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नीलगंगा मार्ग से अतिक्रमण हटाकर सिंहस्थ की तैयारी तेज, पेड़ भी सुरक्षित स्थानांतरित

Ujjain, Madhya Pradesh:पेशवाई मार्ग को बनाया जा रहा सुगम, दो पीपल के पेड़ों को दूसरी जगह लगाया उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर नगर निगम ने नीलगंगा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। बुधवार को प्लेटफॉर्म नंबर 8 के सामने मुख्य मार्ग से करीब 8 से 10 अवैध अतिक्रमण और निर्माण हटाए गए। इस मार्ग पर कुछ मकानों, दुकानों और गैरेज के कारण आवागमन में परेशानी हो रही थी। निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर टीम ने जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाए। सिंहस्थ में इसी मार्ग से निकलेगी पेशवाई नीलगंगा तालाब से निकलने वाली साधु-संतों की पेशवाई इसी मार्ग से होकर गुजरती है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान रहे, इसके लिए मार्ग को व्यवस्थित किया जा रहा है। पेड़ों को भी बचाने की पहल कार्रवाई के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखते हुए दो पीपल के पेड़ों को उखाड़कर दूसरी जगह लगाया गया। इन पेड़ों को लोटी स्कूल परिसर में पुनः प्रत्यारोपित किया गया। कार्रवाई के दौरान निगम के जोनल अधिकारी मनोज राजवानी, कार्यपालन यंत्री दीपक शर्मा, भवन निरीक्षक योगिता तंवर और निगम की रिमूवल टीम मौजूद रही।
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मंडला के खुखसर में एशियन ओपनबिल विदाई की घड़ी, प्रवास का राज खुला

Mandla, Madhya Pradesh:आंधी-तूफान भी नहीं डिगा पाते घोंसले, अब मंडला से विदा होंगे एशियन ओपनबिल एंकर - मंडला के खुकसर गांव में हर साल बारिश के साथ पहुंचने वाले एशियन ओपनबिल पक्षी अब विदाई की तैयारी में हैं। ऊंचे पेड़ों पर बने इनके घोंसले तेज आंधी-तूफान में भी टिके रहते हैं। ग्रामीण इनके आगमन को बारिश से जोड़कर देखते हैं, जबकि इनके प्रवास का संबंध भोजन और प्रजनन से है। वीओ - खुकसर गांव में जून से अक्टूबर तक इन प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है। नदी, हरियाली और अनुकूल वातावरण इन्हें यहां आकर्षित करते हैं। पक्षी विशेषज्ञ राजीव मिश्रा वर्ष 2006 से इनके आगमन को करीब से देख रहे हैं। अब मौसम में बदलाव के साथ इनके लौटने का समय करीब है। इन पक्षियों का हर साल आना प्रकृति के अनूठे चक्र और पर्यावरण संरक्षण की अहमiyat को दर्शाता है। बाइट - राजीव मिश्रा - पक्षी विशेषज्ञ - मंडला
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पंजाब बंद का कोटकपुरा में असर: दुकानदारों ने चौराहे पर प्रदर्शन किया

