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UGC पर अदालत-नीतियों के बीच कानून कैसे बनेगा?
RKRANJAN KUMAR
Jan 29, 2026 13:34:16
Katihar, Bihar
यूजीसी मुद्दा विशेष --- पहले साफ कर लेना चाहिए कि यह कानून नहीं है. और कानून तभी होगा जब संसद से पास होगा -- डाक्टर राम प्रकाश महतो, पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री, बिहार यूजीसी मुद्दे पर पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री डाक्टर राम प्रकाश महतो ने कहा कि मामला सरकार से नहीं है। एक बात तो पहले साफ कर लेना चाहिए कि यह कानून नहीं है और कानून तभी होगा जब संसद से पास होगा । यह कानून नहीं है और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है । विरोध करने वाले लोग प्रतिनिधि को गाली दे रहे हैं, देश के बड़े नेता को क्या-क्या कह रहे हैं, उनका जाति सूचक शब्द से उनको संबोधित कर रहे हैं . ऐसी कोई बात नहीं है । उन्होंने आगे कहा कि 1956 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन हुआ है । कानून के तहत, स्टैच्यूटरी एक्ट 1953 में ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग बना है । लेकिन बाद में यह कानूनी रूप यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन 1956 में बना । पूरे देश में विश्वविद्यालय का क्या मानक होगा, क्या परीक्षा होगी, क्या विषय होगा, यह सब विश्वविद्यालय ग्रांट कमीशन पूरे देश के लिए तय करता है । मामला यह यहां से बिगड़ा जब 2016 और 2019 में। जब 2016 में रोहित वेमुला, जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी में, सेंट्रल यूनिवার্সिटी में वो रिसर्च कर रहा था। उस समय स्मृति ईरानी को याद कीजिए बहुत मामला बड़ा उछला था। उसका अनुदान बंद कर दिया, हॉस्टल का रूम खाली करा दिया और बाद में उसने आत्महत्या कर ली। ये मामला उठा, उसकी मां पूछती रही पूरे देशवासियों से कि मेरे बेटे का क्या होगा ... फिर 2019 में पायल तड़वी, ये बीवाईएल नायर हॉस्पिटल बॉम्बे में रिसर्च पीजी कर रही थी। उसका सीनियर तीन डॉक्टर उसको ह्यूमिलिएट किया और वो भी रूम में अपना फांसी लगा ली। इसी दोनों के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया। वर्ग के आधार पर, जाति के आधार पर जो भेदभाव है, इसको कैसे... जो इस तरह से प्रताड़ना है, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है - मेंटली, बॉडिली, फिजिकली सब टॉर्चर हो रहा है, अपमानित किया जा रहा है। इसी पर लंबी बहस हुई, तो बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) को कहा कि एक अध्यादेश लाइए...। जबकि यूनिवर्सिटी में पहले से 2012 से एंटी-डिस्क्रिमिनेटरी रूल (anti-discriminatory rule) बना हुआ है कि अगर कोई डिस्क्रिमिनेशन करेगा किसी एक छात्र का दूसरे से, एक समाज का लोग दूसरे से, तो उसके लिए पहले से 2012 में एक गाइडलाइन बना हुआ है।
"...और ये... जो लोग आंदोलन कर रहे थे, हमको सबको उनसे भी रिक्वेस्ट करना है कि 'This is not an Act'. ये रूल है, जो यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने नहीं बनाया है, सुप्रीम कोर्ट के कहने पर... सरकार तो कहीं नहीं है इसमें बीच में। अब तो आज तो हम सुन रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने दिया है कि अब लाइए, फिलहाल इसको रोकते हैं। अब फिलहाल 2012 लागू रहेगा और कानून जो... जबकि कानून ड्राफ्ट करके सुप्रीम कोर्ट से अप्रूवल करा के तब ये रूल्स... जैसे एक्ट है, स्टैच्यू है, रूल है... रूल्स बनाया है।" क्या जरूरी है भाई आंदोलन करके... 10 परसेंट का आरक्षण मिला था । 2018 में, मोदी जी दिए थे, कोई विरोध किया था? आप भी तो आर्थिक... आरक्षण चाहे जातिगत हो या आर्थिक हो या सामाजिक हो, तो आप भी तो आरक्षण...। उन्होंने कहा कि इस पर इस तरह का विरोध करने की आवश्यकता नहीं थी। कोई जरूरी नहीं है, ये अनावश्यक ये हुआ है। यूनिवर्सिटी चलेगा, तो यूनिवर्सিটি को एक्ट के तहत चलेगा और समूचा उसका कोई ना कोई कंट्रोलिंग अथॉरिटी होगी। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो आप सर्वोच्च न्यायालय गए हैं, तो वहां 2012 में पहले से है एंटी डिस्क्रिमिनेशन लॉ (Anti-discrimination law)। तो इस तरह से हमको नहीं लगता है कि इस तरह के, इस इशू (issue) पर, यूजीसी (UGC) के रूल पर सरकार के खिलाफ चेतावनी, सरकार के दोनो मुखिया को गाली...हमको उससे... गाली तो सरकार में जो रहता है... उसको बिना बात का ही दिया जाता है। उन्होंने अटल जी जिक्र करते हुए कहा कि अटल जी बराबर कहते हैं, 'सरकार चाहे जिसकी हो, सरकार का चरित्र एक जैसा होता है।' इसलिए वो सब सरकार को सुनना पड़ता है। लेकिन इसमें सरकार... अभी मलिक एडवोकेट बोल रहे थे, हम अभी दो-तीन दिन पहले इसी क्रम में सुने थे... मतलब सरकार इसमें कहां है ? ये तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ये रूल बनाया यूजीसी ने। तो यूजीसी के पास गुहार लगाना चाहिए था। और रही बात कि अगर आपके मन में ऐसा कुछ नहीं है, भेदभाव जातिगत आधार पर, लिंग के आधार पर, जात के आधार पर, उसकी दिव्यांगता के आधार पर, विकलांगता के आधार पर, आर्थिक रूप से पिछड़ा है उसके आधार... एक चीज है सब... उन्होंने आगे कहा कि ये जो अभी मामला है, ये सुप्रीम कोर्ट वर्सेस यूजीसी था । ये सुप्रीम कोर्ट ने डायरेक्शन दिया, यूजीसी ने ड्राफ्ट बनाया। अब सुप्रीम कोर्ट को समीक्षा करनी चाहिए थी कि... और ई अनावश्यक इसमें सरकार... सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। सुप्रीम कोर्ट गया ही है, तो अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही यूजीसी ने 2012 के अलावे एक रूल बनाया है, तो अब उसकी समीक्षा हो जाएगी..... बाइट -- डाक्टर राम प्रकाश महतो, पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री, बिहार रिपोर्ट -- रंजन कुमार , कटिहार
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