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बलिया पहुंचे अभिनेता एवं भाजपा सांसद रवि किशन ने महिला आरक्षण बिल संशोधन को लेकर विपक्ष पर साधा निशा
Ballia, Uttar Pradesh:बलिया पहुंचे अभिनेता एवं भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध परिवार वाद वालों ने किया। जीने लगता है कि घर की महिलाएं आगे आ जाएगी और पुरुष का वर्चस्व खत्म हो जाएगा इस धारणा को ही प्रधानमंत्री मोदी तोड़ना चाहते थे। वही कहा कि प्रधानमंत्री जो प्रण लेते हैं उसे पूरा जरूर करते हैं 2019 में हम पूरी संख्या के साथ आएंगे और इस बिल को पारित करेंगे। वही कहा कि विपक्ष इसे अपनी जीत कैसे कह सकता है ।महिलाओं महिला शक्ति को हराकर आखिरकार कैसी जीत। वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव पर प्रधानमंत्री के झालमुरी खाने पर कहा कि प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के गुंडे और माफिया को यह चेतावनी दे दी है कि वह जमीन पर उतरकर पश्चिम बंगाल की जनता की रक्षा और सुरक्षा के लिए खड़े हैं। साथी प्रधानमंत्री ने गुंडे माफियाओं को यह चेतावनी भी दी है कि 29 तक थाने में सरेंडर करले वरना 4 मई को रिजल्ट आने के बाद कोई बचेगा नहीं।0
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महिला आरक्षण बिल के संशोधन का बलिया की महिलाओं ने किया स्वागत
Ballia, Uttar Pradesh:देश की संसद में महिला आरक्षण बिल एवं सीट परिसीमन संशोधन विधेयक को लेकर तीन ड्राफ्ट पेश किया जा रहे हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की कवायद को लेकर बलिया की महिलाओं का कहना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए। आजादी के बाद देश की आधी आबादी अभी भी अपने अधिकारों से वंचित है। वहीं कुछ महिलाओं का कहना है की सरकर के इस कदम का पक्ष और विपक्ष सभी पार्टियों को समर्थन करना चाहिए ताकि महिलाओं को मिलने वाला 33% आरक्षण पूरी तरीके से लागू हो सके। वहीं अन्य महिलाओं ने कहा कि आज भी महिलाएं राजनीति में स्टांप की तरह काम कर रही है यानी पुरुषों का वर्चस्व अभी भी काफी हद तक बना हुआ है। ऐसे में महिलाओं का शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त होना जरूरी है ताकि पुरुषों के बजाय वह स्वयं निर्णय लेने की क्षमता अपने अंदर पैदा कर सकें। महिलाओं ने कहा कि अगर परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ती है तो वह नजारा बेहद खूबसूरत होगा जब बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा सहित लोकसभा में प्रतिनिधित्व करती दिखाई देगी0
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बांसडीह विधानसभा को लेकर डॉ0 संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर के बयान से सियासी सरगर्मियां बढ़ी
Ballia, Uttar Pradesh:बलिया के बांसडीह विधानसभा को लेकर सियासी पारा चरम पर चढ़ रहा है। सीट एक लेकिन सत्ता से जुड़े दो दावेदारों के अलग-अलग बयान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी अपनी राय रख रहे हैं। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का बांसडीह विधानसभा सीट को लेकर कहना है कि बीजेपी और घटक दल तय करते हैं की समीकरण क्या होगा इसके बाद प्रत्याशी तय करते है। बस्ती के समीकरण में सबसे ज्यादा निषाद हैं। हमने भाजपा से हारी हुई 11 सीटे ली थी जिसमें से 9 सीटे हमने जीती। वहां भारतीय जनता पार्टी कभी जीत नहीं सकती थी। जब हम हारी हुई सीट को जीत सकते हैं तो भाजपा भाजपा हारने के लिए ऐसी सीट क्यों लेगी। बीजेपी इस सीट पर पहले भी चुनाव लड़ चुकी है और क्या दशा था सभी जानते हैं। जब निषाद पार्टी के खाते से चुनाव लड़ा गया। सिंबल एक रणनीति है यह अलग बात है। ओम प्रकाश राजभर के बयान पर कहा कि यही जान जाते तो सभी लोग राजनीति कर लेते। हालांकि इस मसले पर कुछ दिनों पूर्व ओमप्रकाश राजभर ने बयान दिया था कि बांसडीह विधानसभा सीट पर किसी सहयोगी दल नहीं बल्कि बीजेपी के सिंबल पर प्रत्याशी ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज किया था। लिहाज़ा बांसडीह विधानसभा सीट सहयोगी दल की सीट नहीं है।0
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सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले के निधन पर बलिया में संगीत प्रेमियों ने दिया संगीतमय श्रद्धांजलि
Ballia, Uttar Pradesh:सुप्रसिद्ध गायिका आशा भोसले के निधन से बलिया के संगीत प्रेमियों में शोक की लहर है। संगीत प्रेमियों ने आशा भोसले को अपना लीजेंड बताते हुए उनके चित्र के सामने उनके द्वारा गाए गए गीतों को गाया। वही संगीत प्रेमियों ने कहा कि आशा भोसले ने अलग-अलग भाषाओं में हजारों गीत गाए। संगीत प्रेमियों ने कहा कि आशा भोसले की जादुई आवाज के सिर्फ भारत में नहीं बल्कि विदेशों में बड़ी संख्या फैन्स है। भारत सरकार को उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।0
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बलिया में मनाया गया ज्योतिबा राव फुले का जयंती समारोह
Ballia, Uttar Pradesh:-बलिया में महात्मा ज्योतिबा राव फुले का जयंती समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान माली समाज से जुड़े बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए। माली विकास कल्याण सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ एस के सैनी ने कहा कि ज्योतिबा राव फुले ने समाज को बहुत कुछ दिया। लेकिन सरकारे जरूर बदली पर माली समाज का सदन में प्रतिनिधित्व नहीं रहा। ऐसे में माली समाज जागरूक हो चुका है और समाज के उत्थान के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व जरूरी है। वही कहा कि देश के सभी नेता माला जरूर पहनते हैं जिसे माली समाज तैयार करता है लेकिन उनके उत्थान और विकास के बारे में कोई भी राजनीतिक पार्टी नहीं सोचती।0
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