225208आधुनिक शिक्षा का केंद्र बना जामिया इस्माइलिया मसौली शरीफ,दीनी तालीम के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी
तिलोकपुर, उत्तर प्रदेश:मसौली शरीफ, बाराबंकी (उत्तर प्रदेश):
मसौली शरीफ में स्थापित शैक्षणिक संस्था जामिया इस्माइलिया सैयद गुलज़ार इस्माइली वास्ती, जिन्हें गुलज़ार-ए-मिल्लत के नाम से भी जाना जाता है, की सरपरस्ती में दीनी और आधुनिक शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है। यह संस्था पारंपरिक इस्लामी शिक्षा के अंतर्गत हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन, आलिमियत और मुफ़्ती जैसे सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर गणित, विज्ञान, भूगोल, अंग्रेज़ी और हिंदी जैसे आधुनिक शैक्षणिक विषयों की भी शिक्षा देती है। इस दोहरे पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को दीनी विशेषज्ञता के साथ-साथ समकालीन शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। संस्था के प्रशासन के अनुसार, जामिया इस्माइलिया की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि शास्त्रीय इस्लामी अध्ययन को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके, ताकि छात्र आधुनिक अकादमिक विषयों से कटे बिना दीनी तालीम हासिल कर सकें। इस संस्था में मसौली शरीफ और बाराबंकी ज़िले के आसपास के क्षेत्रों से विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दूरदराज़ के इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए आवासीय सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं, जिससे वे सुव्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। शिक्षाविदों का मानना है कि समन्वित पाठ्यक्रम अपनाने वाली संस्थाएँ पारंपरिक मदरसा शिक्षा और आधुनिक स्कूली शिक्षा के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। धार्मिक अध्ययन के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष विषयों को शामिल कर जामिया इस्माइलिया अपने छात्रों के लिए व्यापक शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। संस्था से जुड़े समुदाय के सदस्यों का कहना है कि इसके स्नातक राज्य के विभिन्न हिस्सों में शिक्षण, धार्मिक सेवाओं और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो इस शैक्षणिक पहल के व्यापक सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है।
जामिया इस्माइलिया के प्रबंधन ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए शैक्षणिक विकास तथा बुनियादी ढाँचे के विस्तार की योजनाएँ प्रस्तावित हैं।
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