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उदयपुर फाइल्स पर एसीबी की जांच: जल जीवन मिशन घोटाले में बड़े खुलासे की आशंका
ACAshish Chauhan
Feb 22, 2026 08:18:21
Jaipur, Rajasthan
जल जीवन मिशन घोटाले में उदयपुर फाइल्स की एसीबी कर सकती है जांच,70 फीसदी तक फर्जी पेमेंट हुआ था फर्मों को आशीष चौहान, जयपुर-जल जीवन मिशन में उदयपुर में हुए घोटालों की एसीबी जांच कर सकती है। पीएचईडी के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को होटल ताज से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद अब एसीबी की नजर उदयपुर पर है। जल जीवन मिशन घोटाले का कनेक्शन उदयपुर से जुड़ा है। माना जा रहा है कि अब एसआईटी उदयपुर घोटाले में भी जल्द फर्म मालिकों और अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है। जल जीवन मिशन घोटाले में 10 गिरफ्तारियों के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उदयपुर पर टिकी है। जेजेएम भ्रष्टाचार में जांच टीमें उदयपुर फाइल्स की तफ्तीश कर सकती हैं। पीएचईडी चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के होटल ताज से गिरफ्तार किया गया था। अब एसीबी होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल सकती है। दिनेश गोयल के लिए गाड़ी और होटल किसने बुक करवाया, कौन कौन लोग मिले, इसकी एसीबी जांच करेगी। दिनेश गोयल के पास उदयपुर चीफ इंजीनियर का चार्ज था। गोयल के दफ्तर से जानकारी मिली है कि वे सरकारी टूर के लिए उदयपुर गए थे, इसलिए उनके लिए उदयपुर सर्किट हाउस बुक हुआ था। लेकिन वे सर्किट हाउस में ना रूककर होटल ताज में रुके थे। अब जांच एजेंसी ये भी तफ्तीश कर सकती है कि क्या होटल और गाड़ी किसी फर्म के मालिक ने बुक करवाई थी? जल जीवन मिशन में इस तरह हुआ महाघोटाला- मौके पर पाइपलाइन डालने का काम नहीं हुआ और माप पुस्तिका में फर्जी एंट्री कर ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। गांव में प्लास्टिक की पाइप लाइन डाली गई, लेकिन बिलों में महंगे डक्टाइल आयरन बताकर ठेकेदार को चार गुणा ज्यादा पेमेंट हुआ। फोटोकॉपी बिलों पर ही करोड़ों रुपए का पेमेंट। टीपीआईए की आपत्तियों के बावजूद ठेकेदारों को पेमेंट। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर ही टेंडर के वर्क ऑर्डर दिए। Drawing-design के मुताबिक काम नहीं। विभाग के अफसरों के मुताबिक उदयपुर और बाँसवाड़ा जल जीवन मिशन में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ। थर्ड पार्टी एजेंसी की जांच के बिना ही फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के मुताबिक वित्त विभाग की अनुमति के ही मूल्य वृद्धि की राशि देय है, लेकिन उदयपुर में बिना परमिशन के कंपनियों को पेमेंट कर दिया। वहीं फर्मों को करोड़ों की जीएसटी का भी संदिग्ध भुगतान हुआ। विभाग द्वारा 100 KL टंकी के डिजाइन में कम से कम 10 क्विंटल लोहा लगता है, जबकि संवेदक और अफसरों ने बाहर से ड्राइंग डिजाइन करवाई, जिसमें करीब 6-7 क्विंटल लोहा लगा। यानी हर टंकी पर सरकार को करीब 3-5 लाख का नुकसान हुआ। जानकारों का कहना है कि 70 से अधिक टंकियों का निर्माण हुआ था। इस हिसाब से विभाग को करोड़ों की चपत लगी. 70 प्रतिशत तक फर्जी भुगतान कर दिया गया। जलदाय विभाग की जांच रिपोर्ट में भी सामने आया था कि फोटोकॉपी से फर्मों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। नियमों के अनुसार नलकूप के पूर्ण निर्माण के बाद ही 90 प्रतिशत भुगतान का प्रावधान है, लेकिन फर्मों का बिना काम पूरा हुए 70 प्रतिशत तक फर्जी भुगतान कर दिया गया। वहीं बिना वर्क आर्डर नंबर अंकित किए करोड़ों के पाइप खरीद लिए। दोनों जिलों में कई जगहों पर ड्राइंग-डिजाइन के मुताबिक भी काम नहीं हुआ.
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