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कानपुर में बना यूपी का सबसे बड़ा जैविक खेती फार्म, किसानों को आधुनिक प्राकृतिक खेती मिलेगा लाभ
Bilhaur, Uttar Pradesh:महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में हुआ उद्घाटन, जैविक पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश कानपुर। महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, गदनपुर आहर,बिल्हौर, कानपुर नगर में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जैविक खेती फार्म का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में भव्य जैविक पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा डॉ. हीरा लाल पटेल (आईएएस), सचिव, राष्ट्रीय एकीकृत शिक्षा परिषद ने संयुक्त रूप से पौधारोपण कर किया। डॉ. हीरा लाल पटेल ने कहा कि आज के समय में रासायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती ही भविष्य का सबसे बेहतर विकल्प है। किसानों को ऐसी खेती अपनाने के लिए जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन फार्मरफेस ऑर्गेनिक टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री मोहन मुरारी सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और रसायनों पर निर्भरता कम करने का आह्वान किया। कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्थापित यह जैविक खेती फार्म केवल खेती का क्षेत्र नहीं होगा, बल्कि शोध, नवाचार और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां किसानों, कृषि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को जैविक खेती, प्राकृतिक खाद, उन्नत कृषि तकनीकों, जल संरक्षण और कम लागत वाली खेती का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे किसानों को अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। गवर्निंग बॉडी के मेंबर राहुल भारद्वाज और पंकज शर्मा के अनुसार यह फार्म आने वाले समय में कानपुर और आसपास के जिलों के किसानों के लिए एक मॉडल फार्म के रूप में विकसित होगा। यहां तैयार होने वाली तकनीकों और प्रशिक्षण का लाभ प्रदेश के हजारों किसान उठा सकेंगे। इससे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम होगी, कृषि लागत घटेगी, जैविक उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। इसके साथ ही यह केंद्र भारत में टिकाऊ कृषि, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों ने भाग लिया। सभी ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और जैविक खेती को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। मुख्य बिंदु - * उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जैविक खेती फार्म का शुभारंभ। * किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। * आधुनिक कृषि तकनीक, शोध और नवाचार का विकसित होगा प्रमुख केंद्र। * मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने में मिलेगी मदद। * कानपुर और आसपास के जिलों के किसानों के लिए बनेगा मॉडल फार्म। * जैविक उत्पादों के उत्पादन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में निभाएगा अहम भूमिका। * पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को मिलेगा बढ़ावा। * कृषि विद्यार्थियों और शोधार्थि0
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कानपुर में बना यूपी का सबसे बड़ा जैविक खेती फार्म, किसानों को मिलेगा आधुनिक प्राकृतिक खेती का प्रशिक
Bilhaur, Uttar Pradesh:महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में हुआ उद्घाटन, जैविक पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश कानपुर। महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, गदनपुर आहर,बिल्हौर, कानपुर नगर में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जैविक खेती फार्म का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में भव्य जैविक पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव तथा डॉ. हीरा लाल पटेल (आईएएस), सचिव, राष्ट्रीय एकीकृत शिक्षा परिषद ने संयुक्त रूप से पौधारोपण कर किया। डॉ. हीरा लाल पटेल ने कहा कि आज के समय में रासायनिक खेती से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती ही भविष्य का सबसे बेहतर विकल्प है। किसानों को ऐसी खेती अपनाने के लिए जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन फार्मरफेस ऑर्गेनिक टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री मोहन मुरारी सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और रसायनों पर निर्भरता कम करने का आह्वान किया। कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्थापित यह जैविक खेती फार्म केवल खेती का क्षेत्र नहीं होगा, बल्कि शोध, नवाचार और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां किसानों, कृषि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को जैविक खेती, प्राकृतिक खाद, उन्नत कृषि तकनीकों, जल संरक्षण और कम लागत वाली खेती का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे किसानों को अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। गवर्निंग बॉडी के मेंबर राहुल भारद्वाज और पंकज शर्मा के अनुसार यह फार्म आने वाले समय में कानपुर और आसपास के जिलों के किसानों के लिए एक मॉडल फार्म के रूप में विकसित होगा। यहां तैयार होने वाली तकनीकों और प्रशिक्षण का लाभ प्रदेश के हजारों किसान उठा सकेंगे। इससे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम होगी, कृषि लागत घटेगी, जैविक उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। इसके साथ ही यह केंद्र भारत में टिकाऊ कृषि, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों ने भाग लिया। सभी ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और जैविक खेती को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। मुख्य बिंदु - * उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जैविक खेती फार्म का शुभारंभ। * किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती का व्यवहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। * आधुनिक कृषि तकनीक, शोध और नवाचार का विकसित होगा प्रमुख केंद्र। * मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने में मिलेगी मदद। * कानपुर और आसपास के जिलों के किसानों के लिए बनेगा मॉडल फार्म। * जैविक उत्पादों के उत्पादन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में निभाएगा अहम भूमिका। * पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि को मिलेगा बढ़ावा। * कृषि विद्यार्थियों और शोधार्थि0
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