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सेवानिवृत्त रेडियोग्राफर बाबूलाल चौधरी की देहदान से नागौर मेडिकल कॉलेज में शिक्षा को आगे बढ़ेगा
DIDamodar Inaniya
Nov 08, 2025 13:18:04
Nagaur, Rajasthan
नागौर
नोखा के सेवानिवृत्त रेडियोग्राफर मरणोपरांत भी शिक्षा के काम आए
बीकानेर जिले के नोखा मंडी निवासी एक परिवार ने आज एक मानवीयता की मिसाल पेश की। उन्होंने 75 वर्षीय अपने परिजन स्वर्गीय बाबूलाल चौधरी का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार करने के बजाय नागौर मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया। बाबूलाल चौधरी, जो बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में रेडियोग्राफर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, अब मरणोपरांत भी मेडिकल छात्रों के लिए ज्ञान का स्रोत बनेंगे।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि बाबुलाल चौधरी का हृदय गति थमने के कारण उनकी मौत हो गई । उनकी मृत्यु से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर है। हालांकि, दुःख की इस घड़ी में भी परिवार ने साहस दिखाते हुए उनकी वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा किया ।
एक दशक पहले ही ले लिया था महादान का संकल्प
परिजनों ने बताया कि बाबूलाल चौधरी ने लगभग 10 साल पहले ही अपने परिवार के सदस्यों को यह बता दिया था कि वह मृत्यु के बाद अपना शरीर दान करना चाहते हैं ताकि वह चिकित्सा शिक्षा के काम आ सके। परिवार ने उनके इस नेक संकल्प को सम्मान देते हुए सभी आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कीं। आज, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के बजाय विधिवत रूप से नागौर मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द कर दिया गया।
कॉलेज प्रशासन ने इस देहदान को एक महादान बताते हुए परिवार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के अनुसार, इस शरीर का उपयोग प्रथम वर्ष के छात्रों को मानव शरीर की संरचना (एनाटॉमी) समझाने और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा। स्वर्गीय बाबूलाल चौधरी का यह कदम उन सैकड़ों भावी डॉक्टरों के लिए मार्गदर्शक बनेगा जो समाज की सेवा करने की तैयारी कर रहे हैं।
नागौर मेडिकल कॉलेज के डॉ संदीप के अनुसार ने बताया कि यह नागौर जिले का प्रथम देहदान है।
देहदान के पश्चात जब सारी रस्में निभाने के बाद हमने शरीर को प्रिजर्व कर लिया है। इस शरीर का इस्तेमाल हमारे प्रथम वर्ष के छात्रों को शरीर रचना विभाग के द्वारा बच्चों को पढ़ाने के लिए उसका इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देहदान में कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो पूरी नहीं हो पाती। कोई भी रीति-रिवाज, जो अंतिम रस्म होती है, वह सारी पूर्ण होती है क्योंकि हम परिवार जन को उनके नाखून एवं बाल देते हैं जिससे वह उनके अंतिम संस्कार की जो भी प्रक्रियाएं हैं, जो भी रीति-रिवाज हैं, वह पूर्ण कर सकें।
बाइट - संजीव चौधरी सहायक प्रिसिंपल मेडिकल कॉलेज नागौर
बाइट - बाबूलाल चौधरी के परिजन
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