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दिल्ली में आग से मौतें पांच साल में चार गुना, घायलों की संख्या रिकॉर्ड

Noida, Uttar Pradesh:डिपार्टमेंट ऑफ दिल्ली फायर सर्विस के पिछले 15 सालों के आंकड़ों को देखने पर रूह कांप जाती है। 5 साल में आग में जलकर मरने वालों की संख्या में 4 गुना तक उछाल आया है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि आग लगने की घटनाएं लगभग स्थिर हैं। ऐसे में दिल्ली के फायर सिस्टम पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 में आग से 339 लोगों की मौत हुई थी। 2016-17 में आग से 277 लोगों की मौत हुई थी। 2017-18 में आग से 318 लोगों की मौत हुई थी। 2018-19 में आग से 297 लोगों की मौत हुई थी। 2019-20 में आग से 308 लोगों की मौत हुई। 2020-21 में यह संख्या 346 रही। 2021-22 में बढ़कर 591 हो गई। इसके बाद 2022-23 में 1029 और 2023-24 में 1303 मौतें दर्ज की गईं। यानी सिर्फ पांच साल में मौतों का आंकड़ा चार गुना के करीब पहुंच गया। इसके उलट फायर कॉल्स का डेटा लगभग स्थिर है- 2019-20 में 31,157 कॉल्स और 2023-24 में 31,575 कॉल्स। मतलब साफ है- आग की घटनाएं नहीं बढ़ीं, लेकिन उनका असर अब ज्यादा घातक हो गया है। आग अब सिर्फ जानलेवा नहीं रही, बल्कि ज्यादा लोगों को झुलसाने लगी है। पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि जहां मौतों में तेज उछाल आया है, वहीं घायलों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2021-22 में 1421 लोग घायल हुए थे, 2022-23 में 2193 लोग घायल हुए थे..जो 2023-24 में बढ़कर 3232 हो गए। यानी महज तीन साल में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई। यह ट्रेंड संकेत देता है कि आग की घटनाएं भले ही स्थिर हों, लेकिन उनका असर अब ज्यादा व्यापक और खतरनाक हो गया है, जिससे अधिक लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं。
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