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PPINEWZ8 May 2025, 05:25 pm

Sikar -खाटूधाम में श्रद्धालुओं का उमड़ता सैलाब, बाबा श्याम के दर्शन का अद्भुत अनुभव

Sikar, Rajasthan:

सीकर जिले के खाटूधाम में बाबा श्याम का दो दिवसीय मासिक मेले में श्याम श्रद्धालुओं का सेलाब उमड़ पड़ा। शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी को आयोजित होने वाले इस मेले में देश के कोने-कोने से मोहनी एकादशी पर श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए पहुंचे।बाबा की चौखट पर शीश नवाकर अपने परिवार व्यापार के लिये मन्नत मांगी।श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। बाबा श्याम का श्रृंगार इस बार सफेद फूलों के साथ सतरंगी फूलों से अत्यंत मनोहारी ढंग से किया गया जिसने भक्तों का मन मोह लिया।मेले में सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हाई अलर्ट को देखते हुए पुलिस, आरएसी, होमगार्ड्स और निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।श्रद्धालु बाबा श्याम के जयकारों के साथ दर्शन कर रहे हैं और भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं। वहीं कस्बे में संचालित धर्मशालाओं में भजन संध्या और भंडारे जैसी धार्मिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जा रहा है।

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कवर्धा में दिनदहाड़े मारपीट व कथित अपहरण CCTV में कैद

Kawardha, Chhattisgarh:शहर के पुराने बस स्टStand के पास दिनदहाड़े मारपीट और कथित अपहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूरी वारदात दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है। आरोप है कि कुछ लोग दुकान में घुसे, चंद्रशेखर चंद्रवंशी के साथ मारपीट की और उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर ग्राम सैगोना स्थित एक फार्महाउस ले गए। वहां भी गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का आरोप है। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई और सैगोना स्थित फार्महाउस पहुंचकर चंद्रशेखर चंद्रवंशी को आरोपियों के चंगुल से सकुशल मुक्त कराया। इसके बाद पीड़ित को थाने लाया गया, जहां उन्होंने अपने परिजनों के साथ पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, विष्णु चंद्रवंशी और शशिकांत चंद्रवंशी के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते विष्णु चंद्रवंशी अपने साथियों के साथ दुकान पहुंचा और शशिकांत चंद्रवंशी के बड़े भाई चंद्रशेखर चंद्रवंशी के साथ मारपीट करने के बाद उनका कथित अपहरण करने का लगा आरोप। फिलहाल पुलिस ने विष्णु चंद्रवंशी सहित पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पूरा मामला सिटी कोतवाली थाना, कवर्धा क्षेत्र का है। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।
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गोपालगंज दौरे में बिहार शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्थानांतरण नीति स्पष्ट की

Gopalganj, Bihar:सूबे के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी एक दिवसीय दौरे पर गोपालगंज पहुँचे जहाँ उन्होंने सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में पूजा अर्चना की वही सर्किट हाउस में पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की मंत्री मिथिलेश तिवारी ने टीआरई 4 को लेकर बताया कि जल्द ही इसकी अधियाचना बीपीएससी को भेजी जायेगी वही शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर मंत्री ने कहा कि शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर प्रक्रिया 10 जुलाई से शुरू हो गया है कई प्रक्रिया पार करना है उसी का नेशनाइलेजेसन का काम चल रहा है एक सप्ताह शिक्षकों को मौका मिलेगा ई शिक्षा पोर्टल पर शिक्षक आवेदन करेंगे उसके बाद उनका स्थानांतरण किया जायेगा स्थानांतरण नीति पारदर्शी व सुगम बनाया गया है व लोकोपयोगी बनाया गया है बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बनाया गया है प्रक्रिया पूरी कर शिक्षक स्थानांतरण पायेंगे हर पांच साल पर ये स्थानांतरण की प्रक्रिया होती रहेगी ,महिला शिक्षकों को बगल के पंचायत में वे पुरूष शिक्षकों को बगल के प्रखंड में लाने का सरकार का जो संकल्प है उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं बाइट- मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री,बिहार सरकार
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दंतेवाड़ा में सरपंच पद से हटाए जाने पर आदिवासी संगठनों का प्रदर्शन

