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Jodhpur उपभोक्ता आयोग ने समद कंवर को विवेक विहार योजना में भूखंड आवंटन का आदेश दिया
RKRakesh Kumar Bhardwaj
Dec 10, 2025 18:01:01
Jodhpur, Rajasthan
जोधपुर--राज्य उपभोक्ता आयोग, जोधपुर पीठ ने एक महत्त्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय, जोधपुर द्वारा एक सैनिक की विधवा समद कंवर को बडी राहत दी है। आयोग के न्यायिक सदस्य सुरेंद्र सिंह और सदस्य लियाकत अली ने जिला आयोग के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तकनीकी आधार पर शिकायत को खारिज कर दिया गया था। राज्य आयोग ने स्पष्ट कहा कि प्रकरण में वादकरण निरंतर जारी रहा, इसलिए जिला आयोग द्वारा निर्धारित परिसीमा का आधार विधिसम्मत नहीं था। साथ ही आयोग ने जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को आदेश दिया है कि अपीलार्थी को विवेक विहार योजना अथवा समान योजना में भूखंड आवंटित किया जाए। पृष्ठभूमि परिवादिया समद कंवर, सेवानिवृत सैनिक स्व. दलपत सिंह की विधवा हैं। वर्ष 2011 में जेडीए की विवेक विहार योजना में सैनिकों, शहीद सैनिकों की विधवाओं एवं आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इसी श्रेणी में उन्होंने आवेदन प्रस्तुत किया था। लॉटरी में उन्हें भूखंड भी आवंटित हुआ, लेकिन कंप्यूटर एवं लिपिकीय त्रुटि के कारण उनके नाम समद कंवर की जगह समंदर सिंह भाटी दर्ज हो गया। इस त्रुटि के चलते न तो उन्हें भूखंड मिला और न ही जेडीए ने सुधार की किसी प्रक्रिया पर विचार किया। परिवादिया ने वर्षों तक जेडीए के चक्कर लगाए। वर्ष 2022 में उन्होंने विधिवत नोटिस भी भिजवाया, परंतु जेडीए की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला आयोग में परिवाद दायर किया, जहां जेडीए ने दो मुख्य तर्क प्रस्तुत किए कि परिवाद समय–सीमा में नहीं है, क्योंकि यह 11 वर्ष पश्चात दायर किया गया। स्व. दलपत सिंह सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद दिवंगत हुए, अतः उन्हें शहीद सैनिक की श्रेणी में लाभ देने योग्य नहीं माना जा सकता। जिला आयोग ने विवाद के गुण-दोष में परिवादिया के दावे को सही तो माना, किंतु यह कहते हुए कि परिवाद निर्धारित दो वर्ष की लिमिटेशन में नहीं दायर किया गया, प्रकरण को खारिज कर दिया। राज्य आयोग में अपील जिला आयोग के निर्णय के विरुद्ध समद कंवर ने राज्य उपभोक्ता आयोग, जोधपुर पीठ में अपील दायर की। अपील की सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड और तर्कों के आधार पर अपील का परीक्षण किया। आयोग के सदस्य सुरेंद्र सिंह तथा लियाकत अली ने पाया कि जेडीए ने गलत सूचना के आधार पर अपीलार्थी द्वारा जमा की गई ₹5000 की पंजीकरण राशि तक जब्त कर ली, जबकि योजना की शर्तों में कहीं यह नहीं लिखा कि गलत/त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड होने की स्थिति में राशि जब्त की जा सकती है। जेडीए द्वारा राशि न लौटाना और वर्षों तक प्रकरण को लंबित रखना यह सिद्ध करता है कि वादकरण निरंतर जारी रहा। इसलिए परिसीमा की अवधि लागू नहीं होती। जिला आयोग का यह निष्कर्ष कि परिवाद समय सीमा से बाहर है, विधिक दृष्टि से उचित नहीं पाया गया। आयोग का अंतिम आदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपील स्वीकार करते हुए आदेश पारित किए कि जेडीए अपीलार्थी को विवेक विहार योजना में पूर्व आवंटित भूखंड का आवंटन पत्र जारी करे। यदि किसी कारणवश वही भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके, तो उसी योजना या समान प्रकृति की किसी अन्य योजना में समान आकार का भूखंड अनिवार्य रूप से आवंटित किया जाए। अपीलार्थी को 20,000 मानसिक क्षतिपूर्ति तथा 10,000 परिवाद व्यय के रूप में अदा किए जाएं।
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