KCKhem ChandJust now
Kot Kapura, Punjab:ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦਾ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ’ਚ ਅਸਰ , ਜੱਥੇਬੰਦੀਆਂ ਨੇ ਬੱਤੀਆਂ ਵਾਲਾ ਚੌਕ ਵਿਖੇ ਧਰਨਾ ਦੇ ਕੇ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਜਤਾਇਆ ਰੋਸ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਚ ਮਾਨਸਾ ਵਿਚੇ ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਝੋਟਾ ਦੇ ਕਤਲ ਮਾਮਲੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਐਕਸ਼ਨ ਕਮੇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੇ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦੇ ਸੱਦੇ ਦਾ ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਵਿੱਚ ਮਿਲਿਆ ਜੁਲੀਆ ਅਸਰ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਿਆ। ਸਵੇਰ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਦੁਕਾਨਾਂ ਬੰਦ ਹਨ ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਅਤੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨੇ ਬੱਤੀਆਂ ਵਾਲਾ ਚੌਕ ਵਿਖੇ ਸੜਕ ਜਾਮ ਕਰਕੇ ਧਰਨਾ ਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਰੋਸ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ。 ਧਰਨੇ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰ ਰਹੇ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਵਾਰਿਸ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਲਕਾ ਇੰਚਾਰਜ ਰਸ਼ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਸੋਸਣ ਸਮੇਤ ਹੋਰ ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਸੂਬਾ ਸਰਕਾਰ નਾਕाम ਸਾਬਤ ਹੋਈ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸੇ ਕਾਰਨ ਨਸ਼ਿਆਂ ਵਿਰੁੱਧ ਆਵਾਜ਼ ਬੁਲੰਦ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਝੋਟਾ ਵਰਗੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਜਾਨ ਗੁਆਉਣੀ ਪਈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਝੋਟਾ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਨੂੰ ਕਦੇ ਭੁਲਾਇਆ ਨਹੀਂ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੋਕ ਹੁਣ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਖ਼ਾਤਮੇ ਅਤੇ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਸਖ਼ਤ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਮੰਗ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸੜਕਾਂ ’ਤੇ ਉਤਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਨੂੰ ਸਫ਼ਲ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਹਿਯੋਗ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਦੁਕਾਨਦਾਰਾਂ, ਵਪਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਹਰ ਵਰਗ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕੀਤਾ。
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फिरोजपुर में बंद का असर: शहर-छावनी के बाजार और पेट्रोल पंप ठप्प

Firozpur, Punjab:फिरोजपुर में मानसा में दो दिन पहले परमिंदर सिंह चोटा की हत्या के विरोध में आज पंजाब बंद की कॉल का असर सीमावर्ती जिले फिरोजपुर में भी देखने को मिला। फिरोजपुर शहर और छावनी के अधिकतर बाजारों में दुकानें बंद रहीं। स्कूलों और कॉलेजों में भी छुट्टी रहने के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। जिले में पेट्रोल पंप भी बंद रखे गए थे। बंद के चलते आम लोगों को कई परेशानियाँ सामना करना पड़ीं। कुछ लोगों ने कहा कि अगर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचानी थी, तो मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों के घरों या दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया जा सकता था, ताकि आम जनता को परेशानी न हो। पेट्रोल पंप मालिकों ने भी बंद को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब बंद के समर्थन में फिरोजपुर में भी पेट्रोल पंप बंद रखे गए हैं और एहतियात के तौर पर ऐसी रणनीति अपनाई गई है। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के प्रबंध किए गए और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि शांति बनी रहे।
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फर्जी हस्ताक्षर से नक्शे पास, नगर परिषद राजस्व पर सवाल

