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लोकतंत्र बचाने के लिए राहुल गांधी की जन मार्च दिल्ली में

Noida, Uttar Pradesh:Rahul Gandhi हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे。 मतदाता सूचियों से नाम काटे गए। नियम-कानून तोड़े गए। और सवाल पूछने वालों पर लाठियां चलीं。 अब जवाब देश देगा। 1 नवंबर - चलो दिल्ली。 वोट बचाओ - देश बचाओ जन मार्च और महारैली。 छात्र, किसान, मज़दूर, महिलाएं, नौजवान और व्यापारी - जिस-जिस को लोकतंत्र की फ़िक्र है, वो ज़रूर आए。 वोट आपका है। लड़ाई भी आपकी है。 रामलीला मैदान, नई दिल्ली PS: BJP और उसके साथियों का दिल से धन्यवाद, जो इस कार्यक्रम का इतना ज़ोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं और इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचा रहे हैं। बस अगले 7 दिन भी यही जोश और लगन बनाए रखिए! #ChaloDilli #RamlilaMarch
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Pinewz
201307
Prahlad KumarPrahlad KumarFollow28m ago

रीढ़ की हड्डी में था 3 सेंटीमीटर का ट्यूमर, सफल ऑपरेशन से मरीज को मिली राहत,

Noida, Uttar Pradesh:मुजफ्फरनगर। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के डॉक्टरों ने मुजफ्फरनगर निवासी 40 वर्षीय इमरान की रीढ़ की हड्डी में मौजूद जटिल ट्यूमर की सफल सर्जरी कर उनकी चलने-फिरने की क्षमता में सुधार किया। ट्यूमर के कारण मरीज के बाएं पैर में गंभीर कमजोरी आ गई थी और उन्हें बिना सहारे चलने में परेशानी हो रही थी। न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश रत्तनानी के नेतृत्व में आधुनिक तकनीक की मदद से ऑपरेशन किया गया। इमरान पिछले छह महीने से कमर के निचले हिस्से में दर्द और बाएं पैर में कमजोरी से परेशान थे। पहले एक अन्य अस्पताल में उनकी सर्जरी की गई थी, लेकिन ट्यूमर पूरी तरह नहीं निकल सका और पैर की ताकत में भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वह व्हीलचेयर पर मैक्स हॉस्पिटल पहुंचे। जांच में रीढ़ की हड्डी के D12-L1 स्तर पर लगभग तीन गुणा तीन सेंटीमीटर का ट्यूमर पाया गया, जो पैरों की गतिविधियों और संवेदना नियंत्रित करने वाली नसों पर दबाव डाल रहा था। डॉ. रत्तनानी की टीम ने लैमिनेक्टॉमी प्रक्रिया के जरिए ट्यूमर को लगभग पूरी तरह निकाल दिया। ऑपरेशन के दौरान नसों को सुरक्षित रखने के लिए न्यूरो नर्व मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, ड्यूरा नामक सुरक्षात्मक झिल्ली को सुरक्षित रूप से बंद करने के लिए विशेष चिकित्सा सामग्री का उपयोग किया गया। सर्जरी के बाद मरीज के बाएं पैर की मांसपेशियों की ताकत में सुधार हुआ और उनकी चलने की क्षमता बेहतर होने लगी। ऑपरेशन के पांचवें दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। करीब दो महीने बाद इमरान दोबारा स्वतंत्र रूप से चलने लगे, हालांकि पैर में कुछ सुन्नपन बना रहा। डॉ. रत्तनानी ने बताया कि लगातार कमर दर्द, पैरों में कमजोरी, संवेदना में बदलाव और चलने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। उन्होंने बेहतर रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी, पुनर्वास और नियमित चिकित्सकीय फॉलोअप को भी महत्वपूर्ण बताया।
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