Dantewada, Chhattisgarh:दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण ब्लॉक के बड़े लखापाल ग्राम पंचायत के बर्खास्त सरपंच दिनेश मरकाम का मामला अब तूल पकड़ रहा है। सरपंच पद से हटाए जाने के विरोध में आदिवासी समाज और कटेकल्याण ब्लॉक सरपंच संघ ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई का विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने दिनेश मरकाम के साथ अन्याय किया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सरपंच ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग किया था। बड़े लखापाल के सरपंच दिनेश मरकाम को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1) के तहत तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया था। प्रशासन के अनुसार सरपंच ने अपने पद की शक्तियों और दायित्वों का दुरुपयोग किया तथा पद के विपरीत कार्य किए, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के विरोध में सर्व आदिवासी समाज और कटेकल्याण ब्लॉक सरपंच संघ के पदाधिकारी व ग्रामीण एसडीएम कार्यालय दंतेवाड़ा पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिनेश मरकम ने केवल गांव में बंद पड़े पुराने आश्रम विद्यालय को वापस लाने की मांग को लेकर रैली निकाली थी। उनका सवाल है कि गांव के लिए आश्रम स्कूल की मांग करना कोई अपराध नहीं है, इसलिए प्रशासन की कार्रवाई अनुचित है। वहीं, इस पूरे मामले पर दंतेवाड़ा के एसडीएम ने प्रशासन का पक्ष स्पष्ट किया। एसडीएम ने कहा कि कार्रवाई किसी आंदोलन के कारण नहीं, बल्कि सरपंच द्वारा अपने पद के दुरुपयोग के आधार पर की गई है. एसडीएम, दंतेवाड़ा का बयान - एसडीएम के मुताबिक, दिनेश मरकाम ने अप्रैल माह में अपने पद और आधिकारिक मुहर का उपयोग कर कटेकल्याण के साप्ताहिक बाजार को बंद करवाया था। इसके अलावा आश्रम विद्यालय की मांग को लेकर हुए आंदोलन में तहसील कार्यालय को दिए गए ज्ञापन के लिए भी सरपंच के आधिकारिक लेटर पैड का इस्तेमाल किया गया, जो नियमों के विपरीत है। इसी आधार पर जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.
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सिवनी में छात्रा के बयान के बाद युवक के साथ मारपीट मामला राजनीतिक रंग लेने लगा

Seoni, Madhya Pradesh:सिवनी में युवक के साथ बर्बरता पूर्वक मारपीट के मामले में सियासत शुरू हो गई है। वहीं आईटीआई की एक छात्रा के बयान के बाद मामला यू टर्न ले लिया है। नगर कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के पदाधিকারियों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट करने वाले और वहां मौजूद सभी लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए उपरोक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया है। वहीं आईटीआई की एक छात्रा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर घटना का यू टर्न ला दिया है। छात्रा का कहना है कि सोहेल खान आईटीआई का छात्र था जो उसे रोज परेशान करता था और धमकाते हुए जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाता था जिसके बाद परिजनों को इस बात की जानकारी दी थी जिसके बाद मारपीट की घटना घटी है। छात्रा का कहना है कि वह पढ़ना चाहती है लेकिन सोहेल के डर के मारे उसने आईटीआई जाना छोड़ दी थी। छात्रा ने पुलिस अधीक्षक से सोहेल के खिलाफ अपराध दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
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बंजारी मंदिर के पास अज्ञात शव से इलाके में हड़कम्प, पुलिस जाँच में जुटी

