दलौदा में बाल स्वयंसेवकों का आकर्षक पथ संचलन
Banikhedi, Madhya Pradesh:रविवार को दलौदा नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाल स्वयंसेवकों का पथ संचलन निकाला गया। यह संचलन संघ की घोष धुन पर नगर के मुख्य मार्गों से गुजरा। नगर के कई स्थानों पर विभिन्न संस्थाओं और संगठनों, जैसे सकल ब्राह्मण समाज, माहेश्वरी समाज, गीतांजली हॉस्पिटल, और युवा मोर्चा द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया। यह संचलन शाम 4 बजे गौतम नगर हनुमान मंदिर से शुरू होकर बस स्टैंड और परशुराम मार्ग होते हुए 6 बजे माहेश्वरी धर्मशाला में समाप्त हुआ।
असामाजिक तत्वों द्वारा पाटीदार समाज के युवक पर हमले की कार्यवाही को लेकर उठी मांग
Banikhedi, Madhya Pradesh:सर्व हिंदू समाज ने दलोदा थाना क्षेत्र के गांव रिछा में पाटीदार समाज ने व्यक्ति के साथ कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोगों द्वारा गर्दन पर धारदार हथियार मारने की घटना के खिलाफ मंदसौर पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की। इस सिलसिले में दलोदा थाना पर एफआईआर कराने के लिए समाज के लोग एकत्रित हुए।
दलोदा में राठी परिवार ने 71 गणेश प्रतिमाओं का वितरण किया
Banikhedi, Madhya Pradesh:गणेश चतुर्थी के अवसर पर दलोदा नगर के समाजसेवी मांगीलाल राठी और उनके परिवार ने 71 गणेश प्रतिमाओं का वितरण किया। यह आयोजन गीतांजलि हॉस्पिटल के परिसर में हुआ, जहां आसपास के 71 गांवों की गणेश उत्सव समितियों को नि:शुल्क प्रतिमाएं दी गईं। इस अवसर पर राठी परिवार, हॉस्पिटल स्टाफ, माहेश्वरी समाज के गणमान्य नागरिक और नगर के प्रबुद्ध जन भी उपस्थित रहे।
दलोदा में हरतालिका तीज व्रत की धूम, माताओं और बहनों ने किए पूजा और भजन
Banikhedi, Madhya Pradesh:दलौदा में हरतालिका तीज के अवसर पर विभिन्न मंदिरों और घरों में माताओं और बहनों ने पूजा अर्चना की और भजन गायन के साथ रात्रि जागरण किया। इस व्रत में भगवान शिव, पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की बालू रेत से आकृतियों का निर्माण किया गया। इनकी पूजा में विभिन्न फूल और पत्तियों का उपयोग किया गया। इस अवसर पर भगवान शिव से लोक और परिवार कल्याण की मनोकामना की गई, जिसमें सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
दलोदा में पर्युषण महापर्व पर भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन
Banikhedi, Madhya Pradesh:दलोदा में पर्युषण महापर्व के अवसर पर तीर्थंकर प्रभु भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन हुआ। भगवान के जन्म के तुरंत बाद थाली बजाकर नारियल वधारे गए और उन्हें पालने में झुलाया गया। जन्म से पूर्व कल्पसूत्र का वाचन भी किया गया।
