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भिलाई के हथखोज स्थित मयूरा कंपनी में भारी सामान गिरने से मजदूर चंद्रशेखर सिंह की दर्दनाक मौत, साथी श

Durg, Chhattisgarh:औद्योगिक क्षेत्र हथखोज स्थित मयूरा कंपनी में शनिवार सुबह कार्य के दौरान भारी सामान गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। इस दुर्घटना में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत बिहार निवासी श्रमिक चंद्रशेखर सिंह गंभीर रूप से दब गए। ​सीएसपी छावनी प्रशांत सिंह ने बताया कि सुबह करीब 8 बजे हादसे की सूचना मिलते ही मजदूर को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद सुरक्षा मानकों में लापरवाही का आरोप लगाते हुए साथी श्रमिकों ने काम रोककर कंपनी परिसर में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और मामले की जांच में जुटी है।
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सीट बेल्ट ने बचाई चार जिंदगियां: गरियाबंद हादसे का वीडियो साझा कर पुलिस अधिकारी गोपाल वैश्य ने दिया

Majarkata, Chhattisgarh:गरियाबंद जिले के नवागढ़ स्थित मुरधुनी नाला (NH-130C) पर 18 सितंबर 2026 को हुए सड़क हादसे में सीट बेल्ट जीवन रक्षक साबित हुई। रायपुर निवासी ड्राइवर इंद्र कुमार साहू ने सीट बेल्ट पहन रखी थी, जिससे दुर्घटना के वक्त उन्होंने स्टीयरिंग पर नियंत्रण बनाए रखकर खुद सहित 3 अन्य यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। ​गीत-संगीत के माध्यम से ट्रैफिक व साइबर जागरूकता फैलाने के लिए प्रसिद्ध वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गोपाल वैश्य ने इस घटना का वीडियो अपने फेसबुक वॉल पर साझा किया है। यह वाकया हर वाहन चालक को सीट बेल्ट लगाने की सख्त सीख देता है।
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2017 में 56 टुकड़ों में ढोलकल गणेश प्रतिमा का हुआ था सफल जीर्णोद्धार,आधी सूंड के साथ विराजे हैं बप्प

Dantewada, Chhattisgarh:छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित बैलाडीला पहाड़ी पर 3 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजे 11वीं सदी के ऐतिहासिक ढोलकल गणेश जी की प्रतिमा का जीर्णोद्धार पुरातात्विक इतिहास की एक मिसाल है। वर्ष 2017 में असामाजिक तत्वों द्वारा पहाड़ी से नीचे गिराए जाने के बाद यह दुर्लभ ग्रेनाइट प्रतिमा 56 टुकड़ों में बिखर गई थी। पुरातत्वविद अरुण कुमार शर्मा के निर्देशन में विशेषज्ञों की टीम ने महज तीन दिनों में विशेष केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए इन टुकड़ों को जोड़कर प्रतिमा को पुनः स्थापित किया था। मूल सूंड का टुकड़ा न मिलने के कारण पुरातात्विक नियमों का पालन करते हुए कोई कृत्रिम बदलाव नहीं किया गया, जिससे भगवान गणेश अब आधी सूंड के साथ ही मूल स्वरूप में नजर आते हैं। घने जंगलों और 8 किमी दुर्गम चढ़ाई के बावजूद इस चमत्कारिक स्वरूप के दर्शन के लिए आज भी देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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