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हापुड़: अतुल तोमर हत्याकांड के तीन शूटर मुठभेड़ में गिरफ्तार
Hapur, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में प्रॉपर्टी डीलर और शराब कारोबारी अतुल तोमर हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. पुलिस ने पिलखुवा में नेशनल हाईवे से डूरी जाने वाले मार्ग पर देर रात मुठभेड़ में अतुल तोमर की हत्या करने वाले तीन शूटरों को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया है. दरअसल, बीते 6 दिन पूर्व गालंद गांव के पूर्व प्रधान के इकलौते बेटे अतुल तोमर की कार रोककर छाती में गोली मारकर हत्या हुई थी. इस घटना के बाद से ही इलाके में भारी तनाव था और परिजनों ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग को लेकर अस्पताल में जमकर हंगामा किया था. पुलिस प्रशासन इस मामले को लेकर बेहद गंभीर था और बदमाशों की धरपकड़ के लिए कई टीमें लगातार दबिश दे रही थीं. शनिवार की रात थाना पिलखुवा, हापुड़ नगर पुलिस और जनपदीय स्वाट की संयुक्त टीम नेशनल हाईवे से डूरी जाने वाले मार्ग पर चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान एक तेज रफ्तार अर्बन क्रूजर कार आती हुई दिखाई दी. पुलिस ने जब उसे रुकने का इशारा किया, तो कार सवार बदमाशों ने रुकने के बजाय पुलिस टीम पर सीधे फायरिंग झोंक दी. पुलिस ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें कार सवार तीन बदमाशों के पैर में गोली लगी और वे वहीं ढेर हो गए. इस क्रॉस फायरिंग में पुलिस के हेड कांस्टेबल संदीप राठी भी गोली लगने से घायल हुए हैं. पुलिस ने सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है. एएसपी हापुड़ विनीत भटनागर ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों की पहचान लवकुश (निवासी गालंद), कपिल और गौरव (निवासीगण मसूरी, गाजियाबाद) के रूप में हुई है. पूछताछ में इन तीनों ने अतुल तोमर की गोली मारकर हत्या करने का जुर्म कबूल किया है. बदमाशों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई अर्बन क्रूजर कार, 3 अवैध तमंचे, 8 जिंदा कारतूस और 5 खोखा कारतूस बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इनके पूरे आपराधिक इतिहास को खंगालने में जुटी है.0
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201307
सुवेंदु अधिकारी ने कार्रवाई की चेतावनी; सरकारी संपत्ति नुकसान पर मुआवजा व्यक्तिगत बचत से
Noida, Uttar Pradesh:CM Suvendu Adhikari warns of strictest action against all involved. People who have been caught vandalising Govt property will now have to pay compensation from their own personal savings.0
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MP HC फैसले के बाद ASI ने भोजशाला में पूजा-आस्था की छूट दे दी
Noida, Uttar Pradesh:अब हिंदू समुदाय को भोजशाला में आने-जाने और पूजा की पूरी छूट, मध्यप्रदेश HC के फैसले के बाद ASI का नया आदेश मध्यप्रदेश में धार भोजशाला मामले में 15 मई को आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के मद्देनजर अब ASI ने नया आदेश जारी किया है। ASI ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अब हिंदू समुदाय को भोजशाला में आने-जाने की पूरी छूट होगी। वे यहां पुरानी परंपरा के अनुसार अध्ययन और सरस्वती पूजा कर सकेंगे। माँ सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र ASI ने अपने आदेश में कहा है कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के शोध केंद्र तथा देवी वाग्देवी का मंदिर माना है। इसके मद्देनजर अब हिंदू समुदाय को यहां आने-जाने और पूजा की पूरी अनुमति होगी。 