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STSharad Tak11 Aug 2025, 08:32 am

आदिवासी महिलाओं की मेहनत से कंकोड़े का अचार अब बाजार में!

Sirohi, Rajasthan:एंकर: आइए आज हम सिरोही के पिंडवाड़ा उपखंड प्रशासन की अभिनव पहल से जुड़ी खबर दिखाएंगे… जिसने आदिवासी महिलाओं की ज़िंदगी में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भर दी है… हर्बल गुलाल, पलाश साबुन और मोरिंगा पाउडर के बाद अब कंकोड़े का अचार बाजार में उपलब्ध होने जा रहा है… यह कदम न सिर्फ़ पारंपरिक स्वाद को नया बाज़ार दे रहा है, बल्कि आदिवासी महिलाओं के लिए रोज़गार का मज़बूत सहारा भी बन रहा है… वीओ 1: सिरोही के आदिवासी इलाकों में पाई जाने वाली यह पारंपरिक वन उपज, जिसे स्थानीय लोग कंकोड़ा कहते हैं, अब पिंडवाड़ा उपखंड प्रशासन और राजीविका के सहयोग से मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग के बाद बड़े बाज़ारों तक पहुँच रही है… महिलाओं को लगातार नए उत्पादों का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है… और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को रोज़गार का साधन बनाया जा रहा है… बाईट 1 – कांता बाई, समूह सदस्य वीओ 2: विशेषज्ञ बताते हैं कि कंकोड़े का अचार स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है… यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करता है… बाईट 2 – सवी बाई, समूह सदस्य वीओ 3: जिले के पिंडवाड़ा SDM मनसुख डामोर के इस नवाचार से क्षेत्र में रोजगार का बड़ा अवसर है… शुष्क वन अनुसंधान संस्थान जोधपुर के सहयोग से ग्राम पंचायत घरट में 40 आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग की सुविधा दी जा रही है… ताकि वे सीधे बाजार से जुड़ सकें… बाईट 3 – मनसुख डामोर, उपखंड अधिकारी, पिंडवाड़ा ( वाइट शर्ट कुर्सी पर बैठे है ) वीओ 4: महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार यह अचार अब स्थानीय बाजार से निकलकर राजस्थान के अन्य जिलों तक अपनी पहचान बना रहा है… यह पहल साबित कर रही है कि अवसर और सहयोग मिले, तो हुनरमंद महिलाएं समाज में बदलाव ला सकती हैं… बाईट 4 – मनोज मीणा, ब्लॉक परियोजना प्रबंधक, राजीविका पिंडवाड़ा ( तिलक वाला लड़का ) वीओ : सिरोही की यह कहानी बताती है कि जब स्थानीय संसाधन, प्रशासन का सहयोग और महिलाओं की मेहनत एक साथ मिलते हैं… तो आत्मनिर्भरता सिर्फ़ सपना नहीं, बल्कि हक़ीक़त बन जाती है… और यही हक़ीक़त अब इन महिलाओं की ज़िंदगी बदल रही है… जी मीडिया के लिए सिरोही से शरद टाक की रिपोर्ट
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मुरैना अस्पताल में इलाज से महिला की मौत, परिवार ने डॉक्टर पर आरोप

Morena, Madhya Pradesh:मुरैना में ईलाज के दौरान महिला की मौत, प्राइवेट गणेशी हॉस्पिटल में चल रहा था महिला का ईलाज, महिला की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, परिजनों ने डाक्टर पर लगाया आरोप, इलाज में हुई लापरवाही के कारण गई महिला की जान, ब्लड प्रेशर की शिकायत को प्राइवेट गणेशी हॉस्पिटल मैं भर्ती हुई थी महिला, इलाज के दौरान इंजेक्शन और बोतल लगाते समय महिला के मुंह से निकले झाग, मेला ने थोड़ा दम डॉक्टर पर लापरवाही एवं गलत इलाज करने का परिजनों ने लगाया आरोप, पूर्व में इस अस्पताल में कई लोगों की इलाज के दौरान गई जान, मृतका के परिजनों के हंगामा की सूचना पर मौके पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस
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कटनी-एगरा में अब अंडरग्राउंड केबल से बिजली, तूफान में सुरक्षा बढ़ेगी

