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नितिन नवीन: पिता की मौत के बाद एक्सीडेंटल राजनीति से शुरू हुआ सफर समाज को एक साथ लाने का संकल्प
PKPRINCE KUMAR KUSHWAHA
Mar 28, 2026 12:48:27
Patna, Bihar
नितिन नवीन के कहा मेरे पिता जी की मृत्यु हुई तब मैं एक्सीडेंटल तौर पर राजनीती में आया तब से हमे इस सहाय सदन का आशीर्वाद मिलता रहा है
मेरा पहला राजनीति कार्यक्रम भोपाल में हुई थी
मैंने कभी अभिनंदन के कार्यक्रम को स्वीकार नहीं किया कारण यह था कि उस आदमी के मन में एक अलग भाव चल जाता है और कल एक बहुत अच्छा बात कल हमारा पटना में एक बड़ा आयोजन हम करते हैं श्री रामनवमी का शोभायात्रा का उसमें मनोज तिवारी जी आए थे और उन्होंने एक गाना गया था कि हम बिहारी हैं थोड़े संस्कारी हैं तो मुझे बहुत अच्छी यह बात उसने यह लगी थी जब मीडिया ने उनसे पूछा कि आप बिहार को थोड़ा संस्कारी क्यों बोल रहे हैं तो मुझे जो उनका जवाब था वह जवाब हर बिहार को और हर समाज के जो हमारे काम करने वाले लोग हैं जो सार्वजनिक जीवन में काम करते हैं या किसी भी प्रकार से आप नेतृत्व करते हो चाहे वह अभियंताओं के संगठन में नेतृत्व कर रहे हो या किसी भी पद को आप पाते हो तो उनका जो जवाब था वह जवाब मुझे बहुत अच्छा लगा की संस्कारी थोड़ा इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि बिहारी अहंकारी नहीं होता है तो मुझे यह बात बहुत ही अच्छी लगीऔर मैं
युवा साथी मेरी बड़ी संख्या में मात्र शक्तियों बैठी है मेरी बहन है क्योंकि हम सबको अगर आगे चलना है और सही में एक जज्बा एक मन में भाव है कि हमको समाज को आगे बढ़ाना है तो कहीं ना कहीं अपना दिल बड़ा करना पड़ेगा सबको लेकर चलने का मदार पैदा करना पड़ेगा
मैं यह जरूर चाहूंगा समाज के कोई भी संगठन का बैठक होता है मुझे बुलाया जाता है मैं चला जाता हूं और मेरे जाने का मन नहीं होता है केवल कि शायद चाहे कोई भी संगठन का अपने समाज का किसी भी प्रकार का संगठन हो एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब समाज का पूरा संगठन एक साथ एक सूत्र में रहेगा और कहते हैं जब एक सूत्र में भेंगे तभी उसको अवेलेबल और गंगा की तरह उसकी परिभाषा दिया गया है जब अलग-अलग दिशाओं में बहने लगते हैं तो वह पत्थर अविरल नहीं नजर आती और मेरा यह मानना है कि मैं अगर आज यहां पर उपस्थित हुआ हूं तो एक-एक माता बहने अपने अभिभावक अपने विवाह साथी अपने सभी वरिष्ठों से की चलिए अगर आपके बेटे को आपके भाई को आपके पुत्र को पार्टी ने अगर इतना बड़ा मुकाम दिया है तो कुछ बड़ा करने के लिए दिया है बहुत सामान्य काम करने के लिए नहीं दिया
खुद में यह लगता है कि अगर मैं किसी समाज से किसी विषय से आता हूं तो समाज को मैं हमेशा जोड़ने का प्रयास करूंगा समाज को एक साथ लेकर चलने का प्रयास करूंगा और समाज कोई सही दिशा में ताकि हमारे समाज को जो हमारी प्रतिष्ठा रही है जिस समाज को डॉ राजेंद्र प्रसाद जैसा शख्सियत मिले मैं उदाहरण देने लगूंगा तो कई लोग बोलेंगे कि उड़ीसा से लेकर महाराष्ट्र तक आपको बताना पड़ेगा बिहार से शुरू करेगा तो मैं तो यही कहूंगा कि जो भी है यह समाज अपने आप को बुद्धिजीवी के रूप में हमेशा रखा है पर बुद्धिजीवी का मतलब केवल हमारे घर में बुद्धिजीवी पैदा नहीं हो मतलब मेरी बात आप समझ गए होंगे हमें भी बुद्धिजीवी अगर है तो जो हम समाज से अपेक्षा करते हैं वह सब अपेक्षा मेरे घर में भी मुझे पूरी करनी हैइस बात के साथ आगे बढ़ाना पड़ेगा
लेकिन मुझे वह भी चीज याद है कि किस प्रकार से चित्रगुप्त आदि मंदिर के निर्माण का शुरुआत किस प्रकार से हुआ डॉ नरेंद्र प्रसाद उसे समय शुरूआत किया और कई लोग उससे जुड़े और कहीं ना कहीं फिर बाद में हमारे अभिभावक आर के सिन्हा ने उसका बीड़ा उठाया और आज चित्रकूट आदि मंदिर बनाकर एक भविष्य रूप ले लिया जो हम सबको कहीं ना कहीं गर्व का एहसास कराता है और उसमें समाज का भी योगदान रहा है।