Kawardha, Chhattisgarh:बंजारी मंदिर के पास अज्ञात शव से इलाके में हड़कम्प, पुलिस जाँच में जुटी कबीरधाम जिले के नेशनल हाईवे 30 रायपुर जबलपुर मार्ग में स्थित बंजारी मंदिर के पास नायक ढाबा के पीछे एक अज्ञात व्यक्ति की शव मिलने से आसपास में हड़कंप मच गया है सूचना पर पहुंची बुधवार की दोपहर 12 बजे के आसपास बोड़ला थाना पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर अज्ञात शव की पहचान कराने में जुटी हुई है.फिलहाल मृतक व्यक्ति कौन हैं और कहा की हैं इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाया हैं बोड़ला पुलिस मृतक व्यक्ति की पहचान कराने में सोशल मिडिया ग्रुपों में फोटो शेयर कर रहे हैं ताकि मृतक व्यक्ति की परिजन तक सुचना मिल सकें.
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मुंबई फैशन डिज़ाइनर की 12 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़, POCSO केस दर्ज; रिमांड नहीं मिला

Mumbai, Maharashtra:मुंबई के एक फ़ैशन डिज़ाइनर की 12 साल की बच्ची से छेड़छाड़, POCSO के तहत केस दर्ज… गिरफ्तारी के बाद भी आरोपी को नहीं मिला ट्रांजिट रिमांड  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की मर्यादा और बच्चों की सुरक्षा, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई के एक फ़ैशन डिजाइनर की 12 वर्षीय बेटी के साथ कथित तौर पर उसके ही रिश्तेदार ने कई बार अश्लील हरकत की। पीड़िता के परिवार की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी फरमान अंसारी को कोलकाता से गिरफ्तार किया, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते स्थानीय अदालत ने मुंबई पुलिस को ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस को खाली हाथ मुंबई लौटना पड़ा। पुलिस शिकायत के मुताबिक, कथित घटनाओं की शुरुआत 22 मई 2025 से हुई। आरोप है कि पहली बार आरोपी ने बच्ची के साथ अनुचित हरकत की और उसे किसी से कुछ भी न बताने की धमकी दी। इसके बाद नवंबर 2025 में एक पारिवारिक शादी के दौरान कोलकाता में दोबारा कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। वहीं मार्च 2026 में रमजान ईद के दौरान भी आरोपी पर बच्ची के साथ अशोभनीय हरकत करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि आरोपी फरमान अंसारी, पीड़िता के मामा का साला है। परिवार के बेहद करीबी सदस्य पर लगे इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। शिकायत के अनुसार, लगातार हुई इन कथित घटनाओं और धमकियों के कारण बच्ची लंबे समय तक मानसिक तनाव और डर में रही। बाद में उसने हिम्मत जुटाकर परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। जांच के दौरान मुंबई पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे कोलकाता से गिरफ्तार भी किया। हालांकि, स्थानीय अदालत ने ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार करते हुए आरोपी को निर्देश दिया कि वह 28 तारीख से पहले मुंबई की संबंधित अदालत में पेश हो। इसके चलते मुंबई पुलिस आरोपी को साथ लाए बिना वापस लौट गई। जानकारी के अनुसार, आरोपी फरमान अंसारी टीएमसी के पूर्व नगरसेवक रहमत अंसारी का बेटा है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। यह मामला केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवार से जुड़ा एक करीबी व्यक्ति ही भरोसे को तोड़ने के आरोपों के घेरे में हो, तब बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए? वहीं, गिरफ्तारी के बाद भी ट्रांजिट रिमांड न मिलना कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल सभी की नजरें आरोपी की मुंबई की अदालत में पेशी और मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक डर, चुप्पी, घबराहट या किसी रिश्तेदार से मिलने से परहेज जैसे बदलाव दिखें, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर संवाद और कानूनी मदद किसी बच्चे को लंबे मानसिक आघात से बचा सकती है।
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कवर्धा के लोहारा में आयुर्वेदिक चिकित्सक पर दुष्कर्म के आरोप; गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड

