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अकाल तख्त ने पंजाब के MLA को माह का अल्टीमेटम दिया, एंटी-सेक्रीलेज एक्ट में संशोधन
Noida, Uttar Pradesh:DELHI: SUNIL JAKHAR (BJP) & KEWAL SINGH DHILLON (BJP) ON AKAL TAKHT GIVES PUNJAB MLAs ONE-MONTH ULTIMATUM TO AMEND ANTI-SACRILEGE ACT0
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मंदिर दान मामले पर राजेंद्र पाल गौतम का बयान, बंगाल में कांग्रेस पर हमला
Noida, Uttar Pradesh:UP Congress Incharge Rajendra Pal Gautam on Ram Temple Donation Row, Yogi attack on Congress, Cong-SP Alliance and UCC in West Bengal0
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कौशांबी में पेड़ काटने को लेकर विवाद खूनी संघर्ष में बदला
Noida, Uttar Pradesh:OPENING PTC कौशांबी में पारिवारिक बबूल का पेड़ काटने को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया...छोटे भाई पर बड़े भाई की पिटाई कर मौत के घाट उतारने का आरोप है.. CLOSING PTC मृतक बब्बू लाल बिहार में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे और पेड़ काटे जाने की सूचना मिलने पर गांव लौटे थे..अब पुलिस आरोपी छोटे भाई की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है0
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201304
लमगड़ा में अल्टो कार खाई में गिरकर 4 की मौत, 2 घायल
Noida, Uttar Pradesh:दुखद दुर्घटना लमगड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, खाई में गिरी कार; 4 की मौत, 2 घायल थानाध्यक्ष लमगड़ा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे, घायलों को पहुंचाया अस्पताल आज दिनांक 29.06.2026 को समय 14:00 बजे थाना लमगड़ा क्षेत्रान्तर्गत ग्राम बलिया-बैगनिया रोड पर एक अल्टो कार संख्या UK04Z-5819 के अनियंत्रित होकर लगभग 20–25 फीट गहरी खाई में गिरने की सूचना प्राप्त हुई। वाहन में कुल 06 व्यक्ति सवार थे। सूचना प्राप्त होते ही थानाध्यक्ष लमगड़ा श्री प्रमोद पाठक मय पुलिस टीम एवं आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, लमगड़ा पहुंचाया गया। चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के उपरांत दोनों घायलों को बेहतर उपचार हेतु हायर सेंटर रेफर किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन में सवार सभी व्यक्ति ग्राम विशौद बैगनिया से अपने गांव बलिया लौट रहे थे। दुर्घटना में चार व्यक्तियों की दुखद मृत्यु हो गई, जबकि दो व्यक्ति घायल हुए हैं। मृतकों के पंचायतनामा की कार्यवाही प्रचलित है。 घायलों का विवरण 1. गोपाल सिंह पुत्र खीम सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 45 वर्ष) 2. सचिन सिंह बिलवाल पुत्र राजेन्द्र सिंह बिलवाल, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 18 वर्ष) 3. मृतकों का विवरण 1. राजेन्द्र सिंह बिलवाल पुत्र नारायण सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 40 वर्ष) 2. जगदीश सिंह पुत्र लछम सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 35 वर्ष) 3. लछम सिंह पुत्र प्रताप सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 56 वर्ष) 4. पान सिंह पुत्र विशन सिंह, निवासी ग्राम बलिया, थाना लमगड़ा, जिला अल्मोड़ा (उम्र 55 वर्ष)0
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मध्य पूर्व तनाव से लखनऊ चांदी कारोबार मंद, कारीगरों को रोजगार संकट
Noida, Uttar Pradesh:मिडिल ईस्ट तनाव का असर, चांदी कारोबार मंद, चांदी की जूती चांदी की ताजिया बनाने वाले कारीगर परेशान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और चांदी की कीमतों में लगातार उछाल का असर अब लखनऊ के पारंपरिक चांदी कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है मोहर्रम में इस्तेमाल होने वाले चांदी के ताजिए, आलम और शादियों में पहनी जाने वाली चांदी की जूतियों की बिक्री इस बार बुरी तरह प्रभावित हुई है कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों की वजह से ग्राहक खरीदारी से पीछे हट रहे हैं, जबकि कारीगरों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है लखनऊ में चांदी की जूती और मोहर्रम में इस्तेमाल होने वाले चांदी के ताजिए और आलम बनाने वाले कारीगर इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं दुकानों पर खरीदारों की कमी है और पूरा मोहर्रम बीत जाने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक ऑर्डर नहीं मिले कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और चांदी के बढ़ते दामों ने बाजार की रफ्तार धीमी कर दी है "इस बार पूरा मोहर्रम निकल गया लेकिन न चांदी के ताजिए बिके और न ही आलम। पिछले साल का माल भी दुकान में रखा रह गया। पहले महीने में 12-15 चांदी की जूती बिक जाती थीं, अब मुश्किल से 1-2 बिकती हैं पहले जो जूती 10-12 हजार रुपये में बन जाती थी, अब उसकी कीमत 30-35 हजार रुपये हो गई है। चांदी का ताजिया भी 10 हजार से बढ़कर करीब 25 हजार रुपये का पड़ रहा है अब सिर्फ कुछ संपन्न लोग ही इसे खरीद पा रहे हैं।" बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन कारीगरों पर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी इसी काम पर निर्भर है काम नहीं मिलने से कई कारीगर अब दूसरा रोजगार तलाशने की सोच रहे हैं "पहले एक जोड़ी चांदी की जूती बनाने पर 2500 से 3000 रुपये तक मेहनताना मिल जाता था अब काम ही नहीं है मजबूरी में सोच रहे हैं कि कोई दूसरा काम करें, दुकान खोलें या फिर रिक्शा चलाएं, ताकि परिवार का खर्च चल सके।" लखनऊ की चांदी की कारीगरी वर्षों पुरानी विरासत मानी जाती है लेकिन बढ़ती लागत, घटती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के दाम बढ़ने से इस पारंपरिक कारोबार पर संकट गहराता नजर आ रहा है कारोबारियों और कारीगरों को उम्मीद है कि बाजार में स्थिरता लौटेगी तो उनकी रोजी-रोटी भी फिर पटरी पर आएगी0
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