Madanpur, Bihar:मधेपुरा नगर परिषद से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने नगर परिषद की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और राजस्व वसूली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के हस्ताक्षर का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर एक निजी इंजीनियर और उसके कर्मी मकानों के नक्शे पास कर दिए। इतना ही नहीं, नक्शा पास कराने के नाम पर लोगों से राशि वसूलने और उसकी रसीद काटने की भी बात सामने आई है। मामले की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद नगर परिषद प्रशासन ने सदर थाना में आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निजी स्तर पर फर्जी तरीके से नक्शे पास किए जा रहे थे, तो नगर परिषद की आधिकारिक व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह केवल निजी इंजीनियर और उसके कर्मियों तक सीमित मामला है, या फिर इस पूरे प्रकरण में नगर परिषद के अंदर की किसी व्यवस्था अथवा कर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? नगर परिषद के स्तर से सामने आई जानकारी के अनुसार, एक निजी इंजीनियर डेविड कुमार और उनके कमी रविरंजन कुमार पर कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी के हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर मकानों के नक्शे पास कराने का आरोप है। आरोप यह भी है कि नक्शा पास कराने के नाम पर संबंधित लोगों से राशि वसूल की जाती थी और रसीद भी काटी जाती थी। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल फर्जी हस्ताक्षर तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भवन नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और नगर परिषद के राजस्व की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजस्व वसूली है। आरोप है कि नक्शा पास कराने के नाम पर लोगों से पैसे लिए गए। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि कितने लोगों के नक्शे इस प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए, उनसे कितनी राशि वसूल की गई और वह पैसा नगर परिषद के सरकारी खाते में जमा हुआ या नहीं। फिलहाल लाखों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक राशि का पता विस्तृत जांच और वित्तीय अभिलेखों के मिलान के बाद ही चल सकेगा। नगर परिषद को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित तौर पर जारी रसीदें किस प्रकार की थीं, क्या वे आधिकारिक रसीद पुस्तिका से जुड़ी थीं और क्या संबंधित नक्शों का कोई रिकॉर्ड नगर परिषद के पास मौजूद है। यदि कोई निजी इंजीनियर लंबे समय तक नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर से नक्शे पास कराता रहा, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर संबंधित दस्तावेज़ों का सत्यापन किस स्तर पर होना चाहिए था और कथित गड़बड़ी समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आई। क्या नक्शा स्वीकृति से जुड़े अभिलेखों की नियमित जांच नहीं होती थी? क्या संबंधित नक्शों का आधिकारिक रजिस्टर से मिलान किया गया? क्या भवन निर्माण से जुड़े आवेदन और स्वीकृति आदेशों की जांच की गई? और क्या नगर परिषद के किसी कर्मचारी ने इन दस्तावेजों को देखा या सत्यापित किया था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर नगर परिषद के किसी कर्मचारी की संलिप्तता को प्रमाणित नहीं कहा जा सकता, लेकिन प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की जांच जरूरी है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद नगर परिषद की अन्य राजस्व वसूली प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर होल्डिंग टैक्स और अन्य नगरपालिका शुल्कों की वसूली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। हालांकि, अभी होल्डिंग टैक्स की राशि निजी हाथों में जाने या उसमें गड़बड़ी होने का कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं है। फिर भी, मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व अभिलेखों, रसीदों, बैंक खातों में जमा राशि और संबंधित लेन-देन का स्वतंत्र ऑडिट कराने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच कराई गई। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर सदर थाना में आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित तौर पर कितने नक्शे फर्जी तरीके से पास किए गए, कितने लोगों से पैसे लिए गए, सरकारी राजस्व को कितना नुकसान हुआ और इस पूरे मामले में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। अब इन सवालों के जवाब भी जरूरी है। - कितने मकानों के नक्शे कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर से पास किए गए? - नक्शा पास कराने के नाम पर कुल कितनी राशि वसूली गई? - क्या वसूली गई रकम नगर परिषद के सरकारी खाते में जमा हुई? - कथित रसीदें किसने जारी कीं और उनका सत्यापन क्यों नहीं हुआ? - क्या नगर परिषद के किसी कर्मचारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है? - क्या होल्डिंग टैक्स और अन्य राजस्व अभिलेखों का भी ऑडिट कराया जाएगा? - जिन लोगों के मकानों के नक्शे कथित रूप से फर्जी तरीके से पास हुए, उनके खिलाफ और उनके हितों की सुरक्षा के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा? फिलहाल इस मामले में नगर परिषद प्रशासन ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि जांच केवल निजी इंजीनियर और उसके कर्मियों तक सीमित रहती है या फिर नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया, राजस्व वसूली और विभागीय निगरानी व्यवस्था की भी जांच होती है। मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों की जवाबदेही तय होना और सरकारी राजस्व का वास्तविक हिसाब सामने आना बेहद जरूरी है。
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बोधगया में नवरात्रि से पहले पूजा पंडालों में अग्नि सुरक्षा कड़ी, 22 जगहों की जांच

