Back
बोधगया में नकली भिक्षुओं का खतरा, श्रद्धालुओं को ठगने की आशंका बढ़ी
JPJAY PRAKASH KUMAR
Jan 08, 2026 04:31:55
Gaya, Bihar
Story:- बोधगया की पवित्रता और 'नकली भंतों' का मायाजाल,बोधगया में नकली भंते से मंडरा रहा है खतरे की घंटी।
Description:- बोधगया वह पावन धरती जहाँ सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया और 'बुद्ध' कहलाए। दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन जैसे-जैसे पर्यटन का सीजन शुरू होता है, इस पवित्र नगरी की शांति और मर्यादा पर एक गहरा साया मंडराने लगता है। सीजन आते ही बोधगया की गलियों में आपको ऐसे कई चेहरे दिखेंगे जो भिक्षुओं (भंतों) का चोला ओढ़े होते हैं। लेकिन सावधान! इनमें से कई 'भंते' नहीं, बल्कि 'बहरूपिए' हैं। इनका मकसद धर्म का प्रचार नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की श्रद्धा का फायदा उठाकर अपनी जेबें भरना है। बौद्ध धर्म त्याग और करुणा का मार्ग है। एक सच्चा भिक्षु कभी सड़कों पर घूमकर धन की मांग नहीं करता। ये नकली भंते न केवल विदेशी पर्यटकों को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म और भारत की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
अखिल भारतीय भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप भंते ने बताया कि पहले ऐसा नही था बोधगया की छवि पूर्णरूपेण जो एक भिक्षु की छवि और आभा निखरता था।लेकिन इस समय वास्तव में सीजनल भिक्षु हो गए और सीजनल भिक्षु होने के बाबजूद भी वो अपने ही अपने संगठन के कोई दस बीस पचास बनकर लड़के और मंदिर में भीख मंगवाना का काम मंदिर में हो रहा है।इससे सरकार की जो छवि है वो धूमिल हो रही है। अगर उद्देश्य से बनते है किसी संस्था से बनते है तब तो ठीक है संस्था वाले कंट्रोल करेंगें।लेकिन ऐसे जो कपड़ा बाजार से खरीद कर पहन लेते है वो किसी संस्था से नही बनते है किसी विहार से नही बनते है। न श्रीलंका है न इंडिया है न थाईलैंड है अपने आप बन जाते है कि केवल उनका उद्देश्य यह होता है कि पैसा कमाना तो उससे उनका जो तरीका जो है बहुत ही भयावह है। बहुत सा के पीछे पड़ना, फिर जो दान दे रहा है लूट लेना, ये सारा जो स्थिति जो है बहुत ही भयावह है।मंदिर में भी भिखारियों से अब असहाय जैसा लगता है।पूरा मंदिर में अंधे लुलहे लंगड़े ये पहली बार हो रहा है कि अंधे लुलहे लंगड़े सब खड़ा होकर भीख माँग रहे है तो ये छवि जो है धूमिल हो रही है इस छवि को सुधने के लिए लोगो को प्रयास करना चाहिए और प्रशासन को भी प्रयास करना चाहिए। जो छवि बोधगया की जा रही है वो उसके खिलाफ है और विपरीत है और ऐसा देखकर के लोग मायूस हो जाएंगे और अंदर जो छवि बनी हुई थी वो छवि भी धूमिल हो जाएगी। वंही उन्होंने कहा कि दूसरे जिलों से भी लोग आना शुरू कर दिए है। चीवर तो चीवर है चीवर में अपराधी है या वास्तव में भिक्षु है ये तो भेद करना बहुत मुश्किल है। जब अपराध करेगा जब पकड़ा जाएगा तब ही पता चलेगा कि असली भिक्षु और नकली भिक्षु दोनों में अंतर करना बहुत मुश्किल हो गया है।
बाइट:- प्रज्ञा दीप भंते, महामंत्री, अखिल भारतीय भिक्षु संघ
