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नागौर के भगीरथ बेटी की शादी में 24 जवानों ने पिता बनकर रस्में निभाईं
DIDamodar Inaniya
Feb 22, 2026 12:05:08
Nagaur, Rajasthan
शहीद साथी से किया वादा निभाने पहुँचे सेना के जवान
शौर्य चक्र विजेता शहीद भागीरथ कड़वासरा की बेटी की शादी में बने पिता, 13 ग्रेनेडियर्स के 24 जवानों ने निभाई सभी रस्में
नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के निकट ग्राम पंचायत कड़वासरो की ढाणी में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। शौर्य चक्र विजेता अमर शहीद भागीरथ कड़वासरा के साथियों ने अपने शहीद साथी से किया वादा निभाते हुए उनकी बेटी की शादी में पिता की भूमिका निभाई। इस अनोखे और भावुक दृश्य को देखकर गांव के लोग भी भावुक हो गए और सेना के जवानों की इस पारिवारिकता, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान भावना की जमकर सराहना की।
शहीद भागीरथ कड़वासरा की पुत्री सुष्मिता के विवाह समारोह में भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन (गंगानगर-जैसलमेर सेक्टर) से 24 जवान विशेष रूप से गांव पहुंचे। इस दौरान कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार, अन्य सैन्य अधिकारी तथा सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल सुरेश चंद्र राणा भी उपस्थित रहे。
सैनिकों ने अपने शहीद साथी के प्रति सम्मान और किए गए वादे को निभाते हुए बेटी की शादी में पिता के रूप में सभी पारंपरिक रस्मों को निभाया और उसे आशीर्वाद दिया। विदाई के समय जवानों की आंखें नम हो गईं। यह भावुक पल देखकर गांव के लोग भी भावविभोर हो उठे। ग्रामीणों का कहना था कि आज के समय में जब लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों से भी कतराते हैं, ऐसे में सेना के जवानों द्वारा निभाई गई यह जिम्मेदारी वास्तव में प्रेरणादायक है।
अदम्य साहस के प्रतीक थे शहीद भागीरथ कड़वासरा
“जो देश पर मिटे, वही अमर कहलाए” — इस पंक्ति को चरितार्थ करने वाले शौर्य चक्र विजेता अमर शहीद भागीरथ कड़वासरा की वीरता आज भी क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
शहीद भागीरथ कड़वासरा 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए एक सैन्य अभियान के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया।
1978 में हुआ जन्म, 1995 में सेना में भर्ती
शहीद भागीरथ कड़वासरा का जन्म 10 जनवरी 1978 को नागौर जिले के मेड़ता उपखंड के कड़वासरो की ढाणी में हुआ था। उनके पिता का नाम हप्पाराम तथा माता का नाम मंगली देवी है। उनका विवाह टालनपुर निवासी पूरा राम बांगड़ा की पुत्री संतोष के साथ हुआ था। शहीद अपने पीछे एक पुत्री सुष्मिता को छोड़ गए।
भागीरथ कड़वासरा का चयन 5 जनवरी 1995 को भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन में हुआ था। उन्होंने अपने सैन्य जीवन का अधिकांश समय देश के पूर्वी क्षेत्र में सेवा करते हुए बिताया। उनकी वीरता और अद्वितीय साहस को सम्मान देते हुए 26 मार्च 2003 को भारत सरकार द्वारा उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
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