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ABAnnu Babu Chaurasia11 Sept 2025, 01:18 pm

इटावा: नाबालिग के साथ कार में छेड़छाड़ का मामला दर्ज, जांच तेज

Etawah, Uttar Pradesh:स्लग:-नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़/इटावा/अन्नू चौरसिया/11/09/2025/09410078610 एंकरइंट्रो:-इटावा में घर से स्कूल जा रही नाबालिग छात्रा को कार में अगवा कर दुष्कर्म का आरोप लगाया है वहीं पुलिस ने छेड़छाड़ में मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। वहीं पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाए संगीन आरोप। वी. ओ:-इटावा जनपद के थाना सिविल लाइन इलाके के सराय एशर गांव की रहने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया कि वह घर से स्कूल जा रही थी जिसके बाद कार सवार चार लोग आए और हमको कार में डालकर ले गए और एक घर में जाकर मेरे साथ गलत कार्य किया और उसके बाद हमें छोड़ दिया है और धमकी भी दी कि अगर शिकायत करेगी तो जान से मार देंगे। वहीं इस मामले में पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपियों में एक युवक को पहचानते है क्योंकि वह गांव दूधिया है और दूध लेने के लिए आता था। पुलिस कार्यवाही कुछ और कर रही है और हम लोग कुछ और लिखकर शिकायत दे रहे है पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। वहीं इस मामले में एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में पीड़िता की मां की तहरीर पर मुकदमा सुसंगत धाराओं में दर्ज कर लिया गया है दोनों का एक दूसरे के घर पर आना जाना था मेडिकल परीक्षण कराया गया है कोर्ट में बयान होगा जो भी बयान होंगे उस धाराओं में तब्दीली कराते हुए कार्यवाही की जाएगी। बाइट:-पीड़िता बाइट:-पीड़िता के पिता बाइट:-बृजेश कुमार श्रीवास्तव एसएसपी इटावा
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बांकीपुर उपचुनाव में तेजस्वी यादव का रोड शो और चुनाव आयोग पर तीखे आरोप

Noida, Uttar Pradesh:बांकीपुर उपचुनाव में आज चुनाव प्रचार का आख़िरी दिन है और सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आज रोड शो कर अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने की अपील की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है और इस मुद्दे पर आयोग को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, अपनी हालिया विदेश यात्रा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी तेजस्वी यादव ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हम मेलेनी को मेलोडी खिलाने नहीं गए थे," और इशारों-इशारों में सरकार पर तंज कसा। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तेजस्वी के इस रोड शो और उनके तीखे बयानों ने बांकीपुर उपचुनाव की सियासी सरगर्मी को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रचार के आख़िरी दिन की यह राजनीतिक जंग मतदान के दिन कितना असर छोड़ती है।
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कांकेर के तीन आश्रमों में बच्चों की मौत, 76 आश्रमों में मलेरिया टेस्ट तेज

Kurustikur, Chhattisgarh:कांकेर जिले के तीन आदिवासी आश्रमों में बच्चों की मौत हो गई है। ग्यारह बच्चे अब तक मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं जिनका इलाज चल रहा है। दो दिन पूर्व मरदापोटि आश्रम, डोमाहर्रा आश्रम और सरंडी आश्रम के तीन बच्चों की मलेरिया से मौत हो गई थी। जिला भर के 76 आश्रमों में बकायदा कैंप लगाकर मलेरिया टेस्ट किया जाएगा, यह दावा अधिकारी ने किया है। आज स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के साथ कांकेर पहुंचे और जिला पंचायत सभागार में स्वास्थ्य विभाग के जिले भर के सभी स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मीटिंग कर जानकारी ले रहे हैं।
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मंडला के पीएम श्री विद्यालय में शिक्षक अभाव, छात्रों ने जनसुनवाई में राहत मांगी