Kawardha, Chhattisgarh:कवर्धा: ब्रेकिंग कबीरधाम जिले के लोहारा थाना क्षेत्र में उपचार के बहाने मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म के आरोप में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी बालक दास चंदेल (35), निवासी ढोढमानवापारा, के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) के तहत मामला दर्ज किया। विवेचना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। कबीरधाम पुलिस ने कहा है कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त एवं त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।
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हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए हैंडीकैप यात्रियों के लिए अमरनाथ यात्रा पर अल मुईन फाउंडेशन का कदम

New Delhi, Delhi:अपने दो दशक से ज्यादा पुराना एक गाना सुना होगा जिसका उन्वांन था ना हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है इंसान बनेगा शायद आज उसे गाने की अहमियत और उसकी तरबीयत बहुत जरूरी है। यह बात आपको हम इसलिए बता रहे हैं कि आज के वक्त में जिस तरीके से हिंदू मुसलमान के नफरतें राजनीति का लीजिए या फिर आपसी भाईचारे को लगा हुआ ग्रहण क्या लीजिए उसमें यह खबर बहुत अहम हो जाती है दरअसल अभी अमरनाथ यात्रा चल रही है और ऐसे में हर हिंदू सनातनी की यह ख्वाहिश होती है कि वह एक बार अमरनाथ की यात्रा जरूर करें। देश भर से लाखों लोग अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह लोग अमरनाथ यात्रा पर कैसे जाएं जो फिजिकल चैलेंज है यानी हैंडीकैप है उनके लिए सबसे बड़ी मुश्किल इस बात को लेकर है कि अमरनाथ की यात्रा कठिन है। अल मुईन फाउंडेशन ने एक कदम उठाया जिसमें 50 लोग ऐसे चुने जाते हैं जो फिजिकल चैलेंज यानी हैंडीकैप है। अल मुईन फाउंडेशन की जाकिया खान पिछले कई सालों से लगातार ऐसे लोगों को अमरनाथ यात्रा पर भेज रही हैं हिंदू मुस्लिम एकता की रिवायत को बरकार रखने के लिए कदम काबिले तारीफ कहा जा सकता है। जाकिया खान अपने खर्चे पर अपनी फाउंडेशन की तरफ से अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को हर वह सुविधा मुहैया कराती हैं जिसकी जरूरत उनको यात्रा के दौरान होगी चाहे वह रेनकोट हो जूते हो या दूसरी चीजें।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव समय पर नहीं कराने पर आयोग-अधिकारियों पर कड़ा रुख दिखाया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान में पंचायत एवं निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा एवं जस्टिस संजीत पुरोहित की डिवीजन ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया राज्य चुनाव आयुक्त ने न्यायालय के आदेश की पालना नहीं की है। हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त तथा राजनीतिक आरक्षण से संबंधित ओबीसी आयोग के सचिव-परामर्शदाता को गुरूवार को व्यक्तिगत रूप से अथवा वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने गिरिराज सिंह देवंदा एवं संयम लोढ़ा की ओर से दायर प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243के के तहत राज्य चुनाव आयोग पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी है और उसे न्यायालय के आदेशों का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य चुनाव आयुक्त ने कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने दलील दी कि ओबीसी वर्ग को राजनीतिक आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आयोग की रिपोर्ट आवश्यक है। ओबीसी आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 14 अगस्त तक का समय मांगा है, इसलिए सरकार को अंतिम अवसर दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संकेत दिए कि यदि राज्य चुनाव आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है तो न्यायालय वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार कर सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट कर चुका है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना भी चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके बावजूद रिपोर्ट का हवाला देकर चुनाव टालना न्यायालय के आदेशों की अवमानना है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक हर हाल में पंचायत एवं निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे तथा ओबीसी आयोग को भी निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। अब आदेशों की अनुपालना नहीं होने पर कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव-परामर्शदाता को तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई गुरूवार को दोपहर 2 बजे निर्धारित की है.
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बकानी तहसील में किसान संघ का धरना तीसरे दिन जारी; वार्ता नहीं हुई तो घेराव

