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मध्यप्रदेश ने राजस्थान को 7% पानी देने की घोषणा, ERCP से पूर्वी राजस्थान बदलेगा
ACAshish Chauhan
Jan 05, 2026 12:28:56
Jaipur, Rajasthan
PKC-ERCP: राजस्थान को मध्यप्रदेश से 5 नहीं बल्कि 7% पानी मिलेगा,CM मोहन यादव का एलान
जयपुर- मध्यप्रदेश से पार्वती कालीसिंध परियोजना से राजस्थान को अब ज़्यादा पानी मिलेगा. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जयपुर में इसकी घोषणा की. वही दूसरी तरफ़ राजस्थान में PKC-ERCP का काम अब बहुत जल्द धरातल पर उतरेगा. आख़िरकार ERCP कैसे जीवन दायिनी बनेगी पश्चिमी राजस्थान के लिए ,देखे इस ख़ास रिपोर्ट में .
जनहित के कार्यो में अड़चन नहीं:मोहन यादव
राजस्थान मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार का पार्वती कालीसिंध- ईस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट बहुत जल्द मरुधरा में धरातल पर दिखाई देगा. लेकिन इससे पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजस्थान को बड़ी खुशखबरी दी है. जयपुर आते ही मोहन यादव ने एलान किया कि राजस्थान को 5 नहीं बल्कि 7 प्रतिशत पानी देने को तैयार है.सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को “नदियों का मायका बताया.उनका कहना था कि बहता पानी कोई नहीं रोक सकता, बंगाल की खाड़ी तक जाता.कांग्रेस शासन में पानी को लेकर विवाद चलता रहा.हालाकि अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम है.हमसे कोई मांगेगा तो हम और ज़्यादा लिख देंगे.जनहित के कार्यों में अड़चन नहीं होनी चाहिए.
बाइट-मोहन यादव,मुख्यमंत्री,मध्यप्रदेश
कहा पहुँचा ERCP का काम-
ERCP में 9400 करोड के 3 पैकेज का काम शुरू हो गए है,जिसमें रामगढ़,नवनेरा,चंबल,महलपुर प्रोजेक्ट का काम होगा.कुछ दिनों में काम साइट पर काम दिखाई देने लगेगा.जल संसाधन विभाग की कोशिश होगी कि 2028 तक इन प्रोजेक्ट्स को पूरा किया जाए. राजस्थान में अब तक ईआरसीपी के 9600 करोड के वर्क आर्डर जारी किए जा चुके है,14676 करोड के टैंडर जारी किए जा चुके.
3.50 करोड से ज्यादा की आबादी को फायदा-
इस प्रोजेक्ट में 17 जिलों कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी.पूर्वी राजस्थान के 3.50 करोड़ लोगों को पीने का पानी मिल सकेगा.पूर्वी राजस्थान का भूजल स्तर सुधरेगा. राजस्थान में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा.इस प्रोजेक्ट में 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वजन कर सकती है ,जबकि 90 प्रतिशत केंद्र सरकार की हिस्सेदारी हो सकती है.हाल ही में राज्य ने केंद्र से माँग की है.
ERCP कैसे बनेगी जीवनदायिनी-
पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को लाभ मिलेगा. इस परियोजना से राज्य को कुल 4102.60 एमसीएम जल उपलब्ध हो सकेगा. इसमें से कुल 4 लाख 3 हजार हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा. इनमें 2 लाख 21 हजार हेक्टेयर नवीन सिंचाई क्षेत्र, 1 लाख 52 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का पुनर्स्थापन और 30 हजार हेक्टेयर रिसाईकल वाटर से सिंचाई हो सकेगी.
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