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201307

जयवीर सिंह: पेट्रोल-डिज़ल की ₹5 बढ़ोतरी पर चर्चा, AAP पर आरोप

Noida, Uttar Pradesh:मैनपुरी (UP): जयवीर सिंह (पर्यटन और संस्कृति मंत्री) पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी पर / हरभजन सिंह / सम्राट चौधरी / अखिलेश यादव इस सामग्री में 9 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में ₹5 की बढ़ोतरी पर चर्चा की गई है। इसमें वैश्विक महंगाई के रुझानों पर विचार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है और यह भी बताया गया है कि पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है। इसमें आम आदमी पार्टी पर हरभजन सिंह की आलोचना का भी ज़िक्र है, जिसमें उन्होंने राज्यसभा की सीटें बेचने का आरोप लगाया है और अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के नेताओं पर भ्रष्टाचार और तानाशाही का इल्ज़ाम लगाया है। इस लेख में बिहार पुलिस द्वारा किए गए फ़र्ज़ी मुठभेड़ों पर तेजस्वी यादव की आलोचना, उत्तर प्रदेश में अपराध दर पर अखिलेश यादव की टिप्पणियाँ, और केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी के प्रति BJP की प्रतिबद्धता को भी शामिल किया गया है。
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दिल्ली हाईकोर्ट: निजी स्कूल बिना DoE मंजूरी फीस बढ़ा सकेंगे

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, स्कूलों को नई फीस की जानकारी सत्र शुरू होने से पहले DoE को देनी होगी। फीस बढ़ाने के लिए DoE को सिर्फ जानकारी देना काफी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट, 1973 के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए DoE की पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। स्कूल की केवल यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह प्रस्तावित फीस का विवरण नए सत्र से पहले DoE के पास जमा करे। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि यदि कोई स्कूल शैक्षणिक सत्र के बीच में फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे इसके लिए DoE की मंजूरी लेनी होगी। प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर सुनवाई: दिल्ली हाई कोर्ट ने यह आदेश कई प्राइवेट स्कूलों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। स्कूलों ने फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को DoE द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। स्कूलों का कहना था कि DoE बार-बार उनकी फीस बढ़ाने की मांग ठुकरा रहा था, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और स्कूल प्रबंधन के अधिकार प्रभावित हो रहे थे। स्कूलों को वित्तीय फैसले लेने का अधिकार: हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त है। DoE यह तय नहीं कर सकता कि स्कूल उनका पैसा कैसे खर्च करें। सरकार स्कूलों के हर छोटे वित्तीय फैसले में दखल नहीं दे सकती। अतिरिक्त फंड रखना मुनाफाखोरी नहीं: कोर्ट ने कहा कि DoE की भूमिका केवल रेगुलेटर की है। उसका काम यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल जरूरत से ज्यादा मुनाफाखोरी न करें, शिक्षा का व्यवसायीकरण न हो और कैपिटेशन फीस जैसी अवैध वसूली न की जाए। कोर्ट ने कहा कि किसी स्कूल को मुनाफाखोरी या शिक्षा का व्यवसायीकरण करने वाला तभी माना जा सकता है, जब उसका सही तरीके से ऑडिट किया गया हो। बिना ऑडिट ऐसे निष्कर्ष निकालना गलत है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि निजी स्कूल भविष्य के विकास और जरूरी जरूरतों के लिए कुछ अतिरिक्त राशि बचाकर रखते हैं, तो उसे मुनाफाखोरी नहीं माना जा सकता। DoE के सभी आदेश रद्द: हाई कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय के उन सभी आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में स्कूलों की फीस बढ़ाने की मांग खारिज की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि DoE के पास फीस बढ़ाने से जुड़े जो पुराने मामले लंबित हैं, उन्हें भी बंद किया जाए। पुराना बकाया नहीं वसूल पाएंगे स्कूल: कोर्ट ने अपने फैसले में यह तो कहा कि स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए DoE की मंजूरी की जरूरत नहीं है, लेकिन स्कूलों को पुरानी बढ़ी हुई फीस का बकाया वसूलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कुछ मामलों में फीस बढ़ाने की मांग 2016-17 से लंबित थी। अगर अब स्कूल पुराना बकाया वसूलेंगे, तो इससे अभिभावकों और छात्रों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी के मद्देनजर कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूलों द्वारा प्रस्तावित आखिरी फीस बढ़ोतरी अब अगले शैक्षणिक सत्र यानी अप्रैल 2027 से ही लागू होगी। कोई भी स्कूल पुराने शैक्षणिक सत्रों की बढ़ी हुई फीस पिछली तारीख से वसूल नहीं कर सकेगा।
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पटना में AI समिट 2026: बिहार के युवाओं के लिए बड़ा अवसर

Noida, Uttar Pradesh:आत्मजा पटना बिहार की राजधानी पटना अब तकनीक के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की ओर बढ़ रहा है। 23 और 24 मई को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में बिहार AI समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसे राज्य के लिए एक बड़े अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जहां छात्र, डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े लोग एक मंच पर जुटेंगे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की नई संभावनाओं को समझेंगे। इस समिट में शामिल होने पहुंचे छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। छात्रों का कहना है कि पहली बार बिहार में इस तरह के AI समिट का आयोजन हो रहा है, जिससे युवाओं को नई तकनीकों को सीखने और समझने का मौका मिलेगा। खासकर साइबर सिक्योरिटी, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, इसकी जानकारी मिलेगी। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अक्सर उन्हें सही अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सरकार की यह पहल काफी अहम साबित हो सकती है। इससे युवाओं को नई तकनीकों पर काम करने और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा, जो आने वाले समय में बिहार के विकास में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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