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बिहार बजट 2026-27: 3.47 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बड़ा बजट
RZRajnish zee
Feb 03, 2026 14:04:45
Patna, Bihar
पटना
सरकार के निश्चयों को उड़ान देने वाला बजट
- विधानमंडल में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पेश किया 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट
- चालू वित्तीय वर्ष में राज्य की विकास दर आंकी गई 14.9 प्रतिशत
- राज्य सरकार ने अपने बजट में सात निश्चय-3 में उल्लेख किए तथ्यों को अमल में लाने के लिए खास वित्तीय प्रावधान
विधानमंडल में मंगलवार (3 फरवरी) को वित्तीय वर्ष 2026-27 का राज्य का बजट पेश किया गया। सूबे में नवगठित एनडीए सरकार का यह पहला बजट था, जिसे वित्त मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पेश किया। उन्होंने विधानसभा में भोजनावकाश के बाद शुरू हुई दूसरी पाली की कार्यवाही के दौरान नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। यह बजट आकार राज्य में अब तक पेश किए गए पिछले सभी वित्तीय वर्षों के बजट आकार में सबसे बड़ा बजट है। यह राज्य की तेज़ी से मजबूत होती आर्थिक समृद्धि और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की तरफ साफतौर पर इशारा करता है।
यह बजट आकार चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट 3 लाख 16 हजार 895 करोड़ रुपये से करीब 30 हजार 694 करोड़ रुपये अधिक का है। पिछले बजट से करीब 9 प्रतिशत अधिक का बजट इस बार सदन पटल पर प्रस्तुत किया गया है। नए बजट में 1 लाख 22 हजार 155 करोड़ रुपये स्कीम व्यय के तौर पर यानी योजना मद के लिए प्रावधान किया गया है। वहीं, 2 लाख 25 हजार 434 करोड़ रुपये का प्रावधान स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय यानी गैर-योजना मद में किया गया है। इस बजट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने की परिकल्पना को समृद्ध करने के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। सात ही सात निश्चय-3 में उल्लेखित तमाम तथ्यों को उड़ाने के लिए खास फोकस किया गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, बिहार की वार्षिक वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2023-24 में 8.64 आंकी गई है। देशभर के दूसरे राज्यों की तुलना में यह वृद्धि दर तीसरे स्थान पर है। सबसे ज्यादा तमिलनाडु की आर्थिक वृद्धि दर 11.19 और दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश की दर 8.99 आंकी गई है।
विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि राज्य तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 14.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से बिहार को मिल रही सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच का लक्ष्य समावेशी विकास हासिल करना है।
वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि राजकोषीय घाटा लगभग 39,400 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 2.99 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। केंद्रीय बजट में बिहार को कई महत्वपूर्ण सौगातें मिलीं, जिनमें नए हवाई अड्डे, मखाना बोर्ड और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है। सरकार का लक्ष्य राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे ईमान, ज्ञान, विज्ञान, अरमान और सम्मान जैसे पांच तत्वों के प्रतीक हैं। इन्हीं मूल्यों के आधार पर ‘विकसित बिहार’ की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है, जहां न्याय के साथ विकास और समावेशी प्रगति सुनिश्चित हो सके।
वित्त मंत्री ने महिला सशक्तीकरण पर सरकार के स्तर से विशेष जोर देने की बात कही। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना इसका ताजा उदाहरण है, जिसे नवंबर 2025 में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया गया था। इस योजना के तहत अब तक 1.56 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहायता दी गई है। जिन महिलाओं ने इस राशि का उपयोग स्वरोजगार या व्यवसाय शुरू करने में किया है, उन्हें इससे आगे बढ़कर दो लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि भी दी जाएगी।
budget में उल्लेखित वार्षिक योजना परिव्यय लगभग 1.22 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें ग्रामीण विकास विभाग को सर्वाधिक 18.33 प्रतिशत का हिस्सा दिया गया है। इसके बाद शिक्षा को 15.02 प्रतिशत, स्वास्थ्य को 8.21 प्रतिशत, शहरी विकास एवं आवास को 7.77 प्रतिशत, ग्रामीण कार्य को 7.29 प्रतिशत और सामाजिक कल्याण को 6.86 प्रतिशत आवंटित किए गए हैं।
अनुसूचित जाति विशेष घटक योजना के लिए 19 हजार 603 करोड़ रुपये और जनजातीय उप-योजना के लिए 1 हजार 648 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन राशियों को माइनर हेड के तहत चिह्नित किया गया है, ताकि इनका उपयोग केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण पर ही हो सके। किसी परिस्थिति में इन राशियों को दूसरे मद में ट्रांसफर नहीं की सके। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के सामाजिक कल्याण के लिए 13 हजार 202 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
budget में राज्य की वित्तीय स्थिति को भी संतोषजनक बताया गया है। इसके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राजस्व घाटा जीएसडीपी का सिर्फ 0.04 प्रतिशत रहा। हालांकि राजकोषीय घाटा 4.16 प्रतिशत रहा, जो निर्धारित मानक 3.0 प्रतिशत की सीमा से थोड़ा अधिक है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए औद्योगिक विकास को गति देने और करीब 5 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश को आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य की अपनी राजस्व प्राप्ति 75 हजार 202 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जिसमें कर राजस्व का हिस्सा 65 हजार 800 करोड़ रुपये होगा। जबकि, गैर-कर राजस्व से 9 हजार 402 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना है।
राज्य के कर राजस्व के विभिन्न स्रोतों चार प्रमुख माध्यमों कुल 65 हजार 800 करोड़ रुपये प्राप्ति का अनुमान है। इसमें वाणिज्य कर से सर्वाधिक 50 हजार करोड़ रुपये, स्टांप एवं निबंधन शुल्क से 10 हजार करोड़ रुपये, परिवहन कर के तौर पर 5 हजार करोड़ रुपये और भू-राजस्व मद से 800 करोड़ रुपये प्राप्त होने का आंकलन है।
अगर सरकार के प्रमुख व्यय पर नजर डालें, तो सभी स्तर के कर्मियों पर सर्वाधिक वेतन मद में 96 हजार 128 करोड़ रुपये व्यय का अनुमान है। पेंशन मद में 35 हजार 170 करोड़ रुपये, ब्याज भुगतान पर 25 हजार 363 करोड़ रुपये और लोक ऋण अदायगी मद में 22 हजार 664 करोड़ रुपये व्यय का प्रावधान किया गया है। वेतन और पेंशन मद में सर्वाधिक खर्च के कारण ही राज्य का स्थापना एवं प्रतिवद्ध व्यय यानी गैर-योजना का आकार स्कीम व्यय से अधिक हो गया है।
इन विभागों को मिली बजट में बड़ी हिस्सेदारी
नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के कुल बजट आकार 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट में कुछ विभागों को सर्वाधिक तरजीह दी गई है। स्कीम व्यय तथा स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय को सम्मिलित रूप से सर्वाधिक राशि शिक्षा महकमा के लिए निर्धारित करते हुए कुल 60 हजार 204 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का 17.32 प्रतिशत है। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के लिए 23 हजार 701 करोड़ रुपये (6.82 प्रतिशत), स्वास्थ्य को 21 हजार 270 (6.12 प्रतिशत), गृह के लिए 20 हजार 132 करोड़ रुपये (5.79 प्रतिशत), ऊर्जा के लिए 18 हजार 737 करोड़ रुपये (5.39 प्रतिशत), नगर विकास एवं आवास विभाग के लिए 15 हजार 237 (4.38 प्रतिशत) रुपये और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 11 हजार 312 करोड़ रुपये (3.25 प्रतिशत) का निर्धारण किया गया है。
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