Back
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने खेल सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर कड़ी टिप्पणी
VRVIJAY RANA
Feb 23, 2026 02:33:58
Chandigarh, Chandigarh
उभरते खिलाड़ी की मौत पर जस्टिस ललित बत्रा की कड़ी टिप्पणी, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
चंडीगढ़-22 फरवरी 2026- हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने गांव लाखन माजरा, रोहतक स्थित स्पोर्ट्स नर्सरी में बास्केटबॉल पोल गिरने की घटना, जिसमें एक उभरते हुए राष्ट्रीय स्तर के नाबालिग खिलाड़ी हार्दिक की मृत्यु हुई, को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है तथ्यों के आधार पर यह घटना प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है, विशेष रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन, सुरक्षा एवं गरिमा के अधिकार का।
आयोग द्वारा दिनांक 18.12.2025 को दिए गए आदेश की अनुपालन में उपायुक्त, रोहतक द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में घटना के वास्तविक कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन तथा शोक संतप्त परिवार को मुआवजा प्रदान किए जाने के संबंध में कोई ठोस विवरण उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट में केवल बास्केटबॉल स्टेडियम निर्माण हेतु MPLADS पोर्टल से ₹17,80,294/- की राशि स्वीकृत किए जाने का उल्लेख है।आयोग ने यह भी पाया कि दिनांक 26.11.2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी, किंतु उसकी विस्तृत रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। साथ ही, खेल उपकरणों एवं अवसंरचना की सुरक्षा जांच, नियमित निरीक्षण, संरचनात्मक स्थिरता परीक्षण तथा मुआवजा प्रदान करने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के संबंध में भी कोई स्पष्ट व्यवस्था परिलक्षित नहीं होती।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा के नवीनतम आदेश में कहा है कि हरियाणा राज्य खेलों के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और राज्य सरकार द्वारा खेल अवसंरचना के विकास पर पर्याप्त सार्वजनिक धन व्यय किया गया है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक धन से निर्मित खेल सुविधाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल खेल प्रोत्साहन के उद्देश्य को विफल करती है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के जीवन एवं गरिमा को भी संकट में डालती है।
आयोग का मत है कि यदि बास्केटबॉल पोल जंग लगा हुआ एवं खतरनाक स्थिति में था तथा बार-बार चेतावनियों के बावजूद उसकी मरम्मत या प्रतिस्थापन नहीं किया गया, तो यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं वैधानिक कर्तव्य में गंभीर चूक को दर्शाता है। राज्य तंत्र की इस प्रकार की निष्क्रियता, जिसके परिणामस्वरूप एक युवा जीवन की क्षति हुई, राज्य के संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन है।
उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने व्यापक जनहित में निम्न महत्वपूर्ण निर्देश एवं अनुशंसाएँ जारी की हैं—
प्रधान सचिव, हरियाणा सरकार, खेल विभाग, चंडीगढ़ को निर्देशित किया गया है कि वे एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन करें।
समिति घटना के वास्तविक कारणों का निर्धारण कर संबंधित अधिकारियों/अभियंताओं/ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करेगी।
यह भी जांच की जाएगी कि स्वीकृत डिजाइन, गुणवत्ता मानकों एवं रखरखाव प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
राज्य की सभी स्पोर्ट्स नर्सरियों एवं सरकारी खेल सुविधाओं का संरचनात्मक स्थिरता एवं सुरक्षा अनुपालन के संबंध में राज्यव्यापी ऑडिट कराया जाएगा।
नियमित निरीक्षण, तृतीय-पक्ष संरचनात्मक प्रमाणन एवं रखरखाव हेतु एक समान तंत्र विकसित करने की अनुशंसा की गई है।
मृतक खिलाड़ी के family को क्षति की गंभीरता एवं भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त मुआवजा प्रदान करने की सिफारिश की गई है।
राज्य संचालित या वित्तपोषित खेल सुविधाओं में मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में त्वरित अंतरिम राहत एवं अंतिम मुआवजा प्रदान करने हेतु एक संरचित एवं समयबद्ध SOP तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
उच्च स्तरीय समिति में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (अध्यक्ष), महानिदेशक खेल एवं युवा मामले विभाग, वरिष्ठ संरचनात्मक अभियंता तथा एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी/अर्जुन पुरस्कार विजेता को सदस्य के रूप में शामिल करने की अनुशंसा की गई है।
अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक खेल अवसंरचना की सुरक्षा, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा बच्चों एवं खिलाड़ियों के जीवन के अधिकार से संबंधित व्यापक जनहित का प्रश्न है। आयोग ने कहा है कि राज्य प्राधिकरणों की तंत्रगत विफलता, प्रशासनिक लापरवाही एवं कर्तव्य में चूक को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने आशा व्यक्त की है कि संबंधित विभाग त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई कर न केवल दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस एवं स्थायी व्यवस्था भी स्थापित करेंगे।
सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि प्रधान सचिव, खेल विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे जांच समिति की रिपोर्ट अगली निर्धारित सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, महानिदेशक, खेल एवं युवा मामले विभाग, हरियाणा, पंचकूला को भी लंबित विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र आयोग को Prेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध तथ्यों एवं आरोपों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए, इस प्रकरण की अगली सुनवाई पूर्ण आयोग के समक्ष दिनांक 19.05.2026 को निर्धारित की गई है।
0
Report
हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|
Advertisement
SBSantosh Bhagat
FollowFeb 23, 2026 03:47:190
Report
CRCHANDAN RAI
FollowFeb 23, 2026 03:46:490
Report
PCPranay Chakraborty
FollowFeb 23, 2026 03:46:200
Report
PCPranay Chakraborty
FollowFeb 23, 2026 03:45:540
Report
0
Report
NJNEENA JAIN
FollowFeb 23, 2026 03:37:080
Report
KKKamal Kumar
FollowFeb 23, 2026 03:36:520
Report
HSHITESH SHARMA
FollowFeb 23, 2026 03:36:260
Report
ASAJEET SINGH
FollowFeb 23, 2026 03:35:450
Report
MSManish Sharma
FollowFeb 23, 2026 03:35:110
Report
0
Report
ASAshok Singh Shekhawat
FollowFeb 23, 2026 03:34:550
Report
ASAkhilesh Sharma
FollowFeb 23, 2026 03:34:350
Report
ASAkhilesh Sharma
FollowFeb 23, 2026 03:34:230
Report
ASAkhilesh Sharma
FollowFeb 23, 2026 03:34:060
Report