Mandla, Madhya Pradesh:मंडला जिले में शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम श्री विद्यालय के नाम पर स्कूल तो बना दिया गया, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंतित छात्र-छात्राएं अब जनसुनवाई पहुंचकर शिक्षकों की मांग करने को मजबूर हैं。 मामला मंडला जिले की मोहगांव जनपद के बिलगांव पीएम श्री विद्यालय का है। जहां छात्र-छात्राएं शिक्षकों की भर्ती की मांग लेकर जनसुनवाई पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि विद्यालय को पीएम श्री विद्यालय का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन पिछले एक साल से यहां पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई लगभग ठप पड़ी है और नियमित कक्षाएं भी संचालित नहीं हो पा रही हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा नजदीक है, लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही। ऐसे में उन्हें अपने परीक्षा परिणाम और भविष्य की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि माध्यमिक शाला का उन्नयन कर पीएम श्री विद्यालय तो बना दिया गया, लेकिन उसके अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। वहीं प्रशासन का कहना है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। आज ही मामले की जांच कर विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था कराने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो。
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राजनांदगांव में भाजपा नेताओं के इस्तीफे पर बैज का बयान

Begun, Rajasthan:रायपुर राजनांदगांव में भाजपा नेताओं के इस्तीफे पर पीसीसी चीफ दीपक बैज का बयान बीजेपी में भगदड़ मची हुई है.. बीजेपी से लोग जुड़ कम रहे है और निकल ज्यादा रहे है. बीजेपी के खिलाफ माहौल है.. इसी वजह से बीजेपी के 111 नेताओ ने पार्टी से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया है. ये बीजेपी के जनविरोधी कार्यो को लेकर ऐसा हुआ..नइनके खुद के नेताओ को इनपर विश्वास नहीं है.. बस्तर में मलेरिया से मौत मामले पर पीसीसी चीफ बैज का बयान बस्तर मलेरिया की चपेट में है.. बस्तर के गरीब अदिवासी इससे पीड़ित है.. सरकार ना तो मलेरिया से बचा पा रही है, ना ग्रामीणों को मेडिकेटिड माचारदानी किट दे पा रही है.. कांग्रेस ने अपने समय में बस्तर को मलेरिया मुक्त घोषित किया था. आज की स्तिथी में ना जाँच हो रही है ना ही दवाइयां है ना ही किट मौजूद है. सरकार इसके लिए जिमेदार है.. कल दिल्ली में बैठक को लेकर पीसीसी चीफ बैज ने कहा-- सरकार के खिलाफ पार्टी की रणनीति पर चर्चा होगी... बैठक पर बीजेपी के बयानों पर कहा- बीजेपी पहले अपने घर को देखे.. बीजेपी में सर फुटवल्ल है इनकी पार्टी से कार्यकर्ता जा रहे है.. बाइट- दीपक बैज, पीसीसी चीफ
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राजस्थान पर्यटन गाइडों का शहीद स्मारक पर प्रदर्शन, 7 सूत्री मांगें

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान पर्यटन गाइड एसोसिएशन का धरना-प्रदर्शन: गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष धारासिंह के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन, सुबह 11 बजे शहीद स्मारक जयपुर में प्रदर्शन। सात सूत्रीय मांगों में सामाजिक-आर्थिक और व्यवसायिक उन्नयन शामिल है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गाइड शामिल हुए। टूरिस्ट गाइड वेलफेयर एंड रिफार्म सोसाइटी के अध्यक्ष धारासिंह गुर्जर ने बताया कि गाइड अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं। सरकार पर्यटन गाइड के लिए योजना बनाए; केंद्र-राज्य सरकार को ज्ञापन दिया गया पर बजट घोषणाओं में गाइडों की अनदेखी जारी है। प्रदेशभर से गाइड मौजूदा कानून राजस्थान पर्यटन व्यापार (सुविधा एवं विनियमन) नियम 2010 में संशोधन कर संविदा सेवा में शामिल करने, लाइसेंस रिन्यूवल 2 वर्ष से 5 वर्ष करने, रिन्यूवल फीस माफ़ी, टूरिस्ट गाइड परिवार का स्वास्थ्य बीमा, गम्भीर बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु पर आर्थिक सहयोग, निशुल्क विदेशी भाषा प्रशिक्षण, पर्यटन गाइड सेवा कक्ष की स्थापना, पर्यटन गाइड कल्याण समिति का गठन, 60 वर्ष बाद पेंशन योजना शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं।
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कोटा में नशा तस्करी: मिनी टेम्पो से डोडा-चूरा और अफीम पकड़, 2 गिरफ्तार

