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नागपूर में मोहन भागवत का भाषण: राष्ट्रवाद और लेखन पर गहरा विचार
AKAMAR KANE
Nov 29, 2025 10:10:00
Nagpur, Maharashtra
Ngp Mohan bhagwat program live u ने फीड पाठवले अाणि लिंकही ग्रुपवर दिली होती नागपूर सरसंघचालक मोहन भागवत, भाषण ( नागपूर पुस्तक महोत्सवमध्ये लेखक संवाद कार्यक्रमात सत्रसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत यांनी मार्गदर्शन केले त्यावेळी चे भाषण ) -- लिखने के बारे मे आज से हु... लेकिन पढने के बारे मे बहुत रुचि रखता हु.. --- लिखने वालो के समझकर से जो समझमैं आता है वही में आपके बताने वाला हुं --- ज्ञान का दो प्रकारकां अर्थ होता है जानकारी मिलती है वो भी ज्ञान है... समझदारी मिलती वह भी ज्ञान है.. ---केवल जानकारी पहुंचानी है या समझदारे भी पहुंचानी है --- कथा मेने सुनी गणित और फिसिक्स के प्रोफेसर बैठे है.. वह पूछ रहे थे की क्या लिखे.. ग्राव्हिटी, प्रवाह कैसे.. acceleration --- तो नौका चलान के व पेट भरने मे जीवन गयां.. कब लिखेगे.... फिर बोलें 1/4 आयुष्य बेकार गया... फिर गणित वाले सामने आये.... आप गुजारा करते हो तो गिनती आती क्या... लेकिन वह भी नही आती थी.... फिर आपका ये यह भी 1/4 आयुष्य बेकार गया... थोडी देर बाद तुफान आया.... नौका चलाने वाले ने पूछा कि महाशय आप को तैरना आता है क्या... लेकिन वो बोले हमे तैरना नही आता... फिर नौका चलाने वाला बोला... मेरी तो आधी जिंदगी गई आप की पुरी जान जाने वाली है.. -- जानकारी आवश्यक है.. लेकिन व्यवहारिक चाहिए... यश कां मापदंड देखा तो दुनिया मे मेजोरीटी फेल्यूअर है... -- गलतीयो से सिखता है बोध लेता है वह आगे बढता है.. चमकता है ---यश थोडे लोगो का होता है.. लेकिन तात्कालिक है.. दुसरा उसका रेकॉर्ड तोडता है -- अपना जीवन दुसरो के काम मे आना चाहिये.. -- ऐसा ज्ञान साहित्य से मिलता है -- साहित्य सृजनता लेखक का गुणधर्म है ---साहित्य याने साथ देनेवाला.. मनुष्य जीवन को उन्नत बनानेवाला -- एक शब्द उलटा प्रयोग किया बहुत बाते बिघडता है -- लिखते है उसमे भाव चाहिये... *हम समाज मे काम करते है... हम राष्ट्रवादी है लोग कहते है.... हम विवाद करते नही विवाद से दूर रहते है* --हमारे राष्ट्र की कल्पना अलग है.. उनकी भिन्न है... हमारे राष्ट्र शब्द को नॅशनॅलिझम हो गया.. --हम अपने शब्द को नही जानते नही -- *हम राष्ट्रीयता कहते है.. नेशनहूड कह सकते है* -- हमारा राष्ट्र पहले से है... हम राष्ट्रीयता कहते है... --उधर के नॅशनलिझम के वजह से दो युद्ध हो हुए... -- हमारा राष्ट्र अहंकार से नही जन्मा --- हमारे राष्ट्र की भाषा मे तत्व मे नही... आम भाषा मे पता चलता है.. व्यावहारिक है --राष्ट्र का कुछ संबंध नही -- राष्ट्र का पहिला प्राण जनपदवती भूमी यह है.. राष्ट्र स्टेट का नही है.. गुलाम थे त भी हम थे ... --आप लेखन मैं राष्ट्र शब्द का उपयोग उल्लेख करोगे लेकिन अगर वह नेशन शब्द से भाशांतर करोगे तो वह भाव नही पहुंचता है -- *लोग मुझे पुछते है आप राष्ट्रवादी हो क्या तो मे कहता हू राष्ट्रीय हू* *उसमे वाद क्यो* -- बहुंत बात तर्क परे है.. मैं राष्ट्रीय हुं --शब्द अलग उपयोग करने से बहुत चीजे गडबडाती है ---- साहित्य मनुष्य के विचार को बनता है -- lअपने देश को ऐसेही बिघडा गया... हमारी एकता को बिघाडने का प्रयास किया है.. इसलिए आप के सामने कृतज्ञता व्यक्त करता हुं...
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