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धर्मांतरण के बाद पुराने धर्म पर लौटने पर अनुसूचित जाति दर्जा नहीं बहाल होगा
ASArvind Singh
Mar 26, 2026 13:37:22
Noida, Uttar Pradesh
'धर्मांतरण करने के बाद अगर कोई पुराने धर्म मे लौटे तो क्या SC का दर्जा मिलेगा', कोर्ट ने दिया जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों दिए अपने फैसले में साफ किया है कि अगर कोई दलित धर्म परिवर्तन के बाद हिंदू, सिख, बौद्ध के अलावा किसी दूसरे धर्म को अपनाता है तो धर्मांतरण के साथ ही उसका अनुसूचित जाति का दर्जा खत्म हो जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्मांतरण के बाद अपने पुराने धर्म ( हिंदू, सिख या बौद्ध) में लौटता है तो क्या उसका अनुसूचित जाति का दर्ज़ा बहाल हो सकता है। अगर हाँ तो उसके लिए क्या प्रावधान है
तीन शर्तों का पूरा करना ज़रूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस पहलू को भी स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्मांतरण के बाद पुराने धर्म ( हिंदू, सिख या बौद्ध) में लौटता है तो उसे अनुसूचित जाति का दर्जा पाने के लिए इन तीन शर्तों का पालन करना होगा:-
उसे यह साबित करना होगा कि वो शुरू से उस जाति में था जो संविधान के अनुसूचित जाति आदेश, 1950 में अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज है
उसके पास यह विश्वसनीय सबूत होने चाहिए कि उसने हक़ीक़त में अपने पुराने धर्म को अपना लिया है और वो अपनी मूल जाति के रीतिरिवाज, धार्मिक कर्तव्य और परंपराएं निभा रहा है। साथ ही उसे यह साबित करना होगा कि जिस धर्म में उसने पहले धर्म परिवर्तन किया था उसे पूरी तरह छोड़ दिया है, अब उससे पूरी तरह संबंध तोड़ लिया है。
सिर्फ उसकी ओर से पुराने धर्म मे लौटने का दावा करना पर्याप्त नहीं होगा, उसे यह भी साबित करना होगा कि उसके मूल जाति के लोगों ने उसे स्वीकार कर लिया है और वो भी उसे अब अपने समुदाय का सदस्य मानते है
तब SC का दर्जा नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अनुसूचित जाति का दर्जा पाने के लिए उपरोक्त तीनों शर्त ज़रूरी है। इन बातों को साबित करने की ज़िम्मेदारी भी उसी व्यक्ति की होगी। अगर इनमे से एक भी शर्त पूरी नहीं हुई तो वो दावा नहीं माना जाएगा。
*कोर्ट के सामने मामला क्या था*
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले और हिंदू से ईसाई बने एक शख्स चिंथडा आनंद की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है।10 साल से ईसाई धर्म की प्रैक्टिस कर रहे चिंथडा ने कुछ लोगों पर हमला करने और जातिसूचक गालियों के आरोप लगाते हुए SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। इसके खिलाफ आरोपियों ने आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट का रूख किया था। उन्होंने दलील दी कि चिंथडा ईसाई धर्म अपना चुके है और 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहे है। लिहाजा संविधान में दी गई व्यवस्था मुताबिक वो अनुसूचित जाति के नहीं माने जा सकते। हाई कोर्ट ने आरोपियों की दलील से सहमति जताते हुए इस केस को रद्द कर दिया था। आनंद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा था कि धर्मांतरण के बाद उनका अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं रहेगा.
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