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वन सिटी, वन कॉर्पोरेशन: राजस्थान के तीन नगर निगम प्रशासनिक मोड में लौटे
DGDeepak Goyal
Nov 08, 2025 13:08:40
Jaipur, Rajasthan
राजधानी जयपुर समेत जोधपुर और कोटा की शहरी सरकारें अब बदलने जा रही हैं। छह साल बाद फिर से ये शहर अपने पुराने ढांचे में लौटेंगे। 10 नवंबर से इन तीनों शहरों में चल रहे छह नगर निगम मर्ज होकर तीन रह जाएंगे। यानी जयपुर में एक, जोधपुर में एक और कोटा में एक निगम। सरकार ने तीनों संभागीय आयुक्तों को प्रशासक नियुक्त किया है। यानी अब मेयर नहीं, बल्कि आयुक्त तय करेंगे कि शहर का कौन-सा काम कब और कैसे होगा। जनता की चुनी हुई शहरी सरकारें इतिहास बन जाएंगी और शहरों की बागडोर अब अफसरों के हाथ में होगी。
2019 का ‘डबल निगम’ प्रयोग खत्म।
साल 2019 में गहलोत सरकार ने विकास के नाम पर जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगम बनाए थे। मकसद था स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाना और क्षेत्रीय विकास को तेज करना। लेकिन नतीजा उल्टा निकला। दो दफ्तर, दो बजट, दो महापौर और बीच में उलझा आम नागरिक। अब सरकार उसी गलती को सुधारते हुए फिर से “वन सिटी, वन कॉर्पोरेशन” मॉडल पर लौट आई है。
अब नहीं चलेगा पार्षद का लेटरहेड。
10 नवंबर से आमजन के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब पार्षदों की सिफारिशें या लेटरहेड मान्य नहीं रहेंगे।
आधार कार्ड अपडेट, पेंशन आवेदन या किसी भी स्थानीय कार्य के लिए अब पार्षद के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होगी।
न सफाई की शिकायत पर “हम बात करवा देंगे” सुनाई देगा,
न स्ट्रीट लाइट के लिए पार्षद का फोन काम करेगा। अब सब कुछ होगा प्रशासनिक चैन से।
सीधे दफ्तर, फाइल और फॉलोअप के जरिए。
फरवरी बाद ही होंगे निकाय चुनाव
राज्य सरकार वन स्टेट, वन इलेक्शन मॉडल पर काम कर रही है। फरवरी 2026 के बाद ही प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव करवाने की योजना है। फिलहाल 50 निकायों का कार्यकाल दिसंबर में, 90 का जनवरी में और एक निकाय का फरवरी में पूरा होगा।
यानि फरवरी तक पूरा राजस्थान ‘प्रशासकीय मोड’ पर रहेगा।
निर्वाचन आयोग फरवरी तक विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम पूरा करेगा। जिसके बाद ही चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी。
309 निकायों में अब नई बिसात बिछेगी
राज्य में फिलहाल कुल 309 नगरीय निकाय हैं।
इनमें से 116 निकाय पिछले कुछ वर्षों में ग्राम पंचायतों को अपग्रेड कर बनाए गए,
जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा के तीन निगमों को खत्म करने की अधिसूचना कुछ माह पहले जारी हुई थी। यानि आने वाला साल निकाय चुनावों का साल होगा। फिलहाल शहरों की सरकारें जनता के हाथों से निकलकर प्रशासन के हाथों में आ गई हैं।
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