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गांधी मैदान की पिंक बस से महादलित बेटी रागिनी मांझी महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी
SKSunny Kumar
Jan 31, 2026 06:48:45
Patna, Bihar
गांधी मैदान की पिंक बस से बदली सोच की दिशा: महादलित समाज की बेटी रागिनी मांझी बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल
पटना।
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस पर आयोजित परेड में इस बार परिवहन विभाग की पिंक बस झांकी ने खास ध्यान खींचा। महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर पेश करती इस झांकी को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन इस झांकी की सबसे बड़ी ताकत उसका संदेश नहीं, बल्कि उसे चलाने वाली महिला चालक रागिनी मांझी की संघर्षभरी कहानी है。
राज्य सरकार की पिंक बस योजना के तहत ایسی बसیں چलाई जा रही ہیں، जिनमें चालक, उपचालक, टिकट चेकर सहित पूरा स्टाफ महिलाएं होंगी। हालांकि योजना की शुरुआत में महिला बस चालकों की कमी एक बड़ी चुनौती थी। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए पटना के पुनपुन की रहने वाली महादलित मुसहर समाज की पांच महिलाओं ने इस योजना से जुड़ने का फैसला लिया। इन्हीं में एक नाम है—रागिनी मांझी。
गरीबी, ताने और सामाजिक दबाव के बीच लिया बड़ा फैसला...
यह सिर्फ पढ़ाई नहीं थी,
यह अपने अस्तित्व की लड़ाई थी。
रात्रि की ट्रेनिंग,
दूर-दराज़ की क्लास,
कई दिनों तक घर से बाहर रहना—
हर कदम पर सवाल थे।
लेकिन रागिनी कहती हैं—
“अब डर नहीं लगता।”
रागिनी का परिवार वर्षों से अभावों में जीता आया है। उनके दादा पटना नगर निगम में वर्षों तक सफाई कर्मी के रूप में काम करते रहे हैं। नौ बच्चों के परिवार में आर्थिक तंगी हमेशा रही, लेकिन पढ़ाई को कभी बोझ नहीं समझा गया। रागिनी के दादा कहते हैं कि उन्होंने अपनी पूरी कमाई बच्चों की शिक्षा पर लगा दी, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि अगली पीढ़ी भी वही जिंदगी जिए。
पुनपुन रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले सैकड़ों महादलित परिवारों की तरह रागिनी का परिवार भी सीमित संसाधनों में रहता है। 25 लोगों का परिवार आज भी चार कमरों के एक छोटे से मकान में रहता है。
“बेटी है, रात को बाहर मत भेजो”
रागिनी की मां बताती हैं कि बेटी को पढ़ाने और ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजना समाज को रास नहीं आया। लोग कहते थे—बेटी है, रात को बाहर मत भेजो, कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहती है, यह ठीक नहीं है। शादी कर दो, पढ़ने से क्या होगा। लेकिन परिवार ने सामाजिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया。
जिस बस्ती में लड़कियां मुश्किल से पांचवी कक्षा तक पढ़ पाती हैं, वहीं रागिनी ने ग्रेजुएशन पूरा किया। उनका सपना सिर्फ बस चलाना नहीं, बल्कि आगे चलकर प्रोफेसर बनना है。
परिवार भावुक होकर कहता है—
“हम मजदूर हैं तो क्या,
क्या हमारी बेटी भी मजदूर ही रहेगी?
हम ऐसा नहीं चाहते।
इसलिए हमने अपनी कमाई का
ज्यादातर हिस्सा
बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में लगाया。”
नारी गुंजन संस्थान से जुड़कर
रागिनी को जानकारी मिली
कि महिला बस चालकों की जरूरत है。
उन्होंने फॉर्म भरा,
औरंगाबाद समेत कई जगह
दो बार ट्रेनिंग ली。
अब एक आखिरी ट्रेनिंग बाकी है。
उसके बाद
पटना की सड़कों पर
पिंक बस की स्टेयरिंग
रागिनी मांझी के हाथों में होगी।
सरकार और पुलिस पर भरोसे से बढ़ा आत्मविश्वास
जी मीडिया से खास बातचीत में रागिनी मांझी कहती हैं,
“मुझे सरकार पर भरोसा है। आज हालात बदल गए हैं। एक फोन कॉल पर पुलिस पहुंच जाती है। इसलिए रात में घर लौटने या कहीं जाने में अब डर नहीं लगता। पुलिस प्रशासन पर भरोसा है, सरकार पर भरोसा है।”
रागिनी बताती हैं कि उन्होंने नारी गुंजन संस्थान से जुड़कर महिला बस चालकों की बहाली की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने आवेदन किया और औरंगाबाद समेत अन्य स्थानों पर दो चरणों में प्रशिक्षण लिया। एक अंतिम ट्रेनिंग बाकी है, जिसके बाद वह पटना की सड़कों पर नियमित रूप से पिंक बस चलाती नजर आएंगी。
परिवार की आंखों में खुशी के आंसू
गणतंत्र दिवस पर जब गांधी मैदान में पिंक बस झांकी को पहला पुरस्कार मिला और रागिनी उसका हिस्सा बनीं, तो परिवार की आंखें भर आईं। रागिनी की मां, जो खुद खेतों में मजदूरी कर दिन में 150 से 200 रुपये कमाती हैं, कहती हैं—हम मजदूर हैं तो क्या हमारी बेटी भी मजदूर ही रहेगी? हमने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और परवरिश पर लगाया, ताकि वे हमसे आगे बढ़ सकें。
बदलते बिहार की तस्वीर
रागिनी मांझी की कहानी सिर्फ एक महिला बस चालक की नहीं, बल्कि उस बदलते बिहार की तस्वीर है, जहां सरकारी योजनाएं और सामाजिक समर्थन मिलकर उन बेटियों को आगे बढ़ने का मौका दे रहे हैं, जिन्हें कभी घर की चारदीवारी तक सीमित कर दिया जाता था。
गांधी मैदान की पिंक बस झांकी ने यह साबित कर दिया कि जब हौसले को मौका मिलता है, तो वह समाज की दिशा बदलने की ताकत बन जाता है। पुनपुन पटना से सनी कुमार की रिपोर्ट....
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FollowJan 31, 2026 08:04:47Noida, Uttar Pradesh:This painting technique is something else
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FollowJan 31, 2026 08:03:11Noida, Uttar Pradesh:This is the 3D floor illusion that makes it feel like the floor is moving
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