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आजम खां के जौहर यूनिवर्सिटी मामले में सरकारी धन दुरुपयोग के आरोप

Noida, Uttar Pradesh: आजम खां और जौहर ट्रस्ट पर सरकारी धन का दुरुपयोग, ब्लैक मनी, फर्जी दानदाता, डमी ट्रस्टी कार्रवाई की वजह बने हैं। ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के निर्माण में महज 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था। पूर्व में आयकर जांच में 494 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे。 सूत्रों के मुताबिक़, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों का करीब 110 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। आयकर विभाग की जांच में जौहर विश्वविद्यालय में अवस्थापना संबंधी कार्यों में इन विभागों का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे। इनमें सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विभाग विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल थे। जल निगम का दो अलग-अलग मदों में बजट खर्च किया गया था। इससे पुल, सड़क, रिवरफ्रंट, नहर को चौड़ा करने, इमारतों के निर्माण समेत तमाम कार्य कराए गए थे। सबसे ज्यादा सीएंडडीएस और जल निगम का करीबन 75 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग का 13.73 करोड़ रुपये व्यय हुआ था। हालांकि बाद में विभागीय अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आजम खां के प्रभाव की वजह से उनकी यूनिवर्सिटी पर सांसद और विधायक निधि का करीब 4.57 करोड़ रुपये भी लगाया गया। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने पर पूरी रकम वापस करनी पड़ी थी। यूनिवर्सिटी के अवस्थापना कार्यों के लिए दो दर्जन विधायकों ने अपनी निधि में से 10 लाख रुपये से लेकर 45 लाख रुपये तक दिए थे। आजम खां की पत्नी एवं तत्कालीन सांसद तजीन फात्मा ने अपनी सांसद निधि से तीन बार 22.39 लाख रुपये दिये थे। एमएलसी सरोजनी अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के लॉ संकाय में मूट कोर्ट के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना से तीन बार में 50 लाख रुपये दिये थे इसी तरह अखिलेश यादव ने अपनी निधि से लॉ संकाय में शौचालय के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने लॉ संकाय में डीन व प्रिसिंपल कक्ष के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत 10 लाख रुपये दिए थे ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक बैंकों में अपनी आय से अधिक नगदी जमा कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दान की रकम को स्वेच्छा के बजाय जबरदस्ती जमा कराया गया। बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया। ट्रस्ट ने कई वर्षों का अपना आईटीआर भी जमा नहीं किया था。 इन तत्कालीन विधायकों ने भी दी थी निधि बुक्कल नवाब - 40 लाख रुपये मधु गुप्ता - 30 लाख बलराम यादव - 15 लाख रमेश यादव - 20 लाख राम सुंदर दास - 20 लाख यशवंत सिंह - 10 लाख विजय यादव - 20 लाख अम्बिका चौधरी - 15 लाख अहमद हसन - 10 लाख लीलावती कुशवाहा - 50 लाख एसआरएस यादव - 25 लाख अशोक बाजपेई - 25 लाख राम सकल गुर्जर - 10 लाख رام जतन राजभर - 10 लाख
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