Jhalawar, Rajasthan:बकानी झालावाड़ बकानी तहसील कार्यालय पर भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना जारी रखते हुए आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। भारतीय किसान संघ ने आगे की रणनीति तय करते हुए जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुर्जर के नेतृत्व में कार्यवाहक तहसीलदार रतनलाल भील को अंतिम चेतावनी पत्र सौंपा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि गुरुवार तक प्रशासन के साथ सकारात्मक वार्ता नहीं होती और किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तो शुक्रवार को हजारों किसान बकानी तहसील कार्यालय पहुंचकर घेराव करेंगे। किसान संघ का कहना है कि प्रशासन के साथ अब तक दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन दोनों ही बार कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। किसानों का दावा है कि फसल खराबा मुआवजा, फसल बीमा क्लेम और बकानी कृषि उपज गौण मंडी से जुड़े पूर्व समझौते की मांगों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। धरना स्थल पर किसानों की लगातार संख्या बढ़ रही है और आसपास के गांवों से भी किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान संघ ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी मांगों का समाधान नहीं किया, तो शुक्रवार का आंदोलन बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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हाई कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण और चुनाव स्थगन मामले में सरकार से जवाब मांगा

Jaipur, Rajasthan:हाई कोर्ट के शॉट और याचिकाकर्ता के वकील प्रेमचंद देवंदा की बाईट इंट्रो- राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक नहीं कराने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या लगता है कि अदालती आदेश की पालना में अवहेलना की गई है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव-सलाहकार 16 जुलाई को दोपहर 2 बजे अदालत में हाजिर हो। अदालत ने कहा है कि दोनों वीसी के जरिए भी उपस्थित हो सकते हैं। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश गिरिराज सिंह देवंदा और संयम लोढा की याचिका में राज्य सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए। बॉडी-सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि प्रदेश में करीब पचास फीसदी आबादी ओबीसी वर्ग की है। ऐसे में उचित आरक्षण सुनिश्चित करना जरूरी है। ओबीसी आयोग ने 14 अगस्त, 2026 तक राजनीतिक आरक्षण रिपोर्ट पेश करने की सूचना दी है। ऐसे में सरकार विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण का विवरण 31 अगस्त तक उपलब्ध करा सकेगी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने गत 6 जुलाई को पत्र के जरिए सूचित किया है कि यदि आरक्षण का विवरण 31 अगस्त तक उपलब्ध करा दिया जाएगा तो विभिन्न वैधानिक प्रावधानों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चार चरण में और निकाय चुनाव दो चरण में कराने होंगे और इसमें कुल 90 दिन का समय लगेगा। प्रदेश में करीब 14 हजार ग्राम पंचायतों और तीन सौ से अधिक नगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं। ऐसे में संसाधनों को देखते हुए चरणबद्ध चुनाव कराना सही रहेगा। ग्राम पंचायत के चुनाव में 50 दिन और शहरी निकायों के लिए 40 दिन लगेंगे। अब तक स्थानीय निकायों का परिसीमन और मतदाता सूची संशोधन पूरा हो चुका है। ऐसे में चुनाव कराने के लिए उचित समय दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत को बताया कि चुनाव कराने की समय सीमा बढ़वाने के लिए यह प्रार्थना पत्र राज्य सरकार ने दायर किया है, जबकि अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव कराने का समय दिया था। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 243के के तहत भी पंचायतों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव संचालन की जिम्मेदारी राज्यपाल की ओर से नियुक्त राज्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व वाले राज्य निर्वाचन आयोग की होती है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रथम दृष्टया अदालती आदेश की अवहेलना मानते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त और ओबीसी आयोग के सचिव सलाहकार को 16 जुलाई को तलब किया है。 BYTE- प्रेमचंद देवंदा, याचिकाकर्ता के वकील महेश पारीक, ज़ी मीडिया जयपुर
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