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जगद्गुरु रामभद्राचार्य: जेएनयू नारे और बांग्लादेश हिंसा पर कड़ा रुख; रामकथा से धर्म-मर्यादा संदेश
DGDeepak Goyal
Jan 09, 2026 15:38:55
Jaipur, Rajasthan
तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने एक ओर जहां श्रीराम कथा के मंच से भक्ति, धर्म और मर्यादा का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बेबाक राय रखी। दिल्ली दंगों के आरोपियों को जमानत न मिलने, जेएनयू में विवादित नारेबाजी और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों और कृष्ण जन्मभूमि को लेकर उन्होंने सरकार और व्यवस्था से सख्त रुख अपनाने की जरूरत बताई। जेएनयू में विवादित नारेबाजी को लेकर पूछे गए सवाल पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अब जेएनयू पर नियंत्रण जरूरी हो गया है। वहां के लोग सीमाएं पार कर चुके हैं और यह स्थिति देशहित में ठीक नहीं है। वहीं बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि वहां की मौजूदा अंतरिम सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता और भारत सरकार को इस मामले में कठोर कदम उठाने चाहिए। सीकर रोड स्थित नींदड में चल रही दस दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन महाराज जी ने हनुमान जी के जीवन प्रसंग के माध्यम से भक्ति, समर्पण और सेवा का गूढ़ अर्थ समझाया। उन्होंने ऋष्यमूक पर्वत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस तरह हनुमान जी साधु वेश में भगवान राम और लक्ष्मण से मिलते हैं। राम-लक्ष्मण के तेज और करुणा को देखकर हनुमान जी को ईश्वर का अनुभव होता है। वे चरणों में गिरते हैं, भगवान राम उन्हें गले लगाते हैं और फिर हनुमान जी दोनों को अपनी पीठ पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। यही प्रसंग सीता की खोज और मित्रता के सूत्रपात का आधार बनता है। राजा बलि ने वचनों की मर्यादा के कारण अपनी पीठ दी थी, लेकिन हनुमान जी ने अपनी प्रसन्नता और भक्ति के लिए राम-लक्ष्मण को पीठ पर बैठाया। यह भगवान राम के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक है। वामन अवतार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संसार एक रंगमंच की तरह है, जहां निर्देशक पीछे रहता है और पर्दा आगे चलता है। जिसने ईश्वर को अपने पीछे कर लिया, उसे कोई हरा नहीं सकता। धर्म को परिभाषित करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि धर्म रथ के दो पहिए शौर्य और धैर्य हैं, जबकि ईश्वर का भजन उसका सारथी है। उन्होंने जीवनशैली पर भी संदेश देते हुए कहा कि भोजन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए और भजन असीमित। श्रीराम कथा में मंत्री झाबर सिंह खर्रा, जवाहर सिंह बेढम और बालमुकुंदआचार्य ने कथा श्रवण कर आरती के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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