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झारखंड के आदर्श गांव में शराबबंदी से बदला जीवन, खेती और शिक्षा में उन्नति
KCKumar Chandan
Jan 30, 2026 15:46:20
Ranchi, Jharkhand
झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 30-35 किमी की दूरी पर ओरमांझी ब्लॉक में आदर्श गांव है, गांव नशा मुक्ति, जल संरक्षण, और आत्मनिर्भरता के लिए जाना जाता है. ग्रामीणों ने श्रमदान के दम पर शराबबंदी, जंगल की रक्षा, जैविक खेती, और पशुपालन को अपनाया है. इस गांव में गांव के लोगों ने ही पूरी तरह से नशा मुक्ति को अपनाया है. नशा मुक्ति में यहां की महिलाओं ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया , जिसके कारण गांव पूरी तरह से नशा मुक्त हुआ.
राजधानी रांची से लगभग 45 से 50 किलो मीटर की दूरी पर अवस्थित आरा केरम गांव ... गांव में प्रवेश करते ही आपको गांव की तस्वीर समझ में आ जाएगा... पहाड़ की गोद में बसे इस गांव में कभी लोग जीवन यापन के लिए संघर्ष करते थे, जंगल से लकड़ी काट कर लाते थे और उसी को बेच कर किसी तरह जीवन का गुजारा होता था. आज गांव की तस्वीर बदली हुई है , गांव खुशहाल है , आरा केरम का कोई भी व्यक्ति काम और रोजगार की तलाश में पलायन नहीं करता।
इस गांव में पूरी तरह से नशा बैन है। गांव के बाहर ही बोर्ड लगा है जिस पर स्पष्ट लिखा है ... इस गांव में श्रमदान अनिवार्य है
नशा बंदी है
लोटा बंदी है यानि खुले में शौच मुक्त गांव है
चराई बंदी है यानि गांव में खुले में जानवर चराई के लिए नहीं छोड़ सकते हैं
कुल्हाड़ी बंदी है यानि बेवजह पेड़ नहीं काट सकते
साथ ही नशा बंदी का पालन नहीं करने पर गांव में जुर्माना का प्रावधान है।
इस गांव में लोग के जीवन यापन के मुख्य जरिया खेती है और गांव के लोग आधुनिक तरीके से खेती करते हैं। इस गांव में बच्चों के पढ़ाई के लिए भी ग्राम सभा ने हॉस्टल का इंतजाम किया है, जहां 50 से 60 बच्चे रह कर पढ़ाई करते हैं, इस हॉस्टल में शिक्षकों की भी व्यवस्था है , जो बच्चों को पढ़ाते हैं. गांव में जो स्कूल है उसमें सरकार की तरफ से शिक्षक तो नियुक्त हैं ही , अलग से भी इस स्कूल को लिए 4 प्राइवेट शिक्षकों का इंतजाम ग्राम सभा ने किया है । इन शिक्षकों को भुगतान भी ग्राम सभा की तरफ से किया जाता है.
गांव के ही बाबू राम गोप बताते हैं , आरा केरम गांव की स्थिति 2016 से पहले बहुत खराब था, पहाड़ की तराई में गांव बसा है और जंगल की लकड़ी पर ही जीवन यापन निर्भर था । तब गांव के लोगों ने वन पर्यावरण के लिए एक समिति बनाया था जो जंगल की निगरानी करता था। फिर 2016 में गांव के लोगों ने ग्राम सभा को मजबूत कर गांव के नियम में बदलाव किया। पहले गांव के लोग किसी भी त्यौहार में एक महीने तक लगे रहते थे और उस दौरान नशा पान भी खूब करते थे , तब गांव वालों ने तय किया एक ही दिन पर्व मनाया जाएगा और अब गांव को नशा मुक्त कर दिया गया है, नशा बंदी से गांव में विकास हुआ है । नशा से निगेटिव सोच आता था और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ भी नहीं सोचते थे। इसके साथ ही श्रम दान, लोटा बंदी , हर व्यक्ति शौचालय में ही शौच जाते हैं। चराई बंदी है, गांव में पानी की व्यवस्था किया गया इसके लिए पहाड़ से निकलने वाले पानी को गांव तक लाया , जल संचयन का इंतजाम किया। जगह जगह वर्ष जल पानी को भी रोकने का काम किया जिससे जल स्तर अच्छा हुआ और अब गांव के लोग एक फसल की जगह तीन फसल की बुआई करते हैं।इससे गांव के लोग आत्मनिर्भर बन रहे गांव संवर्धि की तरफ जा रहा, बाहर भी लोग काम के लिए नहीं जाते हैं। गांव के लोग नशा बंदी के बाद स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी ध्यान दे रहे हैं.
गांव के ही रामदास महतो बताते हैं अब गांव ने कोई नशा पान नहीं कर रहा उसका फर्क दिखता है, गांव में लोग अपने बाल बच्चों के पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं , रहन सहन बदला है। गांव भी खुशहाल है। यहाँ के बच्चे जो पढ़ाई से पिछड़ गए वो अब खेती बड़ी में ध्यान दे रहे हैं। रामदास महतो बताते हैं वो 10 एकड़ में खेती करते हैं और एक एकड़ में कम से कम तीन से चार लाख आता है , अगर मौसम साथ दिया उचित कीमत मिला तो एक एकड़ में पांच लाख तक भी आता है।
गांव के कन्हैया खरवाड़ बताते हैं , खेती करते हैं डेढ़ एकड़ में खेती करते हैं और उससे अच्छा जीवन यापन चलता है, कहीं बाहर जाने से अच्छा है। गांव में कोई नशा नहीं करता है अगर कोई नियम का पालन नहीं करता है तो जुर्माना का प्रावधान है।
गांव के ग्राम प्रधान भी बताते हैं हमारा गांव दूसरे गांव से बहुत आगे निकल चुका है और ये गांव सरकार को भी दिशा निर्देश देते हैं। साप्ताहिक ग्राम सभा इस गांव में होता है और हर काम का निर्णय ग्राम सभा में ही होता है। ग्राम सभा की सात समिति है सब की जिम्मेदारी है।
गांव की तारा मुनि मुंडा बताती है इस गांव में कहीं हड़िया दारू नहीं बनता है और गांव के लोग शराब नहीं पीते हैं। शराब पीने वाले को डांट मिलता है। पुरुष पी कर आने पर घर में झगड़ा करता था अब शराब बंदी है। सब चाहता है बंदी रहे, इससे गांव का विकास भी हो रहा है.
गांव की ही जयंती देवी बताती हैं इस गांव में कोई पीटा खाता नहीं है, यह गांव नशा मुक्त है, इस गांव में कहीं बनता भी नहीं है।
गांव के रामलखन पाहन बताते हैं पहले बाहर काम करने जाते थे अब गांव में ही काम मिलता है यहीं रहते हैं , खेती करते हैं।
रंजीत बेदिया भी बताते हैं गांव में ही काम करते हैं यहां श्रमदान लोग करते हैं, पहाड़ के पानी को रोक कर सिंचाई के लिए लाते हैं, खेती में इस्तेमाल करना है।
अर्जुन खरवार बताते हैं गांव में इतनी खेती होती है बाहर जाने का जरुरत नहीं पड़ता है। गांव के लिए कई नियम बने हैं सब को पालन करना होता है।
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