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सुकमा में 26 माओवादी ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास अभियान की सफलता दर्ज
ASAman Singh Bhadouriya
Jan 07, 2026 07:11:22
Sukma, Chhattisgarh
पूना मार्गेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत जिला सुकमा में एक बड़ी सफलता दर्ज की गई है। अभियान से प्रभावित होकर माओवादी संगठन से जुड़े 07 महिला सहित कुल 26 माओवादी कैडरों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेते हुए रक्षित आरक्षी केंद्र, सुकमा में आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी PLGA बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन एवं AOB क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इन पर कुल 64 लाख रुपये का घोषित इनाम था। आत्मसमर्पित कैडरों में CYPCM-01, DVCM-01, PPCM-03, ACM-03 एवं पार्टी सदस्य-18 रैंक के माओवादी शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक व डीआईजी की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण
यह आत्मसमर्पण पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण एवं डीआईजी कार्यालय सुकमा से सुरेश सिंह पायज की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चल रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों और पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई है।
कई बड़ी नक्सली वारदातों में रहे हैं शामिल
आत्मसमर्पित माओवादी जिला सुकमा, माड़ क्षेत्र तथा सीमावर्ती ओड़िशा के कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। इनमें वर्ष 2017 का सोनाबेड़ा–कोरापुट मार्ग आईईडी विस्फोट, 2020 का मिनपा मुठभेड़, 2021 का टेकलगुड़ा एम्बुश, तथा 2023 में जगरगुण्डा क्षेत्र में पुलिस पार्टी पर हमला जैसी बड़ी घटनाएं शामिल हैं, जिनमें अनेक सुरक्षा बलों के जवान शहीद हुए थे।
लगातार दबाव से कमजोर हुआ माओवादी संगठन
पुलिस के अनुसार अति संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, तेज नक्सल ऑपरेशन, तथा मजबूत आसूचना तंत्र के चलते माओवादी संगठन पर निरंतर दबाव बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है और कैडर हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण का रास्ता अपना रहे हैं।
‘पूना मार्गेम’ बना भरोसे का माध्यम
‘पूना मार्गेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान माओवाद से जुड़े भटके हुए युवाओं और महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और विकास से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर सामने आया है। आत्मसमर्पित कैडरों ने हिंसा त्याग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है।
सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका
माओवादियों को मुख्यधारा में लाने में डीआरजी सुकमा, इंटेरोगेशन शाखा, विआशा सुकमा, आरएफटी सुकमा तथा सीआरपीएफ की 02, 159, 201 कोबरा, 212, 217 और 226 वाहिनी की आसूचना शाखाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा लाभ
सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को शासन की नीति “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025” के तहत प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम राशि, तथा अन्य पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
शेष कैडरों से अपील
सुकमा पुलिस ने शेष माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और विकास के रास्ते को अपनाएं तथा ‘पूना मार्गेम’ अभियान से जुड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। पुलिस का कहना है कि नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में अभियान निर्णायक मोड़ पर है।
बाईट- किरण चव्हाण, एसपी सुकमा
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