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कैग की रिपोर्ट से बिहार में राजस्व करोड़ों रुपए की हानि उजागर
RZRajnish zee
Feb 27, 2026 06:48:14
Patna, Bihar
Anchor बिहार विधानसभा में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का बिहार में जिला परिवहन कार्यालय की कार्य पद्धति को लेकर रिपोर्ट सदन पटल पर रखा गया है वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इस रिपोर्ट को रखा. कैग रिपोर्ट में कई तरह की कमियों का उजागर किया है. कैग रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर राजस्व हानि का भी खुलासा किया है. कैग की रिपोर्ट में लाइसेंस पर सवाल उठाया गया है. कैग रिपोर्ट में बिहार में मोटर चालक प्रशिक्षण विद्यालय द्वारा जारी की जा रही चालक लाइसेंस पर सवाल खड़ा किया है सारथी डेटाबेस के अनुसार 910 आवेदकों में से 856 आवेदकों को लाइसेंस दे दिया गया जबकि इसमें से केवल 10 आवेदक ही भौतिक रूप से उपस्थित हुए थे सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि मोटर चालक प्रशिक्षण विद्यालय सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे के बिना ही चलाई जा रहे हैं. कैग रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि जिला परिवहन कार्यालयों और मोटर वाहन निरीक्षकों ने 18851 वाहनों के पंजीकरण के समय 861 अधिकृत डीलरों द्वारा प्रस्तुत वाहनों से सूचनाओं के सत्यापन में उचित ध्यान नहीं दिया जिसके कारण 4 करोड़ 35 लाख राजस्व की कम वसूली हुई और 18 करोड़ 11 लाख की राशि का जुर्माना भी नहीं लगाया गया. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्व क्षमा योजना जो पुराने कर चूककर्ता वाहनों के लिए था के तहत नए खरीदे गए और पंजीकृत 539 व्यवसायिक वाहनों ट्रैक्टर के पंजीकरण की अनुमति देने से एक करोड़ 62 लख रुपए की राजस्व की हानि हुई... विपक्ष का कहना है कि कैग की रिपोर्ट के जरिए वित्तीय अनियमितता और कुप्रबंधन उजागर हुआ है, विपक्ष ने कहा कि सभी विभागों में भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है और यह सृजन घोटाला से भी बड़ा घोटाला है, आरजेडी के विधायक ने कहा कि डीबीटी घोटाला भी सामने आ रहा है. 482423 वाहनों के परमिट की वैधता समाप्त होने के बावजूद परमिट रद्द करने के लिए नोटिस जारी नहीं किया गया वहीं स्थाई परमिट जारी के बिना 42121 परिवहन वाहन को पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया जिससे 28 करोड़ 9 लाख रुपए की राजस्व की हानि हुई. कैग ने अपनी रिपोर्ट में 47223 वाहनों में से 22672 लगभग 90% वाहनों को फिटनेस का प्रमाण पत्र दिया गया था जहां प्रावधानों का उल्लंघन किया गया. इसके अलावा 66345 परीक्षण जांच किए गए वाहनों में से 35921 वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र खत्म हो गए थे जिससे सड़क और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा था और फिटनेस या नवीनीकरण शुल्क नहीं लिये जाने से 2 करोड़ 27 लाख रुपए की राजस्व से वंचित हो गया. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिला परिवहन कार्यालय पटना ने 45 लाख 6000 रुपए की राजस्व प्राप्ति में से सरकारी खाते में 28 लाख 95 हजार प्रेषित ही नहीं किये गए. इसके अलावा 238 वाहनों के मामले में जिला परिवहन कार्यालय द्वारा वार्षिक त्रैमासिक एक मुश्त कर संग्रह के परिणाम स्वरुप 75 लाख 5 हजार रुपए के राजस्व की कम वसूली हुई. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है जिला परिवहन कार्यालय द्वारा 1255 निर्माण उपकरण वाहनों के पंजीकरण के समय जो नमूना जांच किया गया वहां कर की आंशिक वसूली के कारण 20 करोड़ 41 लख रुपए की राजस्व की हानि हुई है.. इस मुद्दे पर सत्तापक्ष के घटक दलों ने कहा कि कैग की रिपोर्ट प्रक्रिया के तहत सदन पटल पर रखा जाता है और यह प्रारम्भिक रिपोर्ट है इसके आधार पर प्रक्रिया के तहत सरकार कार्रवाई करती है. इसके अलावा जिला परिवहन कार्यालय में 7649 परिवहन वाहन बकाया मोटर वाहन कर और जुर्माना राशि 50 करोड़ 40 लाख रुपए का भुगतान किया बिना ही सड़कों पर चल रहे थे. कैग ने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जिला परिवहन कार्यालय सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण में पांच डीलरों पर अपने 38 उप डीलरों को ₹52183 दोपहिया वाहनों की बिक्री के लिए व्यापार कर नहीं लगाया गया जिसके फलस्वरुप 78 लाख 27 हजार रुपए की राजस्व की कम वसूली हुई. वहीं वाहनों के स्वामित्व के हस्तांतरण के 13113 मामलों में वाहनों के खरीदारों द्वारा आवेदन जमा करने में देरी के कारण अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया जिसके फल स्वरुप 2 करोड़ 9 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि मिलता जिसका नुकसान हुआ. कैग ने अपनी रिपोर्ट में जिला परिवहन कार्यालय में किस प्रकार से अनियमित की जाती है उसका जिक्र करते हुए कहा कि 858 वाहनों को जिला परिवहन कार्यालय द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र दिया गया जिसने अपराधों के लिए वाहनों पर कई ई चालान जारी किए थे. 2020-21 से 2023-24 की अवधि के दौरान राज्य में जारी ई-चालान के भुगतान में बकाया 4.40% से बढ़कर 39.21% हो गया. ई चालान के संबंध में सरकारी राजस्व का बकाया 14.30 करोड़ से बढ़कर 3 वर्षों में 109.82 करोड़ पहुंच गया. 203.36 करोड़ के कुल 80901 ई चालान निपटान के लिए लंबित थे. कैग ने अपनी रिपोर्ट में दस्तावेजों के सत्यापन में किए गए विलंब का भी जिक्र किया है वाहनों के पंजीकरण के लिए 1097 आवेदनों के मामले में मोटर वाहन निरीक्षक स्तर पर पंजीकरण दस्तावेज के सत्यापन में 183 से 1645 दिनों की देरी हुई. कैग ने कहा है कि बिहार लोक सेवा अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सभी 20 सेवाओं में से 9 में इन सेवाओं को प्रदान करने में 1973 दिनों तक देरी हुई है.
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