को मोबाइल पर दी गई. सूचना मिलते ही थाना प्रभारी आनन-फानन में दल-बल के साथ मंदिर पहुंचे. पुलिस ने आरोपी महिला को आक्रोशित यात्रियों के चंगुल से छुड़ाया और महिला कांस्टेबल के साथ थाने ले गई. थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी महिला से पूछताछ की जा रही है. पीड़ित महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया जा रहा है. पता लगाया जा रहा है कि आरोपी महिला किसी गिरोह से जुड़ी है या नहीं. झारखंड धाम में सावन से पहले ही भीड़ बढ़ने लगी है. पुलिस ने श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील की है.
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