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डेढ़ हजार प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर ग्राउंड जीरो पर उतरे डीएम-एसपी

Banki, Uttar Pradesh:नवरात्र के समापन के बाद जिले के करीब डेढ़ हजार पूजा पंडालों में स्थापित देवी प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। तैयारियों का जायजा लेने के लिए डीएम ईशान प्रताप सिंह और एसपी रवीना त्यागी खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और कल्याणी नदी घाट का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और विसर्जन के दौरान सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए। जिले में सरयू, कल्याणी, गोमती, रेठ और सुमली नदियों सहित प्रमुख घाटों पर विसर्जन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। घाटों पर प्रकाश, बैरिकेडिंग, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नाविकों, गोताखोरों और फ्लड पीएसी के जवानों की तैनाती की जाएगी। रामनगर तहसील क्षेत्र में करीब आधा दर्जन विसर्जन घाट तैयार किए गए हैं। संजय सेतु के आगे सरयू नदी किनारे मिट्टी भरकर बोरियों की मदद से घाट बनाया गया है। यहां बल्लियों से बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं के प्रवेश को नियंत्रित किया गया है। इस घाट पर सौ से अधिक प्रतिमाओं के विसर्जन का अनुमान है। इसके अलावा सुमली नदी के पुरैना घाट, सरसवां पुल के पास और भगहर झील के निकट भी इंतजाम किए गए हैं। वहीं, मसौली थाना क्षेत्र में कल्याणी नदी पर भी विसर्जन घाट तैयार है। यहां श्रद्धालु आरती के बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच नाव से प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकेंगे। प्रशासन ने सभी घाटों पर व्यवस्था बनाए रखने और विसर्जन कार्यक्रम को सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। इस दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले भर में लगभग 1400 पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। गोताखोरों की तैनाती के साथ, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और विसर्जन के दौरान सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए गये हैं।
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रावण दरबार में हनुमान का डंका, फूंक डाली सोने की लंका, पिता के बाद पुत्र निभा रहे रावण की भूमिका

Banki, Uttar Pradesh:बाराबंकी शहर के दशहराबाग स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में श्री रामलीला सेवा समिति की ओर से अक्षय कुमार वध और लंका दहन की लीला का सजीव मंचन किया गया। रावण का विशाल काफिला और पुष्पक विमान देखने के लिए मुख्य मार्गों पर हजारों की भीड़ उमड़ी। लोगों ने घरों की छतों से भी लीला के दृश्य निहारे। पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। लीला में प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी को अपनी मुद्रिका देकर लंका भेजते हैं। अशोक वाटिका में माता सीता को मुद्रिका दिखाकर परिचय देने के बाद हनुमान जी वाटिका के फल खाते हैं और वृक्ष उजाड़ देते हैं। रावण अपने पुत्र अक्षय कुमार को उन्हें रोकने के लिए भेजता है, लेकिन हनुमान जी उसका वध कर देते हैं। इसके बाद मेघनाथ हनुमान जी को नागपाश में बांधकर रावण के दरबार में ले आता है। रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगाई जाती है, जिसके बाद हनुमान जी अपने विशाल स्वरूप से पूरी स्वर्ण लंका को जला देते हैं। इस दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया। लीला में रावण की भूमिका अमर सिंह वर्मा, अक्षय कुमार की अभिषेक मिश्रा और हनुमान जी की भूमिका राजीव पाठक ने निभाई। लीला व्यास पंडित प्रमोद पाठक की चौपाइयों ने दर्शकों को भक्तिरस में सराबोर किया। रामलीला में रावण की भूमिका निभाने की परंपरा समिति के महामंत्री शिवकुमार वर्मा से जुड़ी रही है। वह करीब 26 वर्षों तक इस किरदार को निभाते रहे। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने पुत्र अमर सिंह वर्मा को सौंप दी, जो पिछले नौ वर्षों से रावण का अभिनय कर रहे हैं। वहीं, लीला व्यास पंडित प्रमोद पाठक के ज्येष्ठ पुत्र राजीव पाठक हनुमान और उनके अनुज अंगद की भूमिका निभाते हैं। इस तरह रामलीला के मंचन में परिवारों की पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा भी जीवंत बनी हुई है।
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तीन पीढ़ियों से रावण का पुतला बना रहा मुस्लिम परिवार, बाराबंकी में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

Banki, Uttar Pradesh:मजहब अलग, लेकिन परंपरा एक। हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की ऐसी ही खूबसूरत मिसाल बाराबंकी में देखने को मिल रही है। यहां एक मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से दशहरे पर रावण का पुतला बनाने की परंपरा निभा रहा है। राम जानकी मंदिर में रावण दहन के लिए पुतला तैयार करने वाले कारीगर इमाम हुसैन अब अपने बच्चों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कारीगर इमाम हुसैन के मुताबिक, रावण का पुतला बनाने के लिए सबसे पहले फर्चियों से उसका ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद उस पर विभिन्न रंगों की पन्नियां लगाकर आकर्षक रूप दिया जाता है। उनकी कारीगरी से तैयार पुतले उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी लगाए जाते हैं। तीन पीढ़ियों से इस परंपरा से जुड़े परिवार की कहानी सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करती है। इमाम हुसैन का कहना है कि सभी लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और मिल-जुलकर त्योहार मनाने चाहिए। त्योहार समाज में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं। दशहरे के लिए रावण का पुतला तैयार करने में जुटा यह परिवार बताता है कि आपसी सद्भाव और साझा संस्कृति की परंपराएं मजहब की सीमाओं से परे हैं।
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