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कानपुर के वकील प्रियाशु श्रीवास्तव ने सुसाइड नोट में मानसिक दबाव का खुलासा किया
Noida, Uttar Pradesh:कानपुर में खुदकुशी करने वाले वकील प्रियाशु श्रीवास्तव ने सुसाइड नोट अपने मोबाईल स्टेटस में लगा कर लिखा कि मेरी ये अंतिम इच्छा है कि सब लोग मेरे इस सुसाइड नोट को अंत तक पूरा पढ़े मैं प्रियांशु श्रीवास्तव निवासी वरुण विहार, बर्रा-8 कानपुर का रहने वाला हूं। आज 23 अप्रैल समय लगभग दोपहर 12.05 बजे मैं अपने पूरे होश में बिना किसी जोर–दबाव और जबरदस्ती के यह सुसाइड नोट लिख कर अपनी जान दे रहा हूं। मैं एक रजिस्टर्ड अधिवक्ता हूं, जिसने अपनी लॉ की पढ़ाई कानपुर नगर से 2025 में पूरी की है। समय की कमी होने के कारण मैं अपना पंजीकरण उत्तर प्रदेश बार कांउसिल प्रयागराज से प्राप्त नहीं कर सका हूं। कहानी शुरू होती है मेरे बचपन से, जहां करीब 5 या 6 वर्ष की उम्र में ही मुझे मानसिक यातनाएं मिलनी शुरू हो गई। बताने में तो मुझे बहुत शर्म महसूस हो रही है, लेकिन मैं आज ये सारी बातें जरूर बताना चाहूंगा, क्योकि जो आज मैं यह कदम उठाने जा रहा हूं… भविष्य में ऐसी नौबत किसी के साथ न आ जाए।करीब 6 वर्ष की उम्र में मुझे चोरी से सिर्फ फ्रिज में रखे आम के जूस को पीने के चलते निर्वस्त्र करके घर से बाहर भगा दिया गया। माना कि हर मां–बाप को शुरू से ही सख्त रवैया अपनाना चाहिए, ताकि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके। परंतु इतनी भी सख्ती न हो कि बच्चों को हर पल घुटन महसूस होने लगे। मैं ने कई बार कोशिश की कि इन सब माहौल से निकल आगे बढ़कर जिंदगी जी सकूं। परंतु 23 साल की उम्र तक आज तक जो चीजें मेरे साथ घटित हुई हैं, मुझे नहीं लगता कि इस तरह से बेगैरत की जिंदगी जीने के लायक है। पढ़ाई के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर करना, परीक्षा से एक दिन पहले अगर सिलेबस पूरा तैयार नहीं है तो मारने लग जाना। ये सब तो एक हद तक समझ आया है। लेकिन, हर समय हर मिनट शक की नजरों से देखना, जरूरत से ज्यादा, एक एक मिनट का हिसाब लेना, कहीं न कहीं ये मानसिक टॉर्चर ही है। इस टॉर्चर के साथ मैं ज्यादा समय तक और नहीं जी सकता हूं। सख्ती लगाव और प्रेम इस सीमा तक भी नहीं होना चाहिए कि वो नफरत में बदल जाए। बात है वर्ष 2016 की। कक्षा 9 में प्रवेश के दौरान मेरे पापा ने ये शर्त रखी थी कि मैं अगर कंप्यूटर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के विषय में कंप्यूटर का चयन नहीं करूंगा तो वो मुझे पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। उनके दबाव में आकर मैंने ऐसे विषय का चयन किया, जिसमें मेरी रूचि नहीं थी। जिसका नतीजा यह रहा कि मेरे 9वीं में उस विषय को ज्यादा पढ़ने के बावजूद उसमें ज्यादा नंबर नहीं ला सका। इसके चलते अन्य विषयों में कम समय देने के कारण मेरे 9वीं के रिजल्ट में कम नंबर आए। वर्ष 2016 में घर के निर्माण काम में करीब 4 महीने का समय लग जाने के चलते मेरे हाईस्कूल की पढ़ाई ज्यादा प्रभावित हुई। रिजल्ट आने से पहले मेरे पापा द्वारा मुझे धमकी दी गई कि अगर हाईस्कूल में नंबर कम आए तो पूरा निर्वस्त्र कर घर से भगा देंगे। घर और समाज में इज्जत जाने के भय से मैंने घर से भागकर ट्रेन से मथुरा स्टेशन तक पहुंच गया था। क्योंकि मुझे पूरा विश्वास था कि अगर मेरे नंबर कम आए तो जो उन्होंने व्यवहार मेरे साथ छोटी उम्र में निर्वस्त्र कर किया था, वहीं हाल वे मेरा इस बार भी कर देंगे। पूरा दिन सिर्फ अपने काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करता हूं। बावजूद इसके मुझे सिर्फ और सिर्फ जलील किया जा रहा है। बात–बात में किसी मामूली विवाद के चलते घर से निकल जाने