Gaya, Bihar:बोधगया में अग्निशमन विभाग अलर्ट, 22 पूजा पंडालों को दिया गया अग्निशमन के द्वारा दिशा निर्देश। नवरात्र के शुभ अवसर पर पूजा पंडालों में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अग्निशमन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पूजा पंडालों से लेकर होटलों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है। विभाग की टीम अब तक 22 पूजा स्थलों का निरीक्षण कर चुकी है। इस दौरान पूजा समितियों को अग्नि सुरक्षा के सभी मानकों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। अग्निशमन विभाग के अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पूजा पंडालों में आग से बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। पंडालों में बिजली के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले तारों का इस्तेमाल करने और जरूरी सुरक्षा उपकरण रखने को कहा गया है। जनरेटर को पंडाल से कम से कम 20 फीट की दूरी पर रखने के साथ अग्निशमन यंत्र, पानी और बालू की व्यवस्था अनिवार्य रूप से रखने का निर्देश दिया गया है। बिजली के मुख्य कनेक्शन के पास सीओ₂ अग्निशमन यंत्र रखने की भी सलाह दी गई है। बोधगया में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक, अब तक करीब 210 प्रतिष्ठानों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट पूरा कर प्रमाणपत्र जारी किया जा चुका है। शेष प्रतिष्ठानों में भी जांच और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की प्रक्रिया जारी है। अग्निशमन विभाग ने पूजा समितियों और आम लोगों से अपील की है कि पंडालों में दीपक और अगरबत्ती जलाते समय ज्वलनशील वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। हवन निर्धारित सुरक्षित स्थान पर ही करें और बिजली के तारों तथा जनरेटर के आसपास विशेष सावधानी बरतें। पटाखे छोड़ते समय बच्चों को अकेला न छोड़ें। विभाग का कहना है कि त्योहारों के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों के साथ आम लोगों की सतर्कता और पूजा समितियों की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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जलपाइगुड़ी के पाटकाटा कॉलोनी में चारधाम थीम दुर्गा पूजा का खास आकर्षण

Jalpaiguri, West Bengal:পুজোর আনন্দে মেতে উঠেছে জলপাইগুড়ি। শহর থেকে শহরতলি, সর্বত্রই উৎসবের আমেজ। এবার চারধামের আদলে সেজে উঠেছে জলপাইগুড়ির পাতকাটা কলোনি কালচারাল ক্লাব ও পাঠাগারের দুর্গাপুজো মণ্ডপ। ধর্মীয় ভাবাবেগ ও শিল্পকলার মেলবন্ধনে দর্শনার্থীদের নজর কাড়তে প্রস্তুত এই পুজো মণ্ডপ। চতুর্থীর সন্ধ্যায় এই পুজোর আনুষ্ঠানিক উদ্বোধন করেন জলপাইগুড়ির সাংসদ ডঃ জয়ন্ত কুমার রায়। উপস্থিত ছিলেন রাজগঞ্জের বিধায়ক-সহ প্রশাসনিক ও পুলিশ আধিকারিকরা। উদ্বোধনের পর থেকেই সাধারণ দর্শনার্থীদের জন্য খুলে দেওয়া হয়েছে মণ্ডপের দরজা। পুজোর দিনগুলিতে চারধামের আদলে তৈরি এই মণ্ডপ দেখতে জলপাইগুড়ি শহর ও আশপাশের এলাকা থেকে বহু মানুষের সমাগম হবে বলে আশাবাদী পুজো উদ্যোক্তারা। সব মিলিয়ে এবারের দুর্গোৎসবে জলপাইগুড়ির অন্যতম আকর্ষণ হয়ে উঠতে চলেছে পাতকাটা কলোনি কালচারাল ক্লাব ও পাঠাগারের চারধাম থিমের পুজো মণ্ডপ। রিপোর্ট :- প্রদ্যুৎ দাস ( জলপাইগুড়ি )
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MBBS सीटें शुरू, 2027–28 से 100 सीटों की स्वीकृति के साथ उधम सिंह नगर के मेडिकल कॉलेज में

Bahara Boj, Uttarakhand:स्लग – एमबीबीएस पढ़ाई अगले सत्र से स्थान– उधम सिंह नगर ऐंकर– रुद्रपुर के मेडिकल कॉलेज में अगले साल से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग ने एमबीबीएस की 100 सीटों के लिए हरी झंडी दे दी है。 रुद्रपुर के मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने के प्रयास किए जा रहे थे लेकिन हर बार तकनीकी कमी के कारण भारत सरकार से अनुमति नहीं मिल पाती थी। कॉलेज प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 से 100 सीटों के लिए आवेदन किया था जिसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी उसके बाद कालेज प्रशासन ने अपील की और दूसरी अपील पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2027–28 से एमबीबीएस की 100 सीटों के संचालन की अनुमति प्रदान कर दी। मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में 41 फैकल्टी उपलब्ध है। इधर रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों के संचालन की अनुमति मिलने के बाद स्थानीय युवकों को अपने क्षेत्र में ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा。
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