icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
Become a News Creator

Your local stories, Your voice

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Pinewz
201304

जोन्नागिरि गोल्ड प्रोजेक्ट से आंध्र में रोजगार और निवेश बढ़ेंगे

Noida, Uttar Pradesh:जोन्नागिरि गोल्ड माइन: रायलसीमा में सुनहरे भविष्य की नई शुरुआत आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले के तुग्गली मंडल में स्थित जोन्नागिरि आज देश की सबसे महत्वपूर्ण स्वर्ण खनन परियोजनाओं में से एक बनकर उभर रहा है। दशकों तक चले भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों और अन्वेषण के बाद यह क्षेत्र अपने विशाल स्वर्ण भंडार के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। जोन्नागिरि का इतिहास जोन्नागिरि में सोने की मौजूदगी कोई नई खोज नहीं है। इतिहासकारों का मानना है कि विजयनगर साम्राज्य के समय यहां सीमित स्तर पर सोने का उत्खनन किया जाता था। आज भी इस क्षेत्र में पुराने गड्ढों और खुदाई के अवशेष देखे जा सकते हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान भी यहां प्रारंभिक अध्ययन किए गए थे, लेकिन तकनीकी सीमाओं के कारण बड़े पैमाने पर खनन कार्य शुरू नहीं सका। आधुनिक खोज की शुरुआत कैसे हुई? वर्ष 2003-04 के आसपास भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इस क्षेत्र में व्यापक अध्ययन किया। इसके बाद निजी खनन कंपनियों ने विस्तृत अन्वेषण और ड्रिलिंग कार्यक्रम शुरू किए। हजारों मीटर की ड्रिलिंग और प्रयोगशाला परीक्षणों के बाद यह पुष्टि हुई कि यहां आर्थिक रूप से लाभदायक मात्रा में स्वर्ण अयस्क मौजूद है। परियोजना का क्षेत्र जोन्नागिरि गोल्ड प्रोजेक्ट 600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। यह परियोजना जोन्नागिरि, एर्रागुडी, पगादिरायी और चापिरेवुला गांवों तक विस्तारित है। कितना सोना मौजूद है? भूवैज्ञानिक आकलनों के अनुसार— • परियोजना क्षेत्र में लाखों टन स्वर्ण युक्त अयस्क मौजूद है। • औसत स्वर्ण ग्रेड 1.2 से 1.8 ग्राम प्रति टन (g/t) के बीच है। • कुछ क्षेत्रों में 3 ग्राम प्रति टन से अधिक ग्रेड भी दर्ज किया गया है। • खदान के पूरे संचालन काल में कई टन सोने का उत्पादन होने की संभावना है।खनन कैसे किया जाएगा? यह परियोजना मुख्य रूप से ओपन-पिट (ओपन-कास्ट) खनन पद्धति पर आधारित है। खनन प्रक्रिया में शामिल होंगे— • सतह की मिट्टी और चट्टानों को हटाना। • स्वर्ण Yुक्त अयस्क का उत्खनन। • अयस्क को क्रशिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों तक पहुंचाना। • आधुनिक धातुकर्म तकनीकों के माध्यम से सोने की रिकवरी करना। परियोजना में निवेश जोन्नागिरि गोल्ड प्रोजेक्ट में सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। मुख्य निवेश क्षेत्रों में शामिल हैं— • खनन अवसंरचना • अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र • विद्युत आपूर्ति प्रणाली • जल प्रबंधन सुविधाएं • सड़क और परिवहन नेटवर्क का विकास स्थानीय लोगों को होने वाले लाभ रोजगार के अवसर • सैकड़ों प्रत्यक्ष रोजगार। • हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर। बुनियादी ढांचे का विकास • बेहतर सड़क संपर्क। • बिजली सुविधाओं का विस्तार। • जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार। • स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को बढ़ावा। आर्थिक विकास • स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन। • परिवहन सेवाओं की मांग में वृद्धि। • होटल, रेस्तरां और सहायक उद्योगों के लिए नए अवसर। किसानों और स्थानीय लोगों की चिंताएं आर्थिक लाभों के बावजूद स्थानीय लोगों ने कुछ महत्वपूर्ण चिंताएं भी जताई हैं— • भूमि अधिग्रहण • भूजल स्तर में कमी • धूल प्रदूषण • कृषि पर प्रभाव • खनन अपशिष्ट का प्रबंधन इन मुद्दों को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की गई थी। पर्यावरणीय मंजूरियां परियोजना को शुरू करने से पहले कई नियामक स्वीकृतियां प्राप्त करना आवश्यक है— • पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति • आवश्यक होने पर वन विभाग की मंजूरी • खनन सुरक्षा और संचालन संबंधी परमिट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना? भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देशों में से एक है, लेकिन अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। जोन्नागिरि जैसी परियोजनाएं तथा हुत्ती गोल्ड माइन्स और कोलार गोल्ड फील्ड्स जैसी ऐतिहासिक खदानें देश में स्वर्ण उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रोचक तथ्य • जोन्नागिरि आंध्र प्रदेश की पहली प्रमुख वाणिज्यिक स्वर्ण खनन परियोजनाओं में से एक है। • रायलसीमा क्षेत्र अब तक लौह अयस्क और चूना पत्थर खनन के लिए प्रसिद्ध रहा है, जबकि स्वर्ण खनन यहां एक नया अध्याय है। • भूवैज्ञानिक इस क्षेत्र को "जोन्नागिरि ग्रीनस्टोन बेल्ट" का हिस्सा मानते हैं, जो स्वर्ण खनिजीकरण के लिए अनुकूल भूगर्भीय संरचना है। • विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में आसपास के क्षेत्रों में भी नए स्वर्ण भंडार खोजे जा सकते हैं। निष्कर्ष जोन्नागिरि गोल्ड प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश और भारत दोनों के लिए एक बड़ी आर्थिक संभावना बनकर उभर रहा है। यदि परियोजना अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंचती है, तो यह रायलसीमा के आर्थिक परिदृश्य को बदल सकती है, रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है, निवेश आकर्षित कर सकती है और देश के स्वर्ण उत्पादन को नई दिशा दे सकती है। "सूखे और कठिन परिस्थितियों के लिए पहचानी जाने वाली रायलसीमा की धरती आने वाले वर्षों में स्वर्ण समृद्धि और आर्थिक विकास की नई पहचान बन सकती है।"
0
0
Report

कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी मानकों की भारी चूक, बिजली काटने की चेतावनी

Noida, Uttar Pradesh:लखनऊ अग्नि कांड के बाद गाजियाबाद दमकल विभाग की बड़ी करवाई। फायर की टीम कोचिंग सेंटर की जांच शुरू की। ज्यादातर कोचिंग सेंटर मानक के अनुरूप नहीं है। विद्या मंदिर क्लासेज, फ्रैंकलिन एयर होस्टेस इंस्टीट्यूट रैंकिफी कोचिंग, विद्यासागर कोचिंग सेंटर। किसी भी कोचिंग सेंटर ने दमकल विभाग की noc नहीं ले रखी है। कोचिंग सेंटर में हुज़ पाइप नहीं है, अग्निशामक यंत्र नहीं है। अलार्म है ही नहीं। पानी के पाइप में जंग लगे हैं। छत पर जाने का रास्ता बंद है। दमकल विभाग ने चेतावनी दी है। 24 घंटे के अंदर सभी मानक पूरे करे नहीं तो बिजली काट दी जाएगी या फिर सील कर दिया जाएगा। iv राहुल पाल, चीफ फायर ऑफिसर। अब इन कोचिंग सेंटर के संचालक की दलील सुनिये। दमकल की टीम पहुंचने के बाद अब ये noc लेंगे। बाइट अविनाश विद्या मंदिर क्लासेज। फ्रैंकलिन एयर होस्टेस इंस्टीट्यूट में फायर विभाग ने कमी पाई। लेकिन इनकी मैनेजर का दावा भी जरा सुन लीजिए। छत का रास्ता बंद कर वहां लकड़ी रख दिया गया है। फायर फाइटिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है। एक्सिट गेट को बंद कर दिया गया है। बाइट मैनेजर wt राजू राज। अब इस कोचिंग सेंटर का को देख ले rankifi इसके सीढ़ियों पर बिजली मीटर और तारों का अंबार है। अगर बिजली के तारों में स्पार्क करता है तो यहां से निकल पाना ना मुमकिन है। कोई noc नहीं ली है। एंट्री एक्सिट सिर्फ एक, यानी घोर लापरवाही है। इनके संचालक का दावा भी सुन लीजिए। छापेमारी के बाद अब noc लेंगे। ज्योति सागर कोचिंग सेंटर का भी यहीं हाल है। कोई noc नहीं है। लेकिन जल्द ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने का दावा कर रहे हैं। बाइट अमित कुमार, कोचिंग मालिकWT क्लास रूम से राजू राज
0
0
Report
Advertisement
0
0
Report
Pinewz
201304

चकराता में कालसी जोड़ी खच्चर घाटी में भयानक आग, वन कर्मी आग बुझाने में जुटे

Noida, Uttar Pradesh:चकराता। रिवर रेंज की कालसी जोड़ी खच्चर घाटी में अचानक भयानक आग लग गई है। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। आग लगने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंच चुकी है। खच्चर घाटी के इस बेहद दुर्गम और संवेदनशील इलाके में वन कर्मी मुस्तैदी से डटे हुए हैं। हवाओं के रुख और तपिश के कारण आग पर काबू पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वन विभाग की टीम पूरी मशक्कत के साथ आग को बुझाने के प्रयास में जुटी है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
0
0
Report
Advertisement
Back to top