
यमुनानगर के कई गांव बाढ़ की चपेट में लोग पलायन को मजबूर
यमुनानगर में एक बार फिर से सोम नदी उफान पर आने से उसका तटबंध टूट गया। इस बार भी नुकसान हुआ, गांव खानुवाला व चिंतपुर में सुबह अचानक पानी आने से गांव से जो लोग पलायन करने वाले थे उनके पूरे घर का सामान भी पानी की भेंट चढ़ गया। हालांकि कुछ लोग तो ऐसे थे जिन्होंने अनाज को बाहर धूप में सुखने के लिए डाला था वो भी पानी के भेंट में चढ़कर पूरी तरह से नष्ट हो गया। वहीं गांववालों का आरोप है कि प्रशासन गांवों में पहुंचना तो है लेकिन फोटो खिंचवाने के लिए ही जबकि गांव में अभी तक कोई मदद नहीं मिली।
यमुनानगर के बिलासपुर और छछरौली के कई गांव बाढ़ की चपेट में
यमुनानगर के कस्बा बिलासपुर और छछरौली के कई गांव बाढ़ से पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश के कारण बरसाती नदियां उफान पर आ गईं, जिससे सोम नदी का तटबंध टूट गया। इसका परिणाम यह हुआ कि नदी का सारा पानी गांवों की ओर बहने लगा और दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।
नहर का तटबंध टूटने से एक व्यक्ति ट्यूबवेल से अपने घर की तरफ लौट रहा था, लेकिन वह पानी के तेज बहाव में बह गया। नदी का पानी कई गांवों में फैल गया जिससे लगभग एक दर्जन गांवों में भारी तबाही मच गई।
यमुनानगर CIA ने नाकाबंदी के दौरान पकड़े 14 लाख रुपए के जाली नोट
यमुनानगर पुलिस को नकली नोटों के धंधे के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने कस्बा छछरौली में नाका लगाकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से नकली नोट बरामद किए। पूछताछ के दौरान पुलिस ने नकली नोट बनाने के कागज, प्रिंटर, कंप्यूटर और विशेष छपाई सामग्री भी बरामद की। इन आरोपियों से बड़ी संख्या में नकली नोट मिले, जिनकी कटिंग अभी बाकी थी। पुलिस अब इस मामले में पूछताछ कर रही है कि इन नकली नोटों को कहां-कहां सप्लाई किया जाना था और पहले इनका उपयोग कहां-कहां किया गया।
यमुनानगर में अवैध खनन जारी, पुलिस ने सिर्फ 6 ट्रकों को पकड़ा
यमुनानगर के प्रतापनगर इलाके में खनन पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन का सिलसिला जारी है। माइनिंग से भरे बड़े ट्रक सड़कों पर तेज़ी से दौड़ रहे हैं, और मीडिया के कैमरों ने अवैध खनन की पूरी तस्वीरें कैद कर लीं। हालांकि, पुलिस और माइनिंग विभाग अब तक इस पर कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। सड़क पर रुके दर्जनों ट्रकों में से पुलिस ने सिर्फ 6 ट्रकों को कब्जे में लिया और इसे अपनी सफलता के रूप में पेश कर रही है।
डीएसआर तकनीक से खेती में किसानों को मिलेगा फायदा, सरकार से मशीन की मदद की मांग
कृषि विभाग ने बेयंत सिंह के साथ मिलकर एक एकड़ जमीन में डीएसआर तकनीक से खेती की, जबकि दूसरे खेत में पारंपरिक तरीके से धान की फसल लगाई गई। कृषि अधिकारियों ने डीएसआर तकनीक के फायदों को बताते हुए कहा कि इससे किसानों को मजदूरों पर भारी खर्च से राहत मिलेगी क्योंकि यह मशीन धान के बीज और खाद को एक साथ जमीन में डालती है। इसके अलावा पानी की भी कम मात्रा की आवश्यकता होती है। इस फसल को देखकर किसानों का भी यही विचार है कि भविष्य में वे डीएसआर तकनीक से ही धान की खेती करेंगे।