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उत्तराखंड में बसंतोत्सव 2026 का शुभारंभ, फूलों की प्रदर्शनी और लोकसंस्कृति का संगम
RRRakesh RanjanFeb 27, 2026 12:36:40
Noida, Uttar Pradesh:एंकर लोकभवन में बसंतोत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने विधिवत बसंतोत्सव की शुरुआत की। 27 से 1 मार्च तक चलने वाले इस तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी में इस बार दर्शकों के लिए फूलों की कई तरह की किस्म प्रदर्शनी के लिए लगाई गई हैं। शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने बसंतोत्सव 2026 की शुरुआत की। इस दौरान उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी और उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। बसंतोत्सव आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, संगीत और इतिहास की जीवंत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की सहभागिता और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों से प्रकृति, संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आयोजन में नृत्य, गीत और बैंड की मधुर प्रस्तुतियां सभी का मन मोह रही हैं। अगले दो दिनों तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की लोक परंपराओं, लोक गीतों और लोक संगीत को करीब से जानने और महसूस करने का अवसर मिलेगा। उनका कहना था कि यह केवल मनोरंजन का अवसर नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता और इतिहास को समझने का भी महत्वपूर्ण मंच है। राज्यपाल ने लोगों से आह्वान किया कि इन तीन दिनों को उत्सव की तरह मनाएं और प्रकृति के साथ आत्मिक जुड़ाव स्थापित करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराएं हम सभी को नई ऊर्जा देती हैं। उन्होंने इस अवसर को अपनी लगन और पैशन को सही दिशा देने का भी समय बताया। कार्यक्रम की सफलता के लिए उन्होंने कृषि मंत्री, सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा डाक विभाग सहित लगभग तीस विभागों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से उत्तराखंड का संदेश न केवल पूरे भारत बल्कि समूची मानवता तक पहुंच रहा है。 अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने प्रदेश पर ईश्वर के आशीर्वाद की कामना करते हुए सभी से इस आयोजन का आनंद लेने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने सभी को धन्यवाद देते हुए “जय हिंद” के साथ अपनी बात समाप्त की। बाइट: LT.GEN ( RTD ) गुरमीत सिंह, राज्यपाल उत्तराखंड पुष्प प्रदर्शनी में जरबेरा, कॉरोनेशन, पैंजी, कैलेंडुला, डेनथस, गुलाब, ऑर्किड जैसे पुष्पों की कई किस्म देखने को मिली। इस दौरान उत्तराखंड सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट की ओर से अरोमा थेरेपी के किया जा रहे कार्यों की प्रदर्शनी भी देखने को मिली। अरोमाथेरेपी के जरिए किस तरह से कार्य किया जा रहा है इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। टिक टेक अरुणेंद्र चौहान निदेशक सेंटर फॉर एरोमेटिक प्लांट वहीं उत्तराखंड की संस्कृति और लोक पर्व में अक्सर दिखने वाली फ्यूली भी नजर आई। आमतौर पर पहाड़ों में उगने वाला यह फूल किस तरह से देहरादून में तैयार किया जा रहा है यह भी देखने को मिला। पुष्प प्रेमी मनमोहन ने बताया कि पिछले 1 साल से उन्होंने देहरादून में इसे अपने गमले में उगाया है। जिसका मकसद उत्तराखंड के लोक संस्कृति के वाहक इस पुष्प को लोगों को दिखानाहै। मनमोहन पुष्प प्रदर्शनी में भाग लेने वाले
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होली से पहले दिल्ली के बाजारों में तला-भुना तेल से स्वास्थ्य खतरे की खबर

NANasim AhmadFeb 27, 2026 12:31:50
New Delhi, Delhi:होली का रंग अगर खुशियों की जगह बीमारी बन जाए तो? त्योहार से पहले बाजारों में बिक रहे तले-भुने और मिठाइयों की सच्चाई चौंकाने वाली है। हमारी टीम ने जब पड़ताल की, तो तस्वीर बेहद डरावनी निकली। होली का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। लोग रंग-गुलाल के साथ-साथ समोसा, ब्रेड पकोड़ा, गुजिया और मिठाइयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन इसी चकाचौंध के बीच सेहत से जुड़ा एक बड़ा खतरा भी छुपा हुआ है, जो सीधे आपकी थाली तक पहुंच रहा है। उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी मुकुंदपुर मेन मार्केट में हमारी टीम ने जब हलवाइयों की दुकानों की पड़ताल की तो सामने आया कि खाने का सामान बनाने में गंदा, सड़ा हुआ और काला तेल इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी तेल में समोसे, ब्रेड पकोड़े, गुजिया और होली की मिठाइयां तली जा रही थीं। मार्केट के अंदर कई ऐसी दुकानें हैं जहां गंदगी पसरी हुई है। खुले में रखे खाने के सामान पर मक्खियां मंडरा रही हैं। कहीं ढंके हुए बर्तन नहीं, तो कहीं हाथों में दस्ताने या साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं। ग्राहक खरीदारी के उत्साह में यह नहीं देख पाते कि वे जो खा रहे हैं, वह किस हालात में तैयार हो रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई दुकानों पर तला-भुना सामान ताजा नहीं बल्कि कई दिन पुराना भी हो सकता है। त्योहार के नाम पर पहले से तैयार चीजों को दोबारा गरम कर बेचा जा रहा है, जिससे फूड प्वाइजनिंग, पेट की बीमारी और इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दुकानदार का दावा है कि वह हफ्ते में दो बार तेल बदलता है, लेकिन तेल की हालत कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी। काला पड़ा तेल न सिर्फ स्वाद खराब करता है बल्कि यह सीधे लीवर, आंतों और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के समय इस तरह की लापरवाही गंभीर बीमारियों को न्योता देती है। खुले में बिकने वाले तला-भुने खाद्य पदार्थों से खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को दूर रहना चाहिए। होली खुशियों का त्योहार है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी जरूरी है। साफ-सुथरी दुकान से ही खरीदारी करें, ताजा और ढका हुआ खाना लें, वरना रंगों की मस्ती अस्पताल की परेशानी में बदल सकती है।
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JK रणजी मैच से जुड़ी खबर नहीं मिली
VAVishnupriya AroraFeb 27, 2026 12:21:36
Noida, Uttar Pradesh:
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कल वर्किंग डे रहेगा; दो, तीन और चार छुट्टियों के आदेश जारी
KKKRISNDEV KUMARFeb 27, 2026 12:21:02
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