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चुनाव के दौरान IRCTC ने सुरक्षा बलों को समय पर खाना पहुंचाया

Delhi, Delhi:चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों को जब खाना उपलब्ध कराना बना चुनौती तो चुनाव आयोग ने मांगी रेलवे आईआरसीटीसी से मदद बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव के दौरान 400 ट्रेनों से सुरक्षा बलों की आवाजाही हुई। इस मूवमेंट के दौरान 22 लाख खाना उपलब्ध कराया आईआरसीटीसी ने बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान सिक्योरिटी फोर्सज को खाना उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती था आरसीटीसी ने न सिर्फ बंगाल बल्कि असम तमिलनाडु केरल पुडुचेरी मे मैं सुरक्षा बलों को खाना उपलब्ध कराया आईआरसीटीसी के सीएमडी संजय जैन के मुताबिक चुनाव वाले राज्यों में जहां-जहां IRCTC के किचन थे वहां से भोजन पहुंचाया गया। जिन शहरों में किचन नहीं मौजूद थे वहां सुरक्षा बलों को खाना पहुंचाना ज्यादा चुनौती था। लिहाजा आसपास के होटलों से तालमेल बनाकर मौके पर खाना पहुंचाया गया। पांचो राज्यों में सीएपीएफ यानि केंद्रीय पुलिस वालों की लगभग 1600 कंपनियों को मूवमेंट के दौरान खाना उपलब्ध कराया सुरक्षा बलों के लिए 630 ग्राम की स्पेशल थाली डिजाइन की गई। सामान्य तौर पर रेल यात्रियों को साढे 450 से 500 ग्राम तक का मील उपलब्ध कराया जाता है फोर्स की ट्रेन से मूवमेंट के 12 घंटे पहले मिलता था ऑर्डर खाना उपलब्ध कराने के लिए 1 दिन में 84 हजार तक खाना पहुंचाए गए आईआरसीटीसी की तरफ से दिल्ली मुख्यालय में वार रूम में टीम बनाकर तालमेल बैठाया गया कि सुरक्षा वालों को सही वक्त पर नाश्ता लंच और डिनर पहुंचे ग्रामीण इलाकों में जहां सुरक्षा वालों को पहुंचाने के लिए ट्रेन भेजी गई वहां पर आसपास के शहरों से सुरक्षा कर्मियों के लिए खाना जुटाया रेलवे ने चुनाव के दौरान होता यह है कि जब भी चुनाव आयोग को जरूरत पड़ती है चुनाव आयोग अलग-अलग मंत्रालय से कोऑर्डिनेट करता है। बंगाल समेत पांच राज्यों में जब बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया तो चुनाव आयोग के समक्ष यह चुनौती भी सामने आई कि कैसे इनका मूवमेंट के दौरान इनको खाना उपलब्ध कराया जएगा। चुनाव आयोग ने इसके लिए रेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय से संपर्क किया। इसके बाद गृह मंत्रालय के जरिए सीआरपीएफ ने अपने सुरक्षा बलों की मूवमेंट की जानकारी रेलवे के उपक्रम आईआरसीटीसी से साझा की और उसके बाद तालमेल के लिए एक टीम बनाई गई कि बंगाल असम केरल तमिलनाडु और पुडुचेरी में किस-किस वक्त कहां-कहां से ट्रेन के जरिए सुरक्षा वालों का मूवमेंट होगा और किन-किन शहरों में पहुंचेंगे। पांचो राज्यों में चुनाव के दौरान लगभग डेढ़ लाख सुरक्षा बलों का 400 ट्रेनों के जरिए मूवमेंट हुआ लिहाजा उनका खाना वक्त पर उपलब्ध कराना आसान काम नहीं था। आईआरसीटीसी के सीएमडी संजय जैन के मुताबिक इसके लिए वॉर रूम में एक टीम बनाई गई जिसने सीआरपीएफ और सुरक्षा बलों के साथ तालमेल बैठाया और उनकी जरूरत के मुताबिक चुनाव वाले राज्यों में अलग-अलग इलाकों में वक्त पर खाना पहुंचाया। संजय जैन बताते हैं कई शहरों में तो किचन की उपलब्धता न होने के चलते आसपास के शहरों से लंच और डिनर उपलब्ध कराया गया। हजारों की संख्या में खाने के पैकेट लंच और डिनर उपलब्ध कराना एक चुनौती था लेकिन न सिर्फ बंगाल असम बल्कि तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में कहीं भी सुरक्षा बलों को खाना पहुंचाने में कोई देरी नहीं हुई। संजय जैन के मुताबिक 26 फरवरी से स्पेशल ट्रेनों में खाना उपलब्ध कराने को कहा गया था और लगातार मार्च अप्रैल और मई चुनाव के दौरान सुरक्षा वालों का जहां-जहां ट्रेन के जरिए मूवमेंट हुआ वहां वहां खाना उपलब्ध कराया गया। 25 मार्च को सबसे ज्यादा 84000 भोजन परोसा गया। इसके लिए सीआरपीएफ सुरक्षा कर्मियों की जरूरत की जानकारी रेल मंत्रालय को देता था रेल मंत्रालय आईआरसीटीसी को भोजन और स्पेशल ट्रेन के स्टॉपेज की जानकारी भेजता था और आईआरसीटीसी उसे डिमांड के मुताबिक उस स्टॉपेज पर खाना उपलब्ध कराता था। आईआरसीटीसी का सेंट्रल कंट्रोल यानि वार रूम ट्रेन मूवमेंट और भोजन वितरण की लगातार निगरानी करता था。
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ट्विशा शर्मा मामले में जंतर मंतर पर प्रदर्शन, सीबीआई जांच की मांग

Delhi, Delhi:भोपाल में मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ रहा है। इस मामले को लेकर आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर ट्विशा के परिजन और दोस्त प्रदर्शन करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर न्याय की मांग की और मामले की सीबीआई जांच कराने की अपील की। परिजनों का आरोप है कि ट्विशा की मौत को सामान्य घटना बताकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। दोस्तों का कहना है कि ट्विशा एक खुशमिजाज लड़की थी और उसकी मौत के पीछे की सच्चाई सामने आनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान “ट्विशा को इंसाफ दो” और “सीबीआई जांच कराओ” जैसे नारे लगाए गए। परिजनों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है, जबकि सभी की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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