ASI और जिला प्रशासन मिलकर तय करेंगे व्यवस्था ASI ने अपने आदेश में कहा है कि भोजशाला, AMASR Act 1958 के तहत संरक्षित स्मारक बनी रहेगी। इसलिए पर्यटकों और हिंदू श्रद्धालुओं के आने का समय अधीक्षक पुरातत्वविद् (Superintending Archaeologist) जिला प्रशासन से चर्चा कर तय करेंगे। हिंदू समुदाय अध्ययन और पूजा के लिए क्या-क्या कर सकेगा, यह भी अधीक्षण पुरातत्वविद् जिला प्रशासन से समन्वय कर तय करेंगे, ताकि स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके。 क्या था मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का फैसला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि विवादित स्थल का मूल धार्मिक स्वरूप भोजशाला है और यहां देवी सरस्वती का मंदिर था। कोर्ट ने 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की अनुमति थी। वहीं, 2003 के आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी。 कोर्ट ने कहा था कि भारत सरकार और ASI यह तय करेंगे कि भोजशाला का संचालन और व्यवस्था कैसे होगी। ASI पूरे परिसर की देखरेख करता रहेगा。 मुस्लिम समुदाय के लंबे समय से चले आ रहे दावे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा था कि यदि मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार जिले में किसी अन्य स्थान पर मस्जिद के लिए जमीन मांग सकता है। सरकार कानून के अनुसार उस आवेदन पर विचार कर सकती है।0
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NEET पेपर लीक: कोर्ट में कुलकर्णी-मनीषा साजिश का राज, सीबीआई रिमांड
Noida, Uttar Pradesh:NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI को पी. वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे की 10 दिनों की रिमांड हासिल हो गई है। CBI ने दोनों को आज राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया और 14 दिनों की रिमांड की मांग की। स्पेशल CBI जज अजय गुप्ता ने अपने आदेश में CBI की ओर से दी गई दलीलों, केस डायरी और रिमांड पेपर का हवाला दिया है, जिससे NEET UG 2026 पेपर लीक की साजिश की पूरी तस्वीर बेनकाब हो रही है पेपर लीक की शुरुआत यहाँ से हुई CBI ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पी. वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क के सबसे अहम चेहरे हैं। NEET 2026 पेपर लीक की शुरुआत इन्हीं से हुई और इन्हीं के ज़रिये पेपर सबसे पहले बाजार तक पहुंचा। CBI की ओर से पेश की गई केस डायरी के मुताबिक, प्रह्लाद कुलकर्णी NTA से जुड़े पेपर सेटिंग सिस्टम का हिस्सा था। एजेंसी के अनुसार, उसे परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक पहुंच थी। आरोप है कि इसी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए उसने मनीषा वाघमारे और अन्य लोगों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाया। लाखों की रकम वसूली, सबूत खत्म किए CBI ने कोर्ट को बताया कि कुलकर्णी ने सिर्फ पेपर लीक ही नहीं किया, बल्कि चुनिंदा छात्रों तक सवाल और जवाब पहुंचाने के बदले मोटी रकम भी ली। जांच एजेंसी का दावा है कि यह पैसा बाद में बैंक खातों में जमा किया गया। इतना ही नहीं, एग्जाम खत्म होने के बाद कुलकर्णी ने हाथ से लिखी सामग्री नष्ट कर दी, ताकि सबूत मिटाए जा सकें। 27 अप्रैल को ही बाहर आ गया था पेपर! CBI के मुताबिक, मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी थी। एजेंसी का दावा है कि उसने 27 अप्रैल 2026 को ही, यानी एग्जाम से कई दिन पहले, NEET UG 2026 का प्रश्नपत्र और उसके उत्तर कुछ आरोपियों तक पहुंचा दिए थे। इनमें आरोपी धनंजय भी शामिल है। मनीषा दूसरे आरोपियों और NTA से जुड़े एक सरकारी कर्मचारी के संपर्क में थी। जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर सबसे पहले कुलकर्णी और मनीषा के नेटवर्क से बाहर आया, जिसके बाद यह अलग-अलग लोगों तक पहुंचता चला गया। ऐसे फैला पूरा पेपर लीक नेटवर्क CBI की जांच के मुताबिक, आरोपी धनंजय लोखंडे को मनीषा वाघमारे से पेपर मिला। इसके बाद यह प्रश्नपत्र शुभम खैरनार तक पहुंचा और फिर वहां से यश यादव, मंगीलाल खटीक, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल समेत दूसरे आरोपियों तक फैलाया गया। राजस्थान SOG द्वारा की गई जांच में पता चला कि असली एग्जाम में 3 मई को आए कई सवाल पहले ही लीक होकर फैल चुके थे। आरोप है कि इन आरोपियों ने ही सवालों को लीक कर सर्कुलेट किया। एजेंसी का दावा है कि पूरा खेल पैसों के लिए किया गया। CBI का दावा — अभी और बड़े नाम सामने आएंगे कोर्ट में CBI ने कहा कि यह सिर्फ कुछ लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट है। एजेंसी के मुताबिक, कुलकर्णी और मनीषा अभी तक उन सभी लोगों के नाम नहीं बता रहे हैं, जो इस नेटवर्क में शामिल हैं। CBI ने कोर्ट को बताया कि कई डिजिटल सबूत, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और दूसरे लिंक अभी खंगाले जाने बाकी हैं। आरोपियों को देश के दूसरे हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी है, इसलिए रिमांड की ज़रूरत है। कुलकर्णी और मनीषा के वकील की दलील सुनवाई के दौरान पी. वी. कुलकर्णी के वकील ने 14 दिन की रिमांड मांगे जाने का विरोध किया। वकील ने कहा कि कुलकर्णी का NTA के साथ पेपर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट था। NTA कई लोगों से पेपर सेट करवाता है और उनसे सवाल लेता है, लेकिन किसी को नहीं पता होता कि NTA किसका पेपर या कौन से सवाल असली एग्जाम में शामिल करेगा। सवाल चुनना सिर्फ NTA का काम है। वकील ने कहा कि अभी तक NTA से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसलिए कुलकर्णी की गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मनीषा के खिलाफ भी CBI के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है और वह गिरफ्तारी से पहले 24 घंटे तक पुणे पुलिस की गैरकानूनी हिरासत में रही।वकील ने कहा कि एजेंसी के पास पहले से पर्याप्त सामग्री है और ज्यादा पुलिस कस्टडी की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने क्या आदेश दिया CBI और बचाव पक्ष पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर है और जांच अभी शुरुआती लेकिन बेहद महत्वपूर्ण चरण में है। कोर्ट ने कहा कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने और बाकी आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए दोनों आरोपियों से पूछताछ जरूरी है। इसी के मद्देनज़र कोर्ट ने पी. वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। 25 मई को इन दोनों को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा।0
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जालंधर के लेदर कॉम्प्लेक्स में ट्रक के पास युवक की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच
Noida, Uttar Pradesh:जालंधर के लेदर कॉम्प्लेक्स से मंड रोड पर खड़े ट्रक में व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई हालाँकि मौके पर मौजूद आस पास के लोगों ने आत्महत्या से जान देने की आशंका जताई। मृतकों की पहचान तरनतारन के रहने वाले गुरजीत सिंह के रूप में हुई है पुलिस ने शव को क़ब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवा दिया है। क़रोल बाग़ के रहने वाले सावन मेहता ने बताया कि अनमोल ट्रांसपोर्ट है और गुरजीत सिंह उनके पास पिछले कुछ दिनों से काम पर लगा था। वह सुबह से सामान छोड़ने के लिए लेदर कॉम्प्लेक्स रोड पर गया था। उन्हें उनकी लेबर की ओर से काल आई कि गुरजीत सिंह ट्रक के पास गिरा हुआ है, जिसके बाद वह मौके पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि गुरजीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी थी। घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना संबंधित थाने की पुलिस को दे दी थी। वही मौके पर पहुँची पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। पुलिस ने शव को लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में लगवा दिया और जांच शुरू कर दी है。0
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