Kota, Rajasthan:कोटा ग्रामीण पुलिस को ऑपरेशन रूट क्लियरेंस के तहत बड़ी सफलता मिली है। थाना चेचट पुलिस और डीएसटी टीम ने 8 लेन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर नाकाबंदी के दौरान पंजाब नंबर की एक मिनी टेम्पो को पकड़ा। टेम्पो से 9 किलो 500 ग्राम अवैध मादक पदार्थ डोडा-चूरा और 9 ग्राम अवैध अफीम बरामद की गई है। पुलिस ने पंजाब के बठिंडा जिले के दो अंतर्राज्यीय तस्करों मलकीत राम और रमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर के अनुसार तस्कर मिनी टेम्पो में ठेला रखकर पुलिस को चकमा देते थे और नशे की खेप पंजाब से मध्य प्रदेश ले जा रहे थे। टेम्पो को भी जब्त कर लिया गया है।
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कपासण में एक पेड़ माँ के नाम: पर्यावरण प्रेम जगाने वाला भव्य कार्यक्रम

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में हरियालो राजस्थान अभियान के तहत नगर पालिका द्वारा जशमा रोड स्थित गोवर्धन पुरी गौशाला में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम नगर पालिका अधिशासी अधिकारी खेमराज सिंह गुर्जर के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नगर पालिका कार्मिकों और नरेगा श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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SC की बड़ी राहत: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई का आदेश

Noida, Uttar Pradesh:*SC की बड़ी राहत: छात्र प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी कार्रवाई, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले गिरफ्तार लोगों की तुरंत रिहाई का आदेश* जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी *डिजिटल डेटा और सबूत सुरक्षित रखे जाए* सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए। कोर्ट ने प्रदर्शन स्थल से जुड़े सभी सबूत भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सभी CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, वायरलेस संचार और PCR कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके। *याचिकाओं में पुलिस पर बेहद गम्भीर आरोप* चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस पर ज्यादती के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कील लगी लाठियों का भी इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि पैलेट गन चलाने से 19 वर्षीय एक युवक की आंखों की रोशनी चली गई। वकीलों की ओर से बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोली चलाने का मामला भी उठाया गया है *स्वतंत्र जांच के लिए कमेटी बनाने पर विचार करेगा SC* चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में यह छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें वे संविधान से मिले अधिकार के तहत अपनी मांगें उठा रहे थे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अगर जांच के बाद किसी की जवाबदेही तय नहीं होती, तो ऐसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता। कोर्ट ने कहा कि वह हर आरोप की तह में नहीं जा सकता। इसलिए वह इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने के पक्ष में है। हालांकि, उससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जिन राज्यों में हिंसा हुई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई में इन राज्यों के मुख्य सचिव ऑनलाइन पेश होंगे। *छात्रों के लिए Government का नरम रुख* सुनवाई के दौरान इस मामले में छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार का अपेक्षाकृत नरम रुख नजर आया। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के साथ पुलिस ने ज्यादती या बर्बरता की है, तो यह बेहद गंभीर बात है और सरकार भी इसे हल्के में नहीं लेती। तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी ने कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार वाले भी कोर्ट पहुंचे हैं। इसलिए कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि पुलिस का मनोबल बना रहे। तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि असली छात्र ऐसी हिंसा में शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्व छात्रों के आंदोलन में घुस गए होंगे, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसा को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिन पर पहले से बलात्कार और NDPS कानून के तहत मामले दर्ज हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है, लेकिन उससे पहले सरकार को अपने सभी तथ्य और सबूत कोर्ट के सामने रखने का समय दिया जाए। *याचिकाकर्ताओं की दलील* याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, प्रशांत भूषण और हरिहरन पेश हुए। वकीलों ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों, जैसे मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार आदि में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं। वकीलों ने दलील दी कि निहत्थे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वकीलों ने यह भी दावा किया कि मुंबई में एक पुलिसकर्मी का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें वह छात्रों को फर्जी नारकोटिक्स केस में फंसाने की बात करता दिखाई दे रहा है। बिहार से जुड़े मामले में वकील शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एफआईआर वापस ले रही है, लेकिन इसके बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इन बच्चों को तुरंत रिहा किया जाए। वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि पत्थरों से भरा ट्रक सुबह 4 बजे जंतर मंतर कैसे पहुंच गया। उन्होंने पूछा कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यह ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा। वकीलों ने दलील दी कि राज्य के पुलिस विभाग से अपनी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि अदालत की निगरानी में एक एसआइटी का गठन किया जाए।
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SC ने विरोध प्रदर्शन के लिए स्वतंत्र जांच के लिए घोषणा कर दी

