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नवरात्र सप्तम दिन कालीखोह में माँ कालरात्रि की आराधना से भक्त प्रसन्न
RMRAJESH MISHRA
Mar 24, 2026 23:46:29
Danti, Uttar Pradesh
नवर Travers? Wait. Sorry. Here's the cleaned content.
नवरात्र के सप्तम दिन मिर्जापुर के विंध्य पर्वत क्षेत्र के स्थित कालीखोह धाम में सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने माँ कालरात्रि के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की। मान्यता है कि इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है और माँ की कृपा से उसे विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। माँ कालरात्रि गर्दभ (गधे) पर सवार, चार भुजाओं वाली हैं। दाहिनी भुजाओं से वे वरदान और अभय प्रदान करती हैं, जबकि बाईं भुजाओं में तलवार और खड्ग धारण करती हैं। उनका यह रूप असुरों के संहार के लिए भयावह है, वहीं भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि माँ का दर्शन और पूजन करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नवरात्र में माँ शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विंध्य पर्वत के त्रिकोण पथ पर विराजमान माँ कालरात्रि असुरों के संहार के लिए प्रकट हुई थीं। पौराणिक कथा के अनुसार, मधु-कैटभ नामक असुरों से रक्षा के लिए भगवान विष्णु को जगाने हेतु ब्रह्मा जी ने माँ की स्तुति की थी, जिससे माँ कालरात्रि प्रकट हुईं। इन्हें महामाया और भगवान विष्णु की योगनिद्रा भी कहा जाता है। माँ का स्वरूप काजल के समान काला, बाल खुले हुए और आकाश में लहराते हैं। उनके तीन विशाल नेत्र भक्तों पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। इस दिन माँ को विशेष रूप से मधु, महुआ रस और गुड़ का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु माँ के दरबार में पहुंचकर उनके भव्य स्वरूप के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। विंध्य क्षेत्र में माँ कालरात्रि का विशेष महत्व है। दूर-दूर से आए भक्तों का कहना है कि माँ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और संकटों से रक्षा करती हैं। देवी का यह स्वरूप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। नवरात्र का सातवां दिन तांत्रिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सप्तमी की रात्रि में साधक विशेष विधि से माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन से देवी के द्वार भक्तों के लिए पूर्ण रूप से खुल जाते हैं और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा स्थलों पर पहुंचते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पूजा की शुरुआत कलश पूजन से कर नवग्रह, दशदिक्पाल और देवी-देवताओं की आराधना के बाद माँ कालरात्रि का ध्यान एवं पूजन किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से माँ अपने भक्तों को अभय, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
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