Haldia, West Bengal:কাঁথি ও এগরা শহরে ঝড়-বৃষ্টি কিংবা দুর্যোদের সময় ছিঁড়ে পড়া বিদ্যুতের তার থেকে দুর্ঘটনা ও বিদ্যুৎস্পৃষ্ট হওয়ার মৃত্যু রুখতে বড় উদ্যোগ নিল রাজ্য সরকার। কাঁথি ও এগরা শহরের ওভারহেড বিদ্যুৎ লাইন সরিয়ে আন্ডারগ্রাউন্ড কেবল মাধ্যমে বিদ্যুৎ সরবরাহের উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে। ঝড়ের সময় বিদ্যুতের তার ছিঁড়ে রাস্তার উপর পড়ে যাওয়া কিংবা জলমগ্ন এলাকায় বিদ্যুৎস্পৃষ্ট হওয়ার ঘটনা অতীতে একাধিকবার ঘটেছে। পাশাপাশি শহরের বিভিন্ন এলাকায় এলোমেলোভাবে ছড়িয়ে থাকা বিদ্যুতের জঞ্জালও দীর্ঘদিনের সমস্যা। এই পরিস্থিতি দূর করতেই রাজ্য বিদ্যুৎ দপ্তরের পক্ষ থেকে এই উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে বলে জানা গিয়েছে। এ বিষয়ে কাঁথি ও এগরা বিদ্যুৎ বিভাগের ডিভিশনাল ম্যানেজারের সঙ্গে যোগাযোগ করা হলে তিনি ক্যামেরার সামনে মন্তব্য করতে চাননি। তাঁর বক্তব্য, এ বিষয় যা বলার তা ঊর্ধ্বতন কর্তৃপক্ষই জানাবেন। তবে সরকারি ঘোষণার পরে তাঁদের কাছে কাজ সংক্রান্ত বার্তা পৌঁছেছে এবং খুব শীঘ্রই কাজ শুরু হতে পারে বলে জানা গিয়েছে। কাঁথি ও এগরা শহরে আন্ডারগ্রাউন্ড কেবল বসানোর উদ্যোগকে স্বাগত জানিয়েছেন পৌর এলাকার বাসিন্দারা। তাঁদের মতে, এই প্রকল্প বাস্তবায়িত হলে একদিকে যেমন বিদ্যুৎ পরিষেবার ক্ষেত্রে নিরাপত্তা বাড়বে, তেমনই শহরের সৌন্দর্যও অনেকটাই বৃদ্ধি পাবে。
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अलीगढ़ में दबंग डीलर ने युवक को थप्पड़, अस्पताल में हंगामा वायरल

Aligarh, Uttar Pradesh:दबंग डीलर ने युवक को जड़ा थप्पड़, विरोध पर घर पर लाठी-डंडों से हमला, मेडिकल कराने पहुंचे पीड़ित से ₹10 हजार मांगने का आरोप, अस्पताल में भी हंगामे का दावा, पीड़ित परिवार के दो लोग घायल, मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, थाना टप्पल क्षेत्र के कन्सेरा गांव का मामला, पीड़ित अर्जुन ने पुलिस से की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, अस्पताल स्टाफ पर धक्का-मुक्की और मारपीट का भी आरोप, पुलिस की मौजूदगी में हंगामे का भी वीडियो वायरल, पीड़ित का आरोप—मेडिकल के नाम पर मांगे गए पैसे, शिकायत करने पर अस्पताल में बढ़ा विवाद, डॉक्टर की ओर से सरकारी काम में बाधा डालने पर कार्रवाई की धमकी दिए जाने का भी दावा, मेडिकल के नाम पर पैसे मांगने और अस्पताल स्टाफ पर मारपीट के आरोप, थाना टप्पल क्षेत्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टप्पल का मामला
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Noida, Uttar Pradesh:
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समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, बाढ़ से जीवन प्रभावित

Samastipur, Bihar:समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, घरों में 3 फीट तक पानी । छतों पर रहने को मजबूर लोग, सरकारी कर्मी भी पलायन को मजबूर, पूर्व राजद विधायक ने सरकार पर साधा निशाना । समस्तीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 मीटर से ऊपर पहुंच गया है। हालांकि पिछले कुछ घंटों में नदी का जलस्तर करीब 10 सेंटीमीटर कम हुआ है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कहीं दो से तीन फीट पानी है तो कहीं सड़कें पूरी तरह डूब चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं, जबकि कुछ लोग अपना घर और सामान बचाने के लिए छतों पर रहने को मजबूर हैं। मोहनपुर प्रखंड की डुमरी दक्षिणी पंचायत में चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। कई घरों में दो से तीन फीट तक पानी घुसा हुआ है। घर में रखा सामान पानी में डूब रहा है, ऐसे में लोग जरूरी सामान समेटकर ऊंची जगहों की ओर जा रहे हैं। जिन लोगों ने घर नहीं छोड़ाया है, उनके लिए नाव ही जिंदगी का सहारा बनी हुई है। बाढ़ ने सिर्फ आम लोगों की मुश्किलें नहीं बढ़ाई हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी प्रभावित किया है। डुमरी दक्षिणी पंचायत की बाढ़ प्रभावित आंगनबाड़ी सेविका भी पानी बढ़ने के बाद अपना घर छोड़कर मायके चली गई हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सरकारी कर्मी ही बाढ़ से बचने के लिए पलायन को मजबूर हैं, तो गांव के बच्चों और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच कैसे होगी?सबसे बड़ी समस्या सिर्फ घर में घुसा पानी नहीं, बल्कि पीने के साफ पानी और आवागमन की भी है। गांव के चारों तरफ पानी है और कई जगहों पर नाव ही आने-जाने का एकमात्र साधन बची है। ग्रामीणों का आरोप है कि नावों का निबंधन तो कराया गया है, लेकिन जरूरत के मुताबिक नाव उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो या घर के लिए जरूरी सामान लाना हो, हर काम मुश्किल हो गया है।बाढ़ के बीच राहत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे राजद के पूर्व विधायक एज्या यादव का दावा है कि उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की है और कई परिवारों को अब तक सरकारी सहायता नहीं मिली है। उनके मुताबिक राजद कार्यकर्ताओं की ओर से बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया है। पूर्व विधायक ने सरकार पर आपदा कोष को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि चुनाव के दौरान पैसे बांटने के कारण सरकार के पास आपदा राहत के लिए पर्याप्त राशि नहीं बची है। वही बाढ़ प्रभावित इलाकों से मौके का जायजा लिया जी मीडिया संवाददाता मंटून कुमार रॉय ने....
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