Noida, Uttar Pradesh:जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी डिजिटल डेटा और सबूत सुरक्षित रखे जाए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए। कोर्ट ने प्रदर्शन स्थल से जुड़े सभी सबूत भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सभी CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, वायरलेस संचार और PCR कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे, ताकि जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके। याचिकाओं में पुलिस पर बेहद गम्भीर आरोप चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस पर ज्यादती के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कील लगी लाठियों का भी इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि पैलेट गन चलाने से 19 वर्षीय एक युवक की आंखों की रोशनी चली गई। वकीलों की ओर से बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोली चलाने का मामला भी उठाया गया है स्वतंत्र जांच के लिए कमेटी बनाने पर विचार करेगा SC चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में यह छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें वे संविधान से मिले अधिकार के तहत अपनी मांगें उठा रहे थे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अगर जांच के बाद किसी की जवाबदेही तय नहीं होती, तो ऐसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता। कोर्ट ने कहा कि वह हर आरोप की तह में नहीं जा सकता। इसलिए वह इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने के पक्ष में है। हालांकि, उससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जिन राज्यों में हिंसा हुई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई में इन राज्यों के मुख्य सचिव ऑनलाइन पेश होंगे। छात्रों के लिए सरकार का नरम रुख सुनवाई के दौरान इस मामले में छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार का अपेक्षाकृत नरम रुख नजर आया। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के साथ पुलिस ने ज्यादती या बर्बरता की है, तो यह बेहद गंभीर बात है और सरकार भी इसे हल्के में नहीं लेती। उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी ने कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार वाले भी कोर्ट पहुंचे हैं। इसलिए कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि पुलिस का मनोबल बना रहे। तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि असली छात्र ऐसी हिंसा में शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्व छात्रों के आंदोलन में घुस गए होंगे, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसा को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिन पर पहले से बलात्कार और NDPS कानून के तहत मामले दर्ज हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है, लेकिन उससे पहले सरकार को अपने सभी तथ्य और सबूत कोर्ट के सामने रखने का समय दिया जाए。 याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, प्रशांत भूषण और हरिहरन पेश हुए। वकीलों ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों, जैसे मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार आदि में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं। वकीलों ने दलील दी कि निहत्थे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वकीलों ने यह भी दावा किया कि मुंबई में एक पुलिसकर्मी का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें वह छात्रों को फर्जी नारकोटिक्स केस में फंसाने की बात करता दिखाई दे रहा है। बिहार से जुड़े मामले में वकील शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एफआईआर वापस ले रही है, लेकिन इसके बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इन बच्चों को तुरंत रिहा किया जाए। वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि पत्थरों से भरा ट्रक सुबह 4 बजे जंतर मंतर कैसे पहुंच गया। उन्होंने पूछा कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यह ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा。 वकीलों ने दलील दी कि राज्य के पुलिस विभाग से अपनी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि अदालत की निगरानी में एक एसआइटी का गठन किया जाए。
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