इस संबंध में जब चकमा मोनिस्त्री के प्रियपाल भंते से बात किया तो उन्होंने बताया कि पत्रकारिता करने का बहुत से लोग पत्रकारिता की डिग्री कर लेते है उसके बाद अपना काम शुरू करते है।हमारा भी जो भिक्षु बनाने का एक अच्छा परंपरा है कि किसी आचार्य के बिना या किसी उपाध्याय के बिना कोई बौद्ध भिक्षु नही बनाया जाता है या उनको स्वीकार नही किया जाता है।जँहा तक सवाल है इस वस्त्र को बाजार से खरीद कर कोई भी पहन सकता है लेकिन पहनने के बाबजूद इसका मतलब ये नही है कि वो भिक्षु बन गया भिक्षु बनाने का एक बहुत बड़ा परंपरा है। जिस परंपरा को खुद भगवान बुद्ध ने शुरू किया था। वंही उन्होंने कहा कि जो हमलोगों का जीवनयापन है। उसको आम आदमी तो आसानी से पहचानता नही है कि कौन असली है कौन नकली है लेकिन जब ये लोगो को पता चलेगा तब बौद्ध भिक्षु के चलित्र पर भी सवाल खड़े होंगे कि असली है कि नकली है ये सही बौद्ध भिक्षु है या नकली बने हुए है ये सवाल जनमानस में आ सकता है।
बाइट:- प्रियपाल भंते, चकमा मोनिस्त्री बोधगया
इस संबंध में जब बीटीएमसी के सदस्य अरविंद सिंह से बात किया तो उन्होंने बताया कि जो चीवर पहन लेते है वो बौद्ध धर्म मे पूजनीय है और पहले से जो भंते बोधगया में रहे है वो हमलोगों के लिए पूजनीय है ही लेकिन अगर सीजन में ठंडे के मौसम में कुछ लोग बाहरी लोग आकर के चीवर पहन लेते है तो ये तो चीवर की तौहीनी है और ये गलत बात है ऐसा नही होना चाहिए खास कर के बौद्ध धर्म मे सबसे पूजनीय अगर किसी को माना गया तो भंते लोगों को माना गया है और भंते लोग जो चीवर पहन लेते है वो पूजनीय हो जाते है। जो पूजनीय है आदरणीय हैहम सबका सम्मान करते है और कुछ लोग ऐसा करने के लिए व्याकुल है बोधगया में तो ये गलत है और हम इसको गलत मानते है।
बाइट:- अरविंद सिंह, बीटीएमसी के सदस्य
वंही बोधगया सीजन में अन्य जिलों व अन्य राज्यों से आए वैसे बौद्ध भिक्षु जो सिर्फ बौद्ध धर्म का मुखौटा लगाकर और चीवर पहनकर अपनी रोजी रोटी के तलाश में पहुँचते है ऐसा बौद्ध भिक्षुओं से पूरा बोधगया पाट हुआ है और सीजन में ही बोधगया आते है और जो भी दान मिलता है उससे अपना भरण पोषण करते है। जिससे पवित्र महाबोधि मंदिर की पवित्रता भी धूमिल हो रही है।
0
Report
हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|
Advertisement
ASARUN SINGH
FollowJan 09, 2026 03:09:060
Report
PPPRANAV POLEKAR
FollowJan 09, 2026 03:08:220
Report
RSRakesh Singh Thaku
FollowJan 09, 2026 03:08:010
Report
AKAshok Kumar1
FollowJan 09, 2026 03:07:440
Report
PPPRASHANT PARDESHI
FollowJan 09, 2026 03:07:090
Report
HKHARI KISHOR SAH
FollowJan 09, 2026 03:06:390
Report
VKVISHAL KAROLE
FollowJan 09, 2026 03:05:320
Report
NLNitin Luthra
FollowJan 09, 2026 03:05:170
Report
ASAshok Singh Shekhawat
FollowJan 09, 2026 03:04:220
Report
ASAshok Singh Shekhawat
FollowJan 09, 2026 03:03:580
Report
ASAshok Singh Shekhawat
FollowJan 09, 2026 03:03:270
Report
GDGAJANAN DESHMUKH
FollowJan 09, 2026 03:03:130
Report
VKVISHAL KAROLE
FollowJan 09, 2026 03:02:380
Report
DMDILEEP MISHRA
FollowJan 09, 2026 03:02:200
Report
MMMahendrakumar Mudholkar
FollowJan 09, 2026 03:02:000
Report