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सुप्रीम कोर्ट ने आस्था और संविधान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की

Noida, Uttar Pradesh:लाखों लोगों की आस्था को गलत ठहराना आसान नहीं', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आस्था के मामलों में कोई भी फैसला देना कोर्ट के लिए पेचीदा मामला है। अदालत के लिए सबसे मुश्किल काम होता है कि वो लाखों लोग की धार्मिक मान्यताओं को ग़लत करार दे। किसी धर्म मे समाजिक सुधार के नाम पर उसकी मूल धार्मिक परंपराओं को खत्म नहीं किया जा सकता 9 जजों की संविधान पीठ कर रही सुनवाई संविधान पीठ ने यह टिप्पणी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के विवाद से उपजे सवैंधानिक सवालों पर विचार करते हुए कही। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ धार्मिक परंपरा और मौलिक अधिकार से जुड़े 7 सवालों पर विचार कर रही है। संविधान पीठ ने जो सातवां सवाल तय किया है , वो यही है कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति भी किसी ऐसे धर्म /संप्रदाय की परंपरा को अदालत में चुनौती दे सकता है, जिसका वो खुद सदस्य नहीं है। अभिषेक मनु सिंघवी की दलील आज इसी सवाल को लेकर सबरीमाला मंदिर का प्रबंध संभालने वाले त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि धार्मिक मामलों में जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट को सख्त मापदंड अपनाने चाहिए।सबरीमाला जैसे मंदिर की प्रचलित परंपराओं को किसी तीसरे पक्ष की ओर से चुनौती नहीं दी जा सकती अगर कोई धर्मगुरु सामुहिक आत्महत्या की बात करें तो.. सिंघवी की इस दलील पर बेंच के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि यदि कोई धर्मगुरु यह उपदेश देने लगे कि मोक्ष पाने के लिए सामूहिक आत्महत्या करनी चाहिए और उसकी बात मानते हुए उसके अनुयायी वास्तव में आत्महत्या करने की कोशिश कर रहे हों, तो क्या ऐसी सूरत में कोर्ट किसी ऐसे शख्स की याचिका पर सुनवाई कर दखल नहीं दे सकती जो उस धर्म का नहीं है। सिंघवी ने कहा कि यह यह बहुत असाधारण स्थिति होगी। ऐसे मामलों में कोर्ट जनहित को देखते हुए दखल दे सकता है।लेकिन सामान्य नियम यह होना चाहिए कि कोर्ट धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करे。 जो भक्त नहीं, उनकी अर्जी क्यों सुने! जस्टिस बी नागरत्ना ने भी सिंघवी की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि अगर किसी जनहित याचिका में किसी धार्मिक परंपरा को चुनौती दी गई है और याचिका दाखिल करने वाला उस परंपरा से प्रभावित नहीं है या उस धर्म से जुड़ा नहीं है तो इसी आधार पर उसकी याचिका खारिज हो जानी चाहिए。 धर्म लाखों लोगों की आस्था का विषय बोर्ड की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट किसी धार्मिक परंपरा पर उसे मानने वालो को सुने बिना फैसला नहीं ले सकती। एक धर्म के भीतर संप्रदायों की अपनी अपनी परंपराएं हो सकती हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हर परंपरा की पूरे धर्म की अनिवार्य धार्मिक परंपरा की कसौटी पर समीक्षा की जाए। सिंघवी ने दलील दी कि धर्म लाखों लोगो की आस्था का विषय है। इस लिहाज से किसी तीसरे पक्ष को इस बात की इजाज़त नहीं दी जा सकती कि वो इसे कोर्ट में चुनौती दे और इसमे बदलाव कराए। बेंच के सदस्य जस्टिस एम एम सुंदरेश ने सवाल उठाया कि क्या यह अदालत ऐसी सूरत में लाखो लोगों को सुने बिना कोई फैसला ले सकती है। संविधान पीठ में इस मामले को लेकर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी。
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NIA ने 2024 बिहार हथियार तस्करी मामले में 6वें आरोपी पर चार्जशीट दाखिल की

Noida, Uttar Pradesh:6TH KEY ACCUSED CHARGESHEETED BY NIA IN 2024 BIHAR ILLEGAL WEAPONS SMUGGLING CASE New Delhi, 15th April 2026 The National Investigation Agency (NIA) on Wednesday filed charges against Muzaffarpur resident Kundan Kumar Kundan Bhagat in a 2024 Bihar case related to smuggling of illegal weapons. The supplementary chargesheeted filed before the NIA Special Court, Patna, has named Kundan under various sections of IPC, Arms Act and UA (P) Act. He is the 6th accused to be chargesheeted in the case that originated with the seizure of an AK-47 rifle, along with lens, by the Bihar Police. Kundan Kumar, who was arrested by NIA in November 2025, was actively engaged in illegal procurement and smuggling of prohibited bore weapons from Nagaland, investigations had revealed. The weapons were being supplied to Naxalites and other criminals in Bihar as part of the conspiracy involving Kundan Kumar and other accused. Four accused, identified as Vikash Kumar, Devmani Rai, Satyam Kumar and Ahmad Ansari, were originally chargesheeted by NIA in the case in May 2025. Charges against the fifth accused, Manjoor Khan, were filed in February 2026. Investigations by the counter-terror agency are continuing in an effort to identify other criminals involved in the conspiracy and destroy the arms smuggling syndicate.
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