और ऑफिस छोड़ने की धमकी दी जाती है। आज मैं मजबूर हूं कि मेरे पास खुद का घर नहीं है, आफिस नहीं है। हर रोज इस तरह से बेइज्जती करके धमकी दी जा रही है। मैंने जिन लोगों के प्रति अपना 24 घंटा लगा दिया। अपने जरूरी काम छोड़कर उनके काम में ध्यान दिया। आज उन्होंने ही मुझे मोहल्ले में बेइज्जत कर मेरी इज्जत खत्म कर दी है। हर समय, हर मिनट कहां जा रहे हो, कब आओगे, किसका फोन आया है? क्या बातें की? जरूरत से ज्यादा मेरी जिंदगी में दखल देकर हर रोज मेरी जिंदगी घुटन जैसी हो गई है। और रोज रोज घुट–घुट कर मरने से लाख गुना बेहतर है? कि एक दिन मरके खत्म हो। आज जो उन्होंने मेरे साथ मोहल्ले में बर्ताव किया है, उससे मेरी इज्जत धुल चुकी है। वह सिर्फ तेज आवाज में चिल्ला कर झूठा साबित कर नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं। उन्हें उनकी जीत मुबारक हो।आज मैं कचहरी परिसर में आत्महत्या करने जा रहा हूं, क्योंकि इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ और नहीं जी सकता हूं। मां-बाप की? 25वीं वर्षगांठ के लिए मैंने अपनी क्षमता अनुसार चांदी की? अंगूठी गिफ्ट में देने की? बात बताई थी, परंतु कुछ बाप ऐसे बेटे को डिजर्व ही नहीं करते हैं। सभी मां-बाप से मेरी यह अपील है कि अपने बच्चों पर उतना ही टॉर्चर करें, जितना वो बर्दाश्त कर सकें। नहीं तो अंत में हर किसी के साथ यही हश्र होगा। मेरा ये निवेदन है कि मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। मैं उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं करना चाहता हूं, ताकि मेरा परिवार बर्बाद न हो। ऐसे पिता भगवान किसी को न मिलें, अगर समाज को जरा-सा भी यह लगता है कि मैं गलत हूं, तो मैं वे सब मेरी मां, बहन और मोहल्ले वालों से मेरे बारे में पूछ लें। मैं ऐसी ही बंदिशों और बेगैरत की तरह जिंदगी और नहीं जी सकता। मेरे सारे एफर्ट, कोशिश, भविष्य में कुछ बनने के सपने, आज सब खत्म हो जाएंगे। मैं हार गया, पापा जीत गए। लव यू मम्मी… प्रियांशु ने ये नोट अपने कुछ दोस्तो को भी भेजा था0
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कृष्णा नगर दिल्ली में झगड़े से नजीम घायल, आरोपियों की तलाश जारी
Delhi, Delhi:शाहदरा जिला दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके से एक झगड़े की गंभीर वारदात सामने आई है, जहां 23 अप्रैल की रात करीब 9 बजे PCR कॉल के जरिए पुलिस को सूचना मिली। सूचना मिलते ही थाना कृष्णा नगर की बीट पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहां पता चला कि नजीम नाम का एक शख्स घायल हो चुका है, जिसे पहले ही इलाज के लिए हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया था, जबकि आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। प्राथमिक इलाज के बाद घायल नजीम को बेहतर उपचार के लिए जीटीबी अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में नजीम ने पुलिस को बताया कि उसके कुछ परिचितों ने ही उस पर धारदार हथियार से हमला किया और मौके से फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए क्राइम टीम को मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से अहम सबूत जुटाए। हमले में नजीम को बाएं ऊपरी पेट और बाएं हाथ पर गहरे कट के घाव आए हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।0
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शिमला: जयराम ठाकुर बीजेपी महिला आक्रोश पदयात्रा में शामिल
Noida, Uttar Pradesh:SHIMLA (HIMACHAL PRADESH): HIMACHAL PRADESH LEGISLATIVE ASSEMBLY LOP & BJP LEADER JAIRAM THAKUR JOINS BJP WOMEN'S AKROSH PADYATRA.0
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