icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
Become a News Creator

Your local stories, Your voice

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement

नाज़िया इलाही खान के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग: जमाल सिद्दीकी ने दिल्ली पुलिस को पत्र

Noida, Uttar Pradesh:नई दिल्ली | (25 जून 2026) भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत प्रेषित कर नाज़िया इलाही खान(उर्फ नाज़िया रहमान / नाज़िया प्रासाद) के कथित भड़काऊ बयानों के संबंध में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि उनके बयानों से सामाजिक सौहार्द एवं धार्मिक सद्भाव प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हुई है। शिकायत में नाज़िया इलाही खान द्वारा मुस्लिम समाज एवं इस्लाम धर्म के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक और उत्तेजक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोगों में नाराज़गी देखी गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पैगंबर मोहम्मद साहब एवं उनके परिवार के संबंध में की गई कथित टिप्पणियों से अनेक लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी संदर्भ में विभिन्न स्थानों पर उनके विरुद्ध शिकायतें एवं एफआईआर दर्ज कराए जाने तथा विरोध-प्रदर्शन होने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नाज़िया इलाही खान स्वयं को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का पदाधिकारी बताती रही हैं तथा कुछ मीडिया रिपोर्टों में भी उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का नेता बताया गया है। इस संबंध में जमाल सिद्दीकी ने स्पष्ट किया है कि नाज़िया इलाही खान न तो भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और न ही किसी प्रदेश इकाई में उनके पास कोई जिम्मेदारी है। उन्होंने आग्रह किया कि स्वयं को भाजपा अथवा भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े पदाधिकारी के रूप में प्रस्तुत किए जाने संबंधी दावों की भी जांच की जाए। यदि किसी संगठन का नाम या पद बिना वैध अधिकार के उपयोग किया जा रहा है, तो इस संबंध में भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए。 इसके अतिरिक्त, उन्होंने नाज़िया इलाही खान के विरुद्ध पूर्व में विभिन्न स्थानों पर दर्ज कराए गए आपराधिक मामलों एवं एफआईआर की सत्यता की जांच कराने का अनुरोध किया है, ताकि संबंधित तथ्यों का विधिसम्मत सत्यापन किया जा सके。 जमाल सिद्दीकी ने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों के सम्मान, सामाजिक समरसता और कानून के शासन की भावना को सर्वोच्च महत्व देता है। किसी भी धर्म, महापुरुष या धार्मिक आस्था के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां समाज में तनाव उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे के वातावरण को बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य करेगा।
0
0
Report
0
0
Report
Pinewz
121002

फरीदाबाद में स्टंट कर रहे ऑटो चालक को 15500 चालान के साथ माफी

Faridabad, Haryana:फरीदाबाद में ऑटो चालक द्वारा स्टंट करने के मामले में अब ऑटो चालक माफी मांगता हुआ नजर आ रहा है। कानून का डंडा चलाते ही ऑटो चालक को यातायात के नियम याद आ गए हैं पुलिस में इस ऑटो चालक का 15500 का चालान भी किया है। ऑटो चालक के पास ना तो लाइसेंस है इसके अलावा कई और नियमों का उल्लंघन भी ऑटो चालक ने किया है। फरीदाबाद में इस ऑटो चालक के वीडियो वायरल हो रहे थे जिसमें ऑटो चालक स्टंट करता हुआ नजर आ रहा था जैसे ही पुलिस को इस ऑटो चालक के बारे में पता चला तो पुलिस ने तुरंत आरोपी को पड़कर इसका चालान किया है। इसके बाद ऑटो चालक हाथ जोड़कर माफी मांगता हुआ नजर आया।
0
0
Report
Advertisement
Pinewz
201002

मृत मानकर दफनाया गया युवक अचानक लौट आया, पहचान प्रक्रिया पर उठे सवाल

Ghaziabad, Uttar Pradesh:गाजियाबाद के कौशाम्बी और मसूरी थाना क्षेत्र से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, परिजनों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। जिस व्यक्ति को परिवार और पुलिस रिकॉर्ड में मृत मान लिया गया था, उसकी तेरहवीं होने के बाद वह अचानक जीवित घर लौट आया। वैशाली के कल्पना अपार्टमेंट निवासी 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट का 16 मई को स्थानीय दुकानदारों से विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका में उसे 151 सीआरपीसी के तहत गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया। 21 मई को जेल से रिहा होने के बाद गिरधर घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इसी बीच 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक लावारिस शव मिला। परिजनों ने शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी। शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इसके बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, कौशाम्बी थाने पर हंगामा हुआ और मसूरी थाने में हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया। लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कथित मृतक गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर लौट आया। जानकारी के अनुसार गिरधर ने बताया कि वह नाराज होकर पंजाब में एक सत्संग में चला गया था और अब वापस लौटा है। गिरधर के लौटने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर वह इतने दिनों तक कहां रहा, परिजनों ने जिस शव की पहचान गिरधर के रूप में की थी, वह किसका था, पहचान की प्रक्रिया में चूक कहां हुई, क्या डीएनए परीक्षण या अन्य वैज्ञानिक पहचान प्रक्रिया पूरी तरह नहीं अपनाई गई और यदि हत्या के आरोप गलत साबित होते हैं तो उन लोगों का क्या होगा, जिन्हें इस मामले में हिरासत और जांच का सामना करना पड़ा। सोसायटी में उस समय कौतूहल का माहौल बन गया जब गिरधर को मृत मान चुके लोगों के सामने वह जीवित आकर खड़ा हो गया। अब पूरे मामले ने पुलिस की जाँच प्रक्रिया, जांच प्रणाली और शव सुपुर्दगी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए गए है। मामला जितना सनसनीखेज है, उतना ही संवेदनशील भी है। अब निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में हुई चूक की जिम्मेदारी किसकी तय होती है और उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान आखिर कब सामने आएगी,जिसे गिरधर समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
0
0
Report
Advertisement
Back to top