कि आपकी भी हमारे से अपेक्षा होगी और हर पाप को हर भाई को यह अधिकार है कि वह अपने पुत्र और भाई से वह अपेक्षा रखें हर माता और बहनों को अधिकार है कि वह अपने भाई और बेटा से पूरी अपेक्षा रखें क्योंकि उसने जन्म ही नहीं दिया है उसने उसका लालन-पालन किया है तो मैं उसी भाव से आपके सामने यह बात रखता हूं कि मैं आपकी अपेक्षाओं पर खड़ा करने का हमेशा प्रयास करूंगा पर हमेशा इस बात का ध्यान रखिएगा कि मैं जहां पहुंचा हूं उसमें आपका आशीर्वाद है और आगे बडूंगा और है तो निश्चित रूप से उसने आपका सहयोग वाला आशीर्वाद और भी चाहिए इसलिए मेरे पास किसी भी एक गलती करने का भी मौका नहीं है मैं आपका बेटा जब तक हूं जब तक आपका भाई हूं तो कई गलती कर सकता हूं पर जब पार्टी और जब समाज में बड़ा स्थान अगर मिल जाता है तो एक गलती करने का भी अधिकार नहीं मिलता है इसलिए आपको हम मेरे प्रहरी के रूप में मेरा संरक्षक के रूप में इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा कि मेरा बेटा और भाई से कोई ऐसी गलती नहीं हो जाए जिसके कारण जो बड़े उद्देश्य से हम लोग आगे बढ़े हैं उसको कहीं ना कहीं बीच ही रास्ते में हमें कंप्रोमाइज करना पड़ जाए
हमें भी इस दौड़ में सबको दौड़ना पड़ेगा सबको अपने-अपने समय का पुरुषार्थ करना पड़ेगा सबको अपने समय का संघर्ष करना पड़ेगा मैं पिताजी के बाद एक्सीडेंटल राजनीति में आया हूं मैं इस बात को हमेशा इसलिए बात पूरी तरह से कहता हूं कि मैं इस बात के हिसाब से बाहर नहीं आता हूं
आपके सामने है मैं उसे पर कोई टिप्पणी नहीं करता वह 20 साल भी मैं हर दिन यह जरूर प्रयास किया कि मेरे किसी काम से मेरे पिताजी का सम्मान नहीं घटा होगा तो पिछले 20 वर्षों में कई के काम हुए होंगे कहीं का काम नहीं हुआ होगा कई की उम्मीदें पूरी हुई होगी कई उम्मीदें नहीं पूरी हुई होगी लेकिन इतना जरूर विश्वास के साथ इस मंच पर आज का सकता हूं कि मेरे कारण समाज को कभी कलंकित होने का मौका नहीं मिला होगा मेरे के कारण समाज का सिर झुका नहीं होगा
मुझे कई जगह से फोन आते हैं कई जगह से समझ मुझे सामाजिक कामों में सारंग साहब के कारण निर्मल जाकर कारण कई बार राष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ जाने का मौका मिला लेकिन मैं संगठन के काम नहीं ज्यादा पार्टी के काम नहीं जाते रक्षा बस रहा तो उसी में समय ज्यादा दिया लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि हमारे अभी बाबा के यहां बैठे हैं वह दिल्ली आते हैं मिलने में कभी-कभी तकलीफ होती है तो मैं हमेशा कहता हूं कि थोड़ा हमको आप नियमित रूप से समय के साथ हम कोशिश को बंधेंगे तो आपका भी सम्मान कर पाएंगे और आपको समय भी दे पाएंगे क्योंकि क्या है जवाब देही जो है उसको अगर पूरा करना है तो उसको पूरा करने के लिए पूरे तरह से नए सिरे से काम करना है अब तक विधायक के रूप में बिहार में मंत्री के रूप में या पटना के कार्यकर्ता के रूप में काम किया तो कहते हैं ना पहले एक छोटे से तालाब में काम कर रहे थे अब एक बहुत बड़ा विशाल चीज मिला है तो उसमें उतना ही समय देना पड़ेगा उतना ही समर्पण देना पड़ेगा और उतना ही संकल्प के भाव से काम करेंगे तभी आपको फिर से गर्भ का एहसास कर पाएंगे इसलिए मैं समय को लेकर थोड़ा परेशानी जरूर है हमारे कहिए विवाद है जो दिल्ली पहुंच जा रहे हैं अब पहुंच कर रहे हैं तो भीड़ है तो मनीष भैया भी यहां बैठे हैं मैं उनको भी उसे समय उसे समय नहीं दे पाया तो थोड़ा है मुझे परेशानी लगे मैं उसको जल्दी थोड़ा व्यवस्थित करूंगा जिससे कि आपको जिस प्रकार से पटना में मिलने में कोई तकलीफ नहीं होती थी दिल्ली में भी मिलने में वह तकलीफ नहीं हो
अपने पिता को याद करते हुए कहा यह व्यक्ति इतना क्यों रो रहा है इतना क्यों भाव भी हो रहा है मुझे उसे चीज का एहसास नहीं था लेकिन काम करने के दौरान काम सीखने के दौरान मुझे यह जरूर लगा कि कैसे उन्होंने एक-एक व्यक्ति को अपने साथ परिवार के भाव से जोड़ लिया था मैं पिछले 20 वर्षों में का काम किया तो मैंने यह जरूर प्रयास किया कि व्यक्ति का संबंध अलग-अलग हो सकता है कई बार मेरे काम के कम लोगों को नाराज नहीं हो सकती है लेकिन मेरे व्यवहार से कम से कम ऐसा जरूर रहे कि वह व्यक्ति हमेशा मेरे से जुड़ रहे इसलिए मैंने पिताजी के उस सोच को उसका शैली को जरूर अपने का प्रयास किया इसलिए मैं आज का रहा हूं कि कुछ लोग अगर नहीं भी है तो मेरे संबंध आज वहां भी वैसे ही है और आगे भी वैसे रहेंगे और जो यहां उपस्थित है मैं उनको तो निश्चित रूप से प्रणाम करता हूं बहुत-बहुत आप सबका आभार